विश्व बैंकः दुनिया में मंदी, भारत को फ़ायदा

  • 14 जनवरी 2015
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विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि आने वाला साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट भरा साबित हो सकता है.

साल 2015 में वैश्विक आर्थिक विकास दर का पूर्वानुमान लगाते हुए बैंक ने कहा है कि अमरीका अकेले आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता है.

विश्व बैंक की हर दो साल पर आने वाली रिपोर्ट बताती है कि बैंक ने वैश्विक आर्थिक विकास दर के इस साल और अगले साल के पूर्वानुमान को घटाकर क्रमशः 3 फीसदी 3.3 फीसदी कर दिया है.

पिछले साल जून में 2015 और 2016 के लिए बैंक का पूर्वानुमान क्रमशः 3.4 फीसदी और 3.5 फीसदी रहा था.

भारत में तेजी

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प्रमुख अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने चेतावनी दी है, "विश्व की अर्थव्यवस्था को केवल एक इंजन... अमरीका खींच रहा रहा है और ये आदर्श स्थिति नहीं है."

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हालांकि तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद कहा जा रहा है कि इससे कुछ देशों को फायदा पहुंचेगा.

बसु कहते हैं, "संभव है कि तेल की घटी हुई कीमतें 2015 में इसी स्तर पर बनी रहें. इससे विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति की दर कम होगी और विकसित देशों में ब्याज दरों में वृद्धि को टालेगी."

उन्होंने कहा, "इससे चीन और भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि भारत का विकास दर साल 2016 तक बढ़कर 7 फीसदी हो जाएगा."

रूस को नुकसान

हालांकि बैंक ने अगाह किया है कि तेल की कम क़ीमतें रूस जैसे तेल निर्यातक देशों के विकास को नुकसान पहुंचाएंगी.

बैंक का अनुमान है कि रूस की अर्थव्यवस्था में इस साल 2.9 प्रतिशत का संकुचन होगा और 2016 में यह महज 0.1 प्रतिशत की दर से विकास करेगी.

यूरोज़ोन के बारे में बैंक का अनुमान है कि यहां निम्न मुद्रास्फ़ीति बनी रहेगी और 2015 में 1.1 प्रतिशत की विकास दर रहेगी. बैंक का अनुमान है कि 2016-17 में यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था 1.6 प्रतिशत के दर से विकास करेगी.

बैंक का अनुमान है कि जापान की अर्थव्यवस्था 2015 में 1.2 प्रतिशत और इसके अगले साल 1.6 प्रतिशत की दर से विकास कर सकती है.

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