बीबीसी ट्रेंडिंग: फ्रांस का 'दोहरा मापदंड'

  • 18 जनवरी 2015
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यहूदी विरोध के लिए कई बार आलोचना झेल चुके फ़्रांसीसी कॉमेडियन ड्योडोनी एमबाला के हज़ारों प्रशंसक फ्रांस पर पाखंड और दोहरे मापदंड अपनाए जाने का आरोप लगा रहे हैं क्योंकि फ्रांस में दर्जनों लोगों के ख़िलाफ़ चरमपंथ के समर्थन के पुराने मामलों की फिर से जाँच शुरू कर दी गई है.

ड्योडोनी को एक फ़ेसबुक पेज पर 'जे मी सेंस शार्ली कॉलीबाली' (मैं ख़ुद को शार्ली कॉलिबाली महसूस कर रहा हूं) लिखने के बाद चरमपंथ के समर्थन के आरोप में हिरासत में ले लिया गया था. बाद में यह टिप्पणी हटा दी गई थी.

उनको हिरासत में लिए जाने के बाद से ही उनके प्रशंसक काफ़ी ग़ुस्से भरी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं.

अमिदी कॉलिबाली वो व्यक्ति थे जिन्होंने पिछले हफ़्ते पेरिस में एक यहूदी स्कूल के नज़दीक एक महिला पुलिस अधिकारी की और एक यहूदी सुपरमार्केट के पास चार आम लोगों की हत्या की थी.

फ्रांस में पिछले हफ़्ते हुए अलग-अलग चरमपंथी हमलों में 17 लोग मारे गए थे. जिनमें से 12 लोग व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हुए हमले में मारे गए थे.

घटना के बाद ' जे सुइश शार्ली' (मैं हूँ शार्ली) हैशटैग सोशल मीडिया पर काफ़ी प्रयोग किया गया. लाखों लोग तख़्तियों पर इसे लिखकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे.

टिप्पणी का बचाव

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ड्योडोनी ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि वो ये कहना चाह रहे थे कि उन्हें फ्रांसीसी अधिकारी ऐसे परेशान कर रहे हैं जैसे कि वो संदिग्ध चरमपंथी हैं.

शार्ली एब्डो पर हमले के विरोध में पेरिस में लाखों लोगों के यूनिटी मार्च में शामिल होने पर टिप्पणी करते हुए ड्योडोनी के एक प्रशंसक ने उनके फ़ेसबुक पेज पर लिखा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मर चुकी है, रविवार को इसका अंतिम संस्कार ख़ूबसूरत था."

उनके एक अन्य प्रशंसक ने लिखा, "क्या ढोंग है! आप क़ानूनी तौर पर कार्टून बनाकर पैग़ंबर और मुसलमानों का अपमान कर सकते हैं, कुलीनतंत्रवादी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते हैं... हम एक प्रकार के छद्म-लोकतंत्र वाली तानाशाही में जी रहे हैं."

पहले भी फंस चुके हैं

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ड्योडोनी अपने मज़ाक़ों के चलते कई बार क़ानूनी मुसीबत में फंस चुके हैं. सोशल मीडिया पर उनके नौ लाख से ज़्यादा फ़ैंस हैं.

उनके पेज पर ज़्यादातर कमेंट्स उनके समर्थन में ही हैं लेकिन फिर भी उनके कई प्रशंसक यह भी मानते हैं कि ड्योडोनी ने इस बार सीमा का उल्लंघन किया है.

उनके एक प्रशंसक ने लिखा है, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नफ़रत फैलाने में बहुत अंतर है. शार्ली एब्डो ने पैग़ंबर का कार्टून बनाया, उनका मज़ाक़ उड़ाया जिससे मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूं. उस कार्टून ने कई लोगों को हंसाया, कई लोगों को हैरान किया, लेकिन नफ़रत फैलाने को किसी भी क़ीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता. और दोनों बातों के बीच यह एक बहुत बड़ा फ़र्क़ है."

(माइक वेंडिंग का ब्लॉग)

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