पाक: मदरसों पर पकड़ बनाने की सरकारी कोशिश

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पाकिस्तान सरकार ने देश में स्थापित धार्मिक मदरसों के आंकड़े इकट्ठा करने के लिए एक सर्वे शुरू किया है जिसके परिणाम के आधार पर इन मदरसों के भविष्य का फ़ैसला किया जाएगा.

इस सर्वे के आधार पर मदरसों को लाल (ख़तरनाक) और हरी (व्यवस्थागत) श्रेणी में विभाजित किया जाएगा.

लाल और हरे मदरसों की पहचान के लिए गृह मंत्रालय ने एक मोबाइल फ़ोन एप्लीकेशन भी तैयार किया है जो मदरसों का सर्वे करने वाले अधिकारियों को दिया जाएगा.

इस एप्लीकेशन के माध्यम से सर्वे किए जाने वाले मदरसे की तस्वीरें और अन्य विवरण गृह मंत्रालय में स्थापित प्रणाली तक तुरंत भेजे जा सकेंगे.

'नियामक संस्था'

पेशावर में स्कूल पर हमले के बाद बनी राष्ट्रीय कार्रवाई योजना के तहत होने वाले इस सर्वे की पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के संघीय मंत्री सरदार मोहम्मद यूसुफ़ ने पुष्टि की है.

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Image caption पाकिस्तान में मदरसों को हरी और लाल श्रेणी में विभाजित किया जाएगा.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि चारों प्रांतों, गिलगित बलतिस्तान और पाक प्रशासित कश्मीर के अलावा संघीय राजधानी में एक साथ शुरू होने वाला सर्वे बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा.

मोहम्मद यूसुफ़ ने कहा, "गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों के अधिकारी मदरसों में जाकर वहां मौजूद शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों के आंकड़े एकत्र कर रहे हैं. इससे हमें इन मदरसों के बारे में सही जानकारी मिल जाएगी कि छात्र कौन हैं, कहां से आए हैं. इसी तरह यह भी कि वहां पाठ्यक्रम में क्या कुछ पढ़ाया जाता है, इमारत कहां है और कैसी है. "

मंत्री ने बताया कि मदरसों के साथ परामर्श से सरकार संघीय स्तर पर ऐसी नियामक संस्था बनाने का इरादा रखती है जो मदरसों के पंजीकरण से लेकर पाठ्यक्रम तक को मंज़ूरी देगी.

"मदरसों के लिए बनाए जाने वाले इस नियामक प्राधिकरण में शिक्षा विभाग, मंत्रालय के अधिकारी, कर्मचारी और मदरसों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह संस्था मदरसों का पंजीकरण करेगी. उन्हें विज्ञान पढ़ाने के लिए शिक्षक के साथ ही पैसा और कंप्यूटर भी सरकारी ख़ज़ाने से दिए जाएंगे."

मंत्री ने बताया कि मदरसों के प्रशासकों के परामर्श से इन दोनों परियोजनाओं पर तेज़ी से काम जारी है और बहुत जल्द देश में मदरसों के बारे में प्रणाली गठन कर ली जाएगी जिस पर मदरसे और सरकार दोनों सहमत होंगे.

हरे और लाल मदरसे

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उन्होंने इस धारणा का खंडन किया कि पाकिस्तान में स्थापित मदरसे चरमपंथ में लिप्त हैं या वहां सांप्रदायिक चरमपंथ की शिक्षा दी जाती है, "मैं विश्वास से कह सकता हूँ कि हमारे मदरसे किसी प्रकार के उग्रवाद में शामिल नहीं हैं."

उन्होंने कहा कि सरकार पंजीकृत मदरसों पर नज़र रखे हुए है और वहां ऐसा काम करना संभव नहीं है.

अलबत्ता उन्होंने स्वीकार कि कुछ मदरसे हैं जो पंजीकृत नहीं हैं और गुप्त रूप से चरमपंथ का प्रचार करते हैं और चरमपंथी संगठनों के साथ भी उनके संबंध हैं.

वह कहते हैं, "सर्वे पूरा होने के बाद ऐसे मदरसों की पहचान भी हो जाएगी जिसके बाद अपने आप को रजिस्टर न करवाने वाले मदरसों के ख़िलाफ़ संविधान के इक्कीसवें संशोधन के मुताबिक़ 'आतंकवाद' के मामले चलेंगे."

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि यही वह मदरसे हैं जो लाल श्रेणी में रहेंगे और सर्वे के बाद अगर यह मदरसे हरी श्रेणी में न आए तो उनके ख़िलाफ़ सैन्य अदालतों में मामले चलेंगे.

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस सर्वे से पहले देश में स्थापित मदरसों को तीन वर्गों में विभाजित कर रखा है और उसी के अनुसार सर्वे के दौरान उनसे आंकड़े जुटाए जा रहे हैं.

पंजीकृत मदरसों की संख्या लगभग तीस हजार है. इन मदरसों के साथ पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए बातचीत हो रही है जबकि अन्य किस्म अपंजीकृत मदरसों की है और सरकार इन मदरसों को व्यवस्था के अधीन लाने की कोशिश कर रही है.

गुप्त मदरसे

Image caption पाकिस्तानी मदरसों का संगठन भी सरकार की मुहिम में साथ देने की बात कर रहा है

तीसरे और सरकार के लिए सबसे ज़्यादा परेशानी का कारण गुप्त मदरसे हैं. इनकी संख्या और वहां होने वाली गतिविधियों के बारे में सरकार के पास किसी प्रकार की सूचना नहीं है और यही मदरसे सरकार के लिए मूल सिरदर्द बने हुए हैं.

देश में पंजीकृत मदरसों का संगठन भी अब ऐसे मदरसों से संबंध ख़त्म करने की घोषणा करता दिखाई दे रहा है.

संगठन आलिमदारिस महासंघ प्रमुख पाठक हनीफ़ जालंधरी ने बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ऐसे मदरसों के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं है जो चरमपंथ या चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हैं.

उनका कहना था कि "हम तो ऐसे लोगों और संस्थाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई में सरकार के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं. लेकिन सरकार को पहले ऐसे मदरसों की पहचान करनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि सरकार इस समय तो बहुत अस्पष्ट बातें कर रही है कि दस प्रतिशत मदरसे चरमपंथ में शामिल हैं.

हनीफ़ जालंधरी ने मांग की कि सरकार ऐसे मदरसों की पहचान करे, सूची बनाए और फिर उन्हें बाक़ी मदरसों से अलग कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करे तो कोई भी संगठन या मदरसा इस कार्रवाई का विरोध नहीं करेगा.

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