अमेज़नः पर्यटन से आदिवासियों को ख़तरा !

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ब्राज़ील के सरंक्षित क्षेत्र में रहने वाली जनजातियां बेहतर जीवन के लिए पर्यटन के क्षेत्र में उतर गई हैं और अपनी विशिष्ट जीवनशैली का प्रदर्शन कर जीवनयापन कर रही हैं.

लेकिन इसके साथ ही चिंताएं बढ़ गई हैं कि क्या इनका संरक्षण और जीवन स्तर बेहतर एक साथ हो सकता है?

कुछ विश्लेषकों को इनके शोषण की भी आशंका है.

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ब्राज़ील के वृहद अमेज़न क्षेत्र की राजधानी मनौस के पास रियो नेग्रो नदी के ऊपर की तरफ़ 24 किलोमीटर की दूरी पर दुपे रिज़र्व में आदिवासी डसाना कबीले के 40 सदस्य रहते हैं.

इनका मूल निवास तो यहां से 600 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी ब्राज़ील के दूरस्थ इलाके में था लेकिन बेहतर ज़िंदगी की तलाश में कबीले के नौ सदस्य यहां आ गए थे.

फिर वह पर्यटन के क्षेत्र में आ गए और अपनी संस्कृति का व्यावसायीकरण कर दिया.

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि डसाना और ऐसे ही अन्य कबीलों के पर्यटन में शामिल होने से इनके शोषण का ख़तरा है.

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टुपे गांव के निवासी पर्यटकों के लिए अपना पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं और संगीत सुनाते हैं. इसके अलावा वह अपने बनाए ज़ेवर भी पर्यटकों को बेचते हैं.

इन क़बायली गांवों में ज़्यादातर पर्यटक मनौस कस्बे से एक विस्तृत बोट टूर के तहत आते हैं.

इन टूरों में काली रियो नीग्रो नदी भूरी रियो सोलिमोस के संगम के बाद अमेज़न नदी बनने की जगह और अमेज़न के ताज़ा पानी में डॉल्फ़िन के साथ तैरना भी शामिल होता है.

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ज़्यादातर पर्यटक पूरे पैकेज के लिए एक तय राशि 55 पौंड (5151 रुपये से ज़्यादा) देते हैं. आदिवासियों और उनकी मदद करने को इच्छुक अधिकारियों के सामने दिक्कत यह है कि उद्योग में इस तरह का कोई अनुबंध नहीं है कि गांववावों को इसका कितना हिस्सा दिया जाए.

कुल 196 पर्यटन एजेंसियों में से कुछ तो इन्हें बिल्कुल भी भुगतान नहीं करती हैं. इसके बजाय वह इन पर दबाव डाल रहे हैं कि वह अपने बनाए आभूषण बेचकर गुज़ारा करें या फिर अनुदान मांगें.

ब्राज़ीलियाई सरकार की संस्था, द नेशनल इंडियन फ़ाउंडेशन, जिसका लक्ष्य मूल निवासियों की रक्षा करना और उनकी ज़रूरतें पूरा करना है, यह विचार कर रही है कि क्या ऐसे नियमों को ताकत के साथ लागू किया जाए.

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