'अमरीका में नहीं है सुरक्षा का ऐसा तामझाम'

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा पहली बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मेहमान बनने के लिए भारत आए हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. बताया जा रहा है उनके चारों ओर सात परत वाली सुरक्षा 'सेवन लेयर सिक्योरिटी' होगी.

पर क्या जब भारत से कोई नेता अमरीका जाता है उसके लिए भी ऐसे इंतज़ाम होते हैं?

यही जानने के लिए बीबीसी संवाददाता समीरात्मज मिश्र ने बात की अमरीका में भारत की महावाणिज्जय दूत रहीं नीलम देव से.

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बीबीसी: अमरीका में विदेशी नेताओं की सुरक्षा जांच के क्या नियम हैं?

नीलम देव: अमरीका विश्व का सबसे शक्तिशाली देश है. पूरी दुनिया से बड़े-बड़े नेता वहां जाते हैं. लेकिन जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता जाते हैं तो उनकी कोई जांच नहीं होती और उन्हें एक ख़ास रास्ते से ले जाया जाता है.

हमारे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और कैबिनेट मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा था लेकिन वे आधिकारिक यात्रा पर नहीं थे.

जब कोई मंत्री आधिकारिक यात्रा पर होता है, तो अमरीकी सुरक्षा अधिकारी बहुत सतर्क रहते हैं और पूरे प्रोटोकॉल का पालन करते हैं. लेकिन जब कोई बड़ा नेता अपनी निजी यात्रा पर वहां जाता है तो अमरीकी सुरक्षाकर्मी उनसे आम लोगों की तरह पेश आते हैं.

जब अमरीकी नेता भारत आते हैं तो यह भारत सरकार पर निर्भर करता है कि उनसे किस प्रकार व्यवहार करे. जब वे अपनी निजी यात्रा पर होते हैं तो उनसे दूसरे विदेशी नागरिकों की तरह पेश आया जा सकता है.

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बीबीसी: अमरीकी राष्ट्रपति के दौरे पर वहां की सुरक्षा एजेंसियां भारतीय अधिकारियों पर अपनी पसंद के हिसाब से सुरक्षा इंतज़ाम के लिए दबाव डालती हैं. जब भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री वहां जाते हैं तो यहां के अधिकारी भी ऐसा करते हैं?

नीलम देव: जब किसी देश के बड़े नेता कहीं जाते हैं, तो वहां पर पूरा बंदोबस्त करने के लिए एक सुरक्षा अधिकारी पहले जाता है, लेकिन आप दबाव उतना ही डाल सकते हैं, जितने आप शक्तिशाली हैं. अमरीका से तो सुरक्षा के इंतजाम के लिए सैकड़ों अधिकारी आते हैं.

बीबीसी: ऐसे अवसरों पर कैसी होती है अमरीका की सिक्योरिटी?

नीलम देव: दुनियाभर से बड़े-बड़े नेता अमरीका आते हैं. अमरीका में सिक्योरिटी दी जाती है, लेकिन वहां वह दिखाई नहीं देती. ओबामा की सुरक्षा में जैसे भारत में 50 हज़ार सुरक्षाकर्मियों का मुस्तैद किया गया है. यह सब अमरीका में नहीं होता. भारत में ऐसा लग रहा है जितने ज़्यादा सुरक्षाकर्मी होंगे उतनी सिक्योरिटी होगी, लेकिन अमरीका में सिक्योरिटी इंटेलीजेंस इनपुट और थ्रेट असेसमेंट पर आधारित होती है.

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