ग्रेस्टे को जेल में बंद साथियों की 'फ़िक्र'

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अल-जज़ीरा के पत्रकार पीटर ग्रेस्टे का कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद उन्हें राहत तो मिली है लेकिन उन्हें मिस्र की जेल में बंद अपने दो सहकर्मियों की 'बहुत चिंता' है.

रविवार को जेल से रिहा हुए ग्रेस्टे को उनके देश वापस भेज दिया गया है. उन्होंने 400 दिन जेल की सलाख़ों के पीछे गुज़ारे हैं.

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Image caption पीटर ग्रेस्टे, मोहम्मद फ़ामी और बाहेर मोहम्मद (फ़ाइल फ़ोटो)

ग्रेस्टे, मोहम्मद फ़ाहमी और बाहेर मोहम्मद को 2013 में ग़लत ख़बर फ़ैलाने और मुस्लिम ब्रदरहुड की सहायता करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

फ़ाहमी और बाहेर मोहम्मद अभी जेल में ही क़ैद हैं. पीटर ग्रेस्टे के परिवार वालों ने काहिरा की जेल से उनकी रिहाई पर खुशी जताई.

मिस्र के राष्ट्रपति भवन के सूत्रों से सूचना मिली है कि मिस्र और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखने वाले मोहम्मद फ़ाहमी को एक शर्त पर छोड़ा जा सकता है अगर वो मिस्र की नागरिकता त्याग दें.

लेकिन मिस्र की नागरिकता वाले बाहेर मोहम्मद की रिहाई चिंता का विषय बना हुआ है.

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