क्या हवाई सफ़र खतरनाक़ होता जा रहा है?

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ताइवान की राजधानी ताइपे में हुई एक हवाई दुर्घटना में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं.

पिछले साल एयर मलेशिया की उड़ान और एयर एशिया विमान के दो हादसों के बाद ये सवाल उभार रहा है कि हवाई सफ़र अधिक ख़तरनाक होता जा रहा है.

(पढ़ेंः ऊंचाई पर तेज रफ्तार से हुई दुर्घटना)

ट्रांस एशिया की उड़ान 'जीई235' उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही ताइवानी राजधानी ताइपे में एक पुल से टकराकर एक नदी में गिर गया.

तकलीफ़देह एहसास

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जब ये हादसा हो रहा था तो इसकी वीडियो दर्ज कर ली गई. पुल से गुज़र रही कम से कम दो गाड़ियों ने इसे रिकॉर्ड किया.

(पढ़ेंः समुद्र से निकला विमान का टुकड़ा)

लेकिन ये हादसा एक तकलीफ़देह एहसास के दोहराव की तरह हो गया है और लगने लगा है कि विमान हादसे नियमित अंतराल पर बढ़ रहे हैं.

दक्षिणी सागर में मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान 'एमएच-370' के लापता होने के बाद इसी कंपनी का दूसरा जेट विमान यूक्रेन में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

विमान हादसे

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माना जाता है कि यूक्रेन में विमान मार गिराया गया था और उसके बाद एयर एशिया का एक विमान जावा सागर में गिर गया था.

(पढ़ेंः एयर एशिया विमान का पिछला हिस्सा मिला)

तो क्या विमान उड़ाना अधिक ख़तरनाक़ होता जा रहा है? दुर्घटनाओं के लिहाज़ से देखें तो बीता बरस बहुत ख़राब रहा.

इन विमान हादसों में 986 लोग मारे गए. अकेले मलेशिया एयरलाइंस के दोनों विमान हादसों में 537 लोग मारे गए.

विमानन कंपनियां

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लेकिन एयरलाइनरेटिंग डॉटकॉम के मुताबिक़, दुनिया भर में उड़ान भरने वाली व्यावसायिक विमानन कंपनियों ने पिछले साल दो करोड़ 70 लाख उड़ाने भरीं और इनमें 3.3 अरब मुसाफ़िरों ने सफ़र किया.

रिपोर्ट कहती है कि पिछले साल 21 जानलेवा हादसे हुए और यह संख्या अपेक्षाकृत छोटी है.

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पचास साल पहले आज की तुलना में पांच फ़ीसदी ही उड़ानें भरी जाती थीं, लेकिन हादसे चार गुना ज़्यादा होते थे.

इसलिए बड़े विमान हादसों के बावजूद वायु सफ़र पहले की तुलना में कहीं सुरक्षित है.

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