भारत में जन्मे चीनी का पाक में रेस्त्रां

नौशेरा शहर में चीनी रेस्तरां ड्रैगन गार्डन इमेज कॉपीरइट Other

इस्लामाबाद से पेशावर का सफ़र सड़क के रास्ते मैंने कई बार तय किया है पर मुझे हैरत हुई कि मेरी नज़र नौशेरा शहर के पूर्वी छोर पर स्थित एक चीनी रेस्तरां 'ड्रैगन गार्डन' पर नहीं गई थी.

सर्दी के मौसम में शाम के धुंधलके के बीच इसके साइनबोर्ड की हल्की रोशनी रात के समय रास्ता बताती हुई लग रही थी. ये जगह, एक चीनी ढाबा किसी झोंपड़ी से कुछ ज़्यादा लग रहा था.

रेस्तरां के रिसेप्शन काउंटर पर चीनी शैली में हंसते हुए बुद्ध की एक सुनहरी मूर्ति रख हुई थी. इसके पीछे 20-30 वर्ष के रिचर्ड चेन मुस्कुराकर स्वागत करते हैं.

पढ़ें विस्तार से

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption आसपास के बहुत से लोग इस रेस्त्रां में आते हैं

चूंकि पेशावर घाटी के इलाक़े में जितने चीनी रेस्तरां थे, उनके मालिक अपना कारोबार स्थानीय लोगों को बेचकर सालों पहले इस्लामाबाद रवाना हो गए थे. इसलिए भी कौतूहल था.

मेरे सवालों के जवाब में रिचर्ड चेन ने मुझे अपने 75 वर्षीय पिता रॉबर्ट चेन से मिलवाया. मैंने उनसे पूछा कि आप यहां क्या कर रहे हैं और मैं हैरत में थी कि वह लगभग स्थानीय व्यक्ति की तरह लग रहे थे.

उन्होंने कहा, "मेरी पैदाइश कलकत्ता की है और ओडिशा में मेरी स्कूली पढ़ाई हुई थी. मेरे मां बाप पेशे से चमड़े का काम करते थे. पहले विश्व युद्ध के दौरान शायद वे लोग बेहतर ज़िंदगी की तलाश में कलकत्ता आ गए थे."

पश्तूनों की तारीफ़

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption नौशेरा शहर में चीनी रेस्तरां ड्रैगन गार्डन के मालिक रॉबर्ट चेन

लेकिन नौशेरा ही क्यों, यहां तक कि पेशावर भी विदेशी लोगों के लिए कोई बहुत अच्छी जगह नहीं रह गई है?

रॉबर्ट चहकते हुए कहते हैं, "लेकिन मैं एक पाकिस्तानी हूं और मेरा पूरा परिवार भी. हम यहीं के बाशिंदे हैं. यहां रहने वाले पश्तून लोग भी बहुत अच्छे इंसान हैं, अच्छे मेहमाननवाज़ और मिलनसार स्वभाव के हैं."

तालिबानी लड़ाके चीनी नागरिकों को निशाना बनाते रहे हैं और उत्तर पूर्वी चीन के शिनजियांग क्षेत्र में सक्रिय पारंपरिक वीगर क़बीले के मुस्लिम चरमपंथियों के इनसे सहयोग की बात कही जाती है.

पेशावर घाटी

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption तालिबान हमलों के चलते काफी समय से पाकिस्तान अशांति से जूझ रहा है

साल 2004 से ही पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी इलाक़े में कई चीनी नागरिकों को अग़वा किए जाने की घटना हो चुकी है.

पेशावर घाटी के इलाक़े में 2006 के बाद कम से कम चार चीनी लोगों को मारा जा चुका है. मरने वालों में एक महिला भी थीं. ये वही इलाक़ा है जहां नौशेरा पड़ता है.

हालांकि नौशेरा में किसी चीनी को निशाना नहीं बनाया गया है. लेकिन यहां के सैन्य ठिकानों पर हाल के वर्षों में चरमपंथियों ने आत्मघाती हमले किए हैं.

शादी का फ़ैसला

इमेज कॉपीरइट Other

मैंने उन्हें बहादुर कहा लेकिन वे ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानते हैं. वे नौवीं क्लास से आगे नहीं पढ़ पाए थे लेकिन उनका वक़्त "फ़ुटबॉल और हॉकी खेलने, टॉम जोन्स के रिकॉर्ड्स सुनने और हैरोल्ड रॉबिन्स के उपन्यास पढ़ने और रॉक हडसन की फ़िल्में देखने में गुज़र जाता है."

भारत से पाकिस्तान जाकर बसने के फ़ैसले पर वे कहते हैं, "मेरी एक बहन की शादी लाहौर के एक चीनी कारोबारी से हुई थी और मैंने उनके जूते के व्यवसाय से जुड़ने का फ़ैसला कर लिया." वे बाद में वहां से कराची चले गए और फिर कुछ समय बाद इस्लामाबाद.

50 साल की उम्र में उन्होंने शादी करने का फ़ैसला किया और दुल्हन स्निंग्ले को तलाशने के लिए चीन के ग्वांडोंग प्रांत में स्थित अपने पैतृक गांव चले गए.

'ड्रैगन गार्डन'

इमेज कॉपीरइट Other

ये जोड़ा पाकिस्तान लौटा और ठीक इसके बाद साल 1995 में नौशेरा में 'ड्रैगन गार्डन' नाम से एक चीनी रेस्तरां की शुरुआत की.

स्निंग्ले अब 50 की होने जा रही हैं और अभी भी शर्माती हैं. इस वजह से उन्होंने इंटरव्यू देने से मना कर दिया. लेकिन ड्रैगन गार्डन के खाने के पीछे उन्हीं का दिमाग़ चलता है.

यहां विशुद्ध चीनी व्यंजन थोड़े स्थानीय ज़ायक़े के साथ मिलता है.

इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption क़बायली इलाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए ख़ास तौर से चुनौती बन रहे हैं

ड्रैगन गार्डन के खाने ने कई लोगों को अपना दीवाना बना रखा है.

रॉबर्ट बताते हैं, "हमारे ज़्यादातर ग्राहक फ़ौजी अफ़सरों के परिवार हैं लेकिन स्थानीय लोग भी यहां आते हैं. वे अच्छा मज़ाक़ भी करते हैं, कोई आकर कहता है कि क्या आप चीनी हैं? और मैं पूछता हूं कि आपको क्या लगता है? कोई मेनु का मुआयना करता है या पूछता है कि क्या झींगा मछली हलाल है."

मेरा डिनर आ चुका था. ब्रेड के साथ झींगा मछली, भुने हुए मोमो, नॉन वेज चाउमिन, चिकन गार्लिक से भरी थाली.

खिड़की के बाहर अंधेरे में कुछ पुलिस वाले दिख रहे थे. इस जगह की 24 घंटे की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कुछ साल पहले ये इंतजाम किया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार