बॉडी लैंग्वेज दिला सकती है नौकरी

  • 9 फरवरी 2015
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सैम्युएल अमेगाविसा को घबराहट हो रही है. वह घाना की यूनिवर्सिटी ऑफ केप़ कोस्ट में ह्यूमन बायोलॉजी के अध्ययन के अंतिम वर्ष में हैं और अब समय आ गया है जब नौकरी के लिए इंटरव्यू के बारे में सोचना पड़ेगा.

हर कोई जानता है कि इंटरव्यू के लिए अच्छे से सजना-धजना चाहिए. लेकिन इंटरव्यू में आपका हाव-भाव आपको कहीं आगे ले जा सकता है और यह बात ख़ासी महत्वपूर्ण है.

बीबीसी कैपिटल को लिखे अपने एक ईमेल में 23 वर्षीय अमेगाविसा ने लिखा, “मैंने पहले कभी इंटरव्यू का सामना नहीं किया. इंटरव्यू के पहले और उसके दौरान कैसे बैठा जाए, क्या इस बारे में कोई सुझाव है?”

इंटरव्यू में आप अपने को कैसे ‘कैरी’ करते हैं, इस बारे में जानकारी न तो स्पष्ट है और न पर्याप्त. दरवाजे से अंदर दाखिल होते ही आप अपनी पर्सनैलिटी के बारे में क्या कुछ बिना कहे बता देते हैं और किस तरह से हाथ मिलाते हैं या बैठते हैं, आपकी इंटरव्यू को प्रभावित करेगा.

इंटरव्यू में बॉडी लैंग्वेज़ (हाव-भाव) के महत्व पर तीन विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए जिनसे जानकारी मिलती है कि क्या करें और क्या करने से बचें.

इंटरव्यू में क्या करें

पहला क़दम

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इंटरव्यू लेने वाले और इंटरव्यू देने वाले के बीच अमूमन पहला संपर्क हाथ मिलाने से होता है.

बॉडी लैंग्वेज़ विशेषज्ञ डेविड अलसेमा कहते हैं, “आपका पहला प्रभाव ही अक्सर इस बात का निर्णय करता है कि इंटरव्यू कैसा रहेगा. सब कुछ ठीक हो इसके लिए ज़रूरी है कि शुरुआत ठीक रहे."

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अलसेमा का सुझाव है, “समानता के कारण घनिष्ठता बढ़ती है. इसलिए हाथ उसी तरह मिलाइए जिस तरह से इंटरव्यू लेने वाला आपसे मिलाता है. जब आप किसी अभिवादन का जवाब उतनी ही ताक़त से देते हैं तो आप बराबरी का संदेश देते हैं. ज़्यादा ज़ोर से हाथ मिलाना इंटरव्यू में हावी होने का संकेत दे सकता है.”

अंतरंगता

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हम चाहे किसी भी संस्कृति में पले-बढ़ें हों, लेकिन हम अपने आसपास की कम से कम चार परिस्थितियों से अवगत होते हैं.

ये हैं: सार्वजनिक, सामाजिक, निजी और अंतरंग. बोस्टन में रहने वाले स्पीच कोच और पावर क्यूज़ के लेखक निक मॉर्गन कहते हैं, "दो लोगों के बीच जो भी महत्वपूर्ण घटित होता है वह निजी और अंतरंग स्पेस में होता है. चूंकि इंटरव्यू के दौरान अंतरंग स्पेस तक पहुंच से बाहर होती है, इसलिए इंटरव्यू लेने वाले को अपने पक्ष में करने के लिए उसके निजी स्पेस तक पहुंच बनाना ज़रूरी है."

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आगे क़दम बढ़ाइए

हाथ मिलाना हम लोगों को उस निजी स्पेस तक ले जाता है, जहाँ हम पहुँचना चाहते हैं.

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मॉर्गन कहते हैं, "इंटरव्यू में बैठने की जगह को इस तरह से व्यवस्थित किया जाता है कि इंटरव्यू लेने वालों के लिए हम तक पहुंचना तो आसान होता है, पर हमारे लिए उन पर अपना प्रभाव छोडना मुश्किल होता है."

उदाहरण के लिए, आप अपनी कुर्सी को थोड़ा खिसका सकते हैं या फिर गोल टेबल के एक ही साइड में बैठ सकते हैं.

एक बार जब आप बैठ जाते हैं, तो दूरी खत्म करने के अन्य रास्तों की तलाश कीजिए. उदाहरण के लिए आगे की ओर झुक जाइए, पर बहुत ज्यादा नहीं.

मॉर्गन कहते हैं, "इसे बहुत ही चतुराई और सफ़ाई के साथ कीजिए और जल्दबाज़ी या बेतरतीब तरीके से नहीं. ये प्रयास बेकार नहीं जाएंगे."

मॉर्गन कहते हैं, "जब हम अपने बीच की दूरी कम करते हैं तो थोड़ी मात्रा में ही सही हम, लोगों के साथ अपना विश्वास और जुड़ाव बढ़ाते हैं."

संवाद के लिए तैयार रहें

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मॉर्गन कहते हैं, "यह बहुत आवश्यक है कि आप अपने बॉडी लैंग्वेज को ‘ओपन’ रखें. आप को थोड़ी घबराहट हो सकती है और हो सकता है कि आप अनायास ही अपने हाथों को ज़ोर से पकड़कर या बांहों को आपस में बांधकर बैठ जाएँ."

उन्होंने कहा, "इससे आप तो सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, पर यह आपको वहां बैठे अन्य लोगों से दूर करता है या आप उनसे कटे हुए दिख सकते हैं."

अलसेमा कहते हैं, "इसके अलावा, अपनी बांहों को बांधकर रखना ये दिखाता है कि जो चल रहा है, आपको उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है और यह आगे झुकने में भी आड़े आता है."

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सारा खेल आंखों का

अलसेमा कहते हैं, “जवाब देते समय इंटरव्यू लेने वाले की आंख में देखना महत्वपूर्ण है. लेकिन ऐसा ज़रूरत से थोड़ा भी कम या थोड़ा भी ज़्यादा करना किसी अन्य तरह के व्यवहार का संकेत देता है.”

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तो फिर एकदम ठीक क्या है? अलेसमा कहते हैं कि आप इस बात का अंदाज़ा इससे लगाएँ कि इंटरव्यू लेने वाला आपकी आंखों में कितना देखता है.

अगर इंटरव्यू लेने वालों का पैनल है तो हर व्यक्ति को उचित समय देना और सही समय तक उसकी आंखों में देखना जरूरी है.

वह कहते हैं, "हर व्यक्ति को उसकी आंखों में देखकर व्यक्तिगत रूप से जवाब दीजिए. अगर आप दांए-बांए देखते हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि आप बोर हो गए हैं. इसलिए अगर संभव है तो ऐसा मत कीजिए.”

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जॉर्जिया स्थित बॉडी लैंग्वेज़ विशेषज्ञ और लेखक पैट्टी वुड कहती हैं कि कुछ लोग अच्छी तरह आंखों में देखने का मतलब यह लगाते हैं कि नज़रें हटाना ही नहीं है, लेकिन यह भी गलत है.

उन्होंने एक ईमेल में कहा, "बोलते हुए बीच-बीच में नज़र हटा लेना सामान्य बात है, क्योंकि ऐसा करते हुए आप अपनी याददाश्त पर ज़ोर डालकर अपने दिमाग़ में मौजूद सूचनाओं तक पहुँचने का प्रयास कर रहे होते हैं. पर जब इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति बोल रहा हो, उस समय अपनी नज़र को भटकने मत दीजिए."

वुड कहती हैं, "उत्तर देने के बाद इंटरव्यू लेने वाले की आंखों में देखने और उसकी बात को सुनना मत भूलिए. आंखों में देखने का मतलब यह होता है कि आप गंभीर हैं और दिलचस्पी ले रहे हैं."

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गहरी सांस लेना न भूलें

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इंटरव्यू के दौरान घबराहट होने पर कुछ व्यक्ति ज़ोर-ज़ोर से छोटे-छोटे सांस भरना शुरू कर देते हैं. यह स्थिति सब गुड़ गोबर कर सकती है.

वुड कहती हैं, "जब आप जल्दी-जल्दी से छोटी-छोटी सांसें लेते हैं, तो आप स्पष्ट रूप से सोचने की क्षमता खो देते हैं. इससे आपको सवालों का त्वरित और बेहतर जवाब देने में मुश्किल पेश आएगी."

उन्होंने कहा, "इसके बदले में आप लंबे सांस भरें जो पेट के निचले हिस्से से हो. स्पष्ट रूप से सोचने में यह आपकी मदद करेगा, आपको स्फूर्ति देगा और आत्मविश्वास पैदा करेगा."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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