बेलआउट नहीं, लोन चाहिए: ग्रीक पीएम

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कर्ज़ में डूबे ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस त्सीप्रास ने कहा है कि उनके देश को संकट से उबरने के लिए दिए गए आर्थिक सहायता पैकेज यानी बेलआऊट के विस्तार की बजाय एक निश्चित अवधि का ऋण दिया जाए.

संसद में दिए अपने भाषण में त्सीप्रास ने कहा कि बेलआउट पैकेज की योजना नाकाम हो चुकी है.

त्सीप्रास का कहना है कि सरकार अफ़सरशाही से जुड़े ख़र्चों में कमी करेगी, लेकिन जनता से चुनाव में उनकी पार्टी ने जो वादे किए, उन्हें पूरा किया जाएगा.

बीते महीने हुए चुनावों के दौरान त्सीप्रास की सिरीजा पार्टी ने वादा किया था कि बेलआउट पैकेज की कड़ी शर्तों के चलते आम लोगों को जिन आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, उन्हें दूर किया जाएगा.

नौकरियां होगी बहाल

त्सीप्रास ने साफ़ किया कि उन्हें बेलआउट पैकेज का विस्तार नहीं बल्कि जून तक लिए कर्ज़ चाहिए ताकि कर्ज की शर्तों पर नए सिरे से बात करने के लिए वक्त मिल जाए.

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Image caption बेलआउट पैकेज की शर्तें ग्रीस में एक बड़ा मुद्दा है

दरअसल ग्रीस को दिए गए बेल आउट पैकेज के साथ वित्तीय अनुशासन संबंधी कई कड़ी शर्तें जुड़ी हैं.

इनके तहत सरकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च में कटौती की मार आम लोगों के वेतन, पेंशन और सेहत संबंधी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी पड़ी.

इसीलिए ग्रीस की नई सरकार बेल आउट पैकेज की शर्तों को नए सिरे तय करने की मांग कर रही है. लेकिन यूरोपीय संघ इसके लिए तैयार नहीं है.

त्सीप्रास ने कहा है कि उनकी सरकार न्यूनतम वेतन को बढाएगी और बचत कदमों के तहत पिछली सरकार के दौरान हटाए गए हज़ारों सरकारी कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर रखा जाएगा.

'नहीं बदलेगा रुख़'

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Image caption ग्रीस संकट की छाया यूरो मुद्रा पर भी पड़ रही है

संघ का अहम साझीदार देश जर्मनी साफ़ कर चुका है कि ग्रीक प्रधानमंत्री ने भले ही चुनाव में जनता से जो वादे किए हों लेकिन मौजूदा हालात को लेकर यूरोपीय संघ का रुख नहीं बदलेगा.

जर्मन वित्त मंत्री वोल्फगांग शोएब्ले ने बीते दिनों कहा था, “मैंने ग्रीक वित्त मंत्री वेरोफाकिस से बातचीत में साफ़ कर दिया है कि बेशक हम ग्रीक मतदाताओं की इच्छा का सम्मान करते हैं. लेकिन हमें अन्य यूरोपीय देशों के मतदाताओं की इच्छा का भी सम्मान करना होगा.”

यूरोपीय संघ कह चुका है कि ग्रीस को जितनी रियायत संभव थी, दी जा चुकी है. जबकि ग्रीस कर्ज को पूरी तरह वापस चुकाने में असमर्थता जताता है.

इसीलिए यूरोपीय संघ और ग्रीस के बीच टकराव को टालने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं.

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