यूक्रेन संकट ख़त्म करने का आख़िरी मौका!

  • 8 फरवरी 2015
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यूक्रेन संकट ख़त्म करने के लिए राजनयिक मोर्चे पर रूस, फ्रांस और यूक्रेन के राष्ट्रपति और जर्मनी के चांसलर के बीच टेलीफ़ोन पर अहम बातचीत होगी.

रविवार को होने वाली इस बातचीत का आधार यूरोपीय संघ की एक नई शांति योजना है जिसको तहत दो दिन पहले ही मॉस्को में फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से बात की थी.

हालांकि पूर्वी यूक्रेनमें जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन और रूस दोनों ही अपने-अपने रुख़ पर अड़े हुए दिख रहे हैं.

फ्रांस, रूस, जर्मनी और यूक्रेन के नेताओं के बीच जिस प्रस्ताव पर बातचीत होनी है, उसे ओलांद ने यूक्रेन संकट को ख़त्म करने के आख़िरी मौकों में से एक बताया है.

भावुक अपील

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माना जा रहा है इस प्रस्ताव में पिछले साल बेलारूस की राजधानी मिंस्क में हुए समझौते को फिर से लागू करने पर ज़ोर दिया गया है.

हालांकि पूर्वी यूक्रेन में जारी संघर्ष और रूस और यूक्रेन के बीच तीखे बयान के बीच इस सहमति की राह आसान नहीं दिख रही है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको ने एक भावुक अपील करते हुए रूस समर्थक विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में समर्थन मांगा है.

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म्यूनिख में विश्व नेताओं के सामने उन्होंने कुछ पासपोर्ट दिखाए और कहा कि ये पकड़े गए रूसी सैनिकों के पासपोर्ट हैं. उन्होंने कहा कि रूसी आक्रमण से निपटने के लिए उन्हें दुनिया के समर्थन की ज़रूरत है.

और कितने सबूत?

पोरोशेंको कहते हैं, ''वहां विदेशी सैन्य साजो-सामान, भाड़े के लड़ाके, रूसी सैन्य कोच, टैंक और सेना के जवान भेजे जा रहे हैं. इस बात को साबित करने के लिए और कितने सबूत चाहिए. मेरे पास उन रूसी सैनिकों, सैन्य अफ़सरों के भी पासपोर्ट हैं जो हमारे पास आए और इन्हें छोड़ गए.''

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उन्होंने कहा कि 'इन सबसे साफ़ ज़ाहिर है कि पूर्वी यूक्रेन में जारी संघर्ष में रूस विद्रोहियों की मदद कर रहा है. यूक्रेन के संकट में पिछले साल अप्रैल से अब तक 5400 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है जबकि लुहांस्क और दोनेत्स्क का एक बड़ा हिस्सा विद्रोहियों के क़ब्ज़े में है. क्राइमिया पहले ही रूस का हिस्सा बन चुका है.'

रूस का हित

दूसरी तरफ पुतिन का कहना है कि उनका देश किसी पर युद्ध नहीं थोपेगा लेकिन उसे ऐसी व्यवस्था भी मंजूर नहीं जिसमें सब एक नेता के कहे अनुसार चलें.

सोची में एक ट्रेड यूनियन सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट के कारण रूस के ख़िलाफ़ जो प्रतिबंध लगाए गए हैं, वो निष्प्रभावी साबित होंगे.

पुतिन ने कहा, "सच तो ये है कि हमारे विकास को विभिन्न तरीकों से दबाने की कोशिश हो रही है. सोवियत संघ के विघटन के बाद दशकों में बनी विश्व व्यवस्था की जगह ऐसी व्यवस्था लाने की कोशिश हो रही है जिसमें सिर्फ़ एक ही नेता हो. और वही नेता बना रहे और जिसे सब कुछ करने का अधिकार है. बाक़ी सब उसके अनुसार काम करें.

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उन्होंने कहा, "ऐसी व्यवस्था कभी रूस के हित में नहीं होगी. अगर किसी को ये पसंद है और वो आंशिक कब्जे वाली परिस्थितियों में रहना चाहता है तो रहे. हम ऐसा नहीं करेंगे."

उधर शनिवार को यूक्रेन की सेना ने बताया कि 24 घंटों के दौरान संघर्ष में पांच सैनिक मारे गए जबकि 26 घायल हो गए हैं. साथ ही, सात आम लोगों के मारे जाने की भी ख़बरें हैं.

यूक्रेन का यह भी कहना है कि विद्रोही रणनीतिक रूप से अहम देबालत्सेव और ग्रानीत्ने के आसपास गोला-बारूद जमा कर रहे हैं.

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