हर साल 80 लाख टन कचरा जाता है समंदर में

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एक ताज़ा शोध में पता चला है कि समंदर पर भी प्लास्टिक प्रदूषण का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

शोध के मुताबिक हर साल क़रीब अस्सी लाख टन कचरा समंदर को प्रदूषित कर रहा है.

अस्सी लाख टन कचरे को अगर ज़मीन पर फैला दिया जाए तो यह न्यूयॉर्क के मैनहट्टन द्वीप को घुटने की ऊंचाई तक पूरा ढंक देगा.

वैज्ञानिकों ने ये जानने की कोशिश की है कि समंदर में कितना कचरा डाला जा रहा है.

इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि हवा में उड़ कर या फिर पानी में बहते हुए कचरे की कितनी मात्रा समंदर में पहुंच रही है.

ताज़ा शोध के नतीज़े अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ साइंस (एएएएस) की सालाना बैठक में जारी की गई.

अनदेखा प्रदूषण

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जियॉर्जिया विश्वविद्यालय से जुड़ी रहीं और रिसर्च टीम की मुखिया जेना जैमबेक कहती हैं, "दुनिया भर में समंदर किनारे जाने वाला हर जीव प्लास्टिक के पांच बड़े थैले भर कर कचरा डाल रहा है."

शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे हैरान करने वाली बात ये सामने आई है कि यह समंदर में प्लास्टिक की मौजूदगी बढ़ा रहा है और यह वो कचरा नहीं है जो हमें समंदर की सतह पर बहता हुआ या फिर बीच पर बैठे हुए दिखाई है.

यह अब बिल्कुल साफ़ है कि बड़ी मात्रा में कचरा सागर की तलहटी में छिपा है या फिर इस तरह से छोटे छोटे टुकड़ों में बंटा है कि साधारण सर्वे के दौरान दिखाई नहीं देता.

ये छोटे टुकड़े समुद्री जीव पचा रहे हैं और उसका क्या असर होगा इस बारे में कुछ पता नहीं.

इसके मुताबिक़, समंदर में जाने वाले कचरे का 83 फ़ीसदी हिस्सा शीर्ष के 20 देशों का है.

उपाय

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इन देशों में भी चीन सबसे ऊपर है जो हर साल अकेले ही 10 लाख टन से ज़्यादा कचरा समंदर में डाल रहा है.

अमरीका इसमें 20वें नंबर पर है जबकि यूरोपीय संघ 18वें नंबर पर.

वैज्ञानिकों ने इससे बचने के लिए जो उपाय सुझाए हैं उनमें एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की चीजों के उपयोग में कमी और कूड़े के निपटारे के लिए सुझाए उपाय प्रमुख हैं.

वैज्ञानिकों ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर इसे रोका नहीं गया तो साल 2025 तक हर साल 1.75 करोड़ टन तक कचरा समंदर में जाने लगेगा.

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