भारत के मीडिया ने किया उसी को 'बेनक़ाब'

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पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में भारतीय कोस्ट गार्ड के डीआईजी बीके लोशाली के उस विवादित वीडियो की खूब चर्चा हो रही है कि जिसमें उन्होंने कहा है कि 31 दिसंबर को एक संदेहास्पद नौका को भारतीय कोस्ट गॉर्ड ने ही उड़ाया था.

नवा-ए-वक़्त लिखता है कि भारतीय मीडिया ने ख़ुद भारत का चेहरा और उसका झूठ उजागर कर दिया है.

अख़बार लिखता है कि भारत जिस तरह झूठा दुष्टप्रचार कर पाकिस्तान को बदनाम करता है, पाकिस्तानी तो सच्चाई के साथ उसका तोड़ भी नहीं निकाल पाते हैं, लेकिन 'इंडियन एक्सप्रेस' ने इसे बेकनाब कर दिया है.

अख़बार लिखता है कि भारत ने न सिर्फ नौका पर सवार चार बेगुनाह लोगों की जान ली बल्कि इस घटना को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की कोशिश भी की, लेकिन अब सच सबके सामने आ गया है.

'ध्यान दे विश्व समुदाय'

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Image caption भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि मामले की पूरी जांच होगी

वहीं रोज़नामा एक्सप्रेस ने इस सिलसिले में पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा मोहम्मद आसिफ़ के इस बयान को प्रमुखता दी है कि भारत का भांडा फूट गया है और उसका घिनौना चेहरा सबके सामने आ गया है.

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने एक कश्ती को आग लगाकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया और विश्व समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए.

वहीं जंग ने इस विषय पर लिखे अपने संपादकीय में दोनों देशों के बीच अमन कायम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.

अख़बार के मुताबिक़ क्या फ्रांस और जर्मनी की तरह भारत और पाकिस्तान आपसी विकास के लिए शांति और सौहार्द्र की अहमियत को समझते हुए 'एलीज़े समझौते' जैसा कोई समझौता करके यूरोपीय संघ की तर्ज पर दक्षिण एशिया की एकता और खुशहाली की बुनियाद नहीं डाल सकते?

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Image caption यूरोपीय संघ में यूरोप के 28 देश शामिल हैं

मोदी का 'नाटक'

इसराइली रक्षा मंत्री के भारत दौरे पर औसाफ़ लिखता है कि इस वक़्त इसराइली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार भारत है.

अख़बार के मुताबिक़़ इन हालात में पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य क्षमताएं मज़बूत करनी चाहिए ताकि भविष्य की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपट सके.

दैनिक दुनिया में भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक का एक लेख छपा है जिसमें वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुटकी लेते है.

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मोदी की क्रिकेट डिप्लोमेसी वो लिखते हैं, "अपने देश के महान राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इन दिनों ग़ुलामियों की परवरिश और उन्हें बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी उठा ली है."

लेख के मुताबिक़ मोदी को अंग्रेजी नहीं आती फिर उन्होंने टेलीप्रॉम्पटर की मदद से अंग्रेजी बोलने का नाटक किया और ऑस्ट्रेलियाई संसद को मदहोश कर दिया, अब अगर वो प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की तरह क्रिकेट खेलने लगें तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए.

आप को क्लीन चिट

रुख भारत का करें तो कोस्ट गार्ड से जुड़े विवाद पर हिंदोस्तान एक्सप्रेस लिखता है कि ऐसे मामलों में सरकार की बात ही मानी जाती है क्योंकि उसी के पास ख़ुफ़िया जानकारियां होती हैं, लेकिन जब कार्रवाई को अंजाम देने वाले अफसर ही सरकार की बात को काटने लगें तो संकट तो पैदा होगा ही.

अख़बार के मुताबिक़ इस मामले में भ्रम को दूर नहीं किया गया, आगे भी दूसरी ऐसी कार्रवाइयों पर इसका साया पड़ सकता है.

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उधर, विदेशों से चंदा लेने के मामले में आम आदमी पार्टी को मिली क्लीन चिट पर राष्ट्रीय सहारा ने संपादकीय लिखा है.

अख़बार कहता है कि कांग्रेस और बीजेपी जैसे पार्टियां चंदे को लेकर अरविंद केजरीवाल पर तो निशाना साधती है लेकिन उनके अपने भीतर इस मुद्दे को लेकर ज़िम्मेदारी का अहसास नहीं दिखता.

अख़बार लिखता है कि चुनाव में इस मुद्दे को उछाले जाने के बाद आख़िरकार सरकार को अदालत के सामने मानना पड़ा कि आप को मिले चंदे में कोई गड़बड़ी नहीं है.

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