स्थाई सदस्य वीटो अधिकार छोड़ें: एमनेस्टी

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मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों को दुनिया भर में अत्याचारों के मामलों में वीटो अधिकार छोड़ देने की सलाह दी.

अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठन का कहना है कि साल 2014 में संघर्ष और विनाश की घटनाओं पर दुनिया भर के देशों की चुप्पी और ठंडी प्रतिक्रिया 'शर्मनाक' है.

संस्था ने हिंसा और संघर्ष के कारण शरणार्थी बने लोगों को पनाह नहीं देने के लिए संपन्न देशों की आलोचना की है.

एमनेस्टी महासचिव सलिल शेट्टी ने एक बयान में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् नागरिकों की सुरक्षा में 'बुरी तरह नाकाम' रहा.

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शेट्टी ने कहा, "संघर्ष से जूझ रहे नागरिकों के हित के लिए काम करने की बजाय सुरक्षा परिषद के सदस्यों ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमरीका ने वीटो का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ और भौगोलिक राजनीति को बढ़ावा देने के लिए किया."

एमनेस्टी का कहना है कि बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा और नरसंहार के मुद्दे पर पांचों देश सुरक्षा परिषद् के वीटो के अधिकार को त्याग दें.

पलायन

एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार 2014 शरणार्थियों के लिए सबसे बुरा साल रहा.

सीरिया में युद्ध के कारण 40 लाख लोगों को विस्थापन का शिकार होना पड़ा. यहां से पलायन करने वाले सैंकड़ों लोग भूमध्य सागर में डूब कर मर गए.

वहीं उत्तरी अफ्रीका में नाइजीरियाई इस्लामिक संगठन बोको हराम और चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के लड़ाके साल 2014 में हुई तबाही और संघर्ष के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार रहे.

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पिछले साल सैंकड़ों की संख्या में यजीदी शरणार्थी इराक में इस्लामिक राज्य से पलायन को मजबूर हुए.

साल 2014 को संघर्ष और हिंसा का साल बताते हुए एमनेस्टी ने जोर दिया है कि सशस्त्र संघर्ष के माहौल को बदलने के लिए दुनिया भर के नेताओं को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है.

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