ग़रीब देश का अमीर पूर्व राष्ट्रपति सालेह

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संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के मुताबिक़ यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने सत्ता में रहने और उसके बाद 30 से 62 अरब डॉलर क़ीमत की संपत्ति जुटाई है.

उन्होंने अपनी अधिकांश संपत्ति दूसरे नामों पर स्थांतरित कर दी है.

मध्य पूर्व के देशों में यमन को काफ़ी ग़रीब देश माना जाता है. वहां चल रहे राजनीतिक संकट के पीछे कई लोग सालेह का हाथ मानते हैं.

सालेह भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

अरब में बग़ावत

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सालेह ने 33 साल तक यमन पर शासन किया. 2011 में अरब में शुरू हुई बग़ावत के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ सालेह की संपत्ति में जायदाद, नक़द, शेयर, सोना और दूसरी बेशक़ीमती चीज़ें शामिल हैं, जो दुनिया के 20 देशों में फैली है.

रिपोर्ट में कहा गया, ''यह संपत्ति सालेह ने राष्ट्रपति कार्यकाल में भ्रष्ट कार्यप्रणाली, ख़ासकर गैस-तेल के ठेकों के ज़रिए जुटाई.''

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों के ज़रिए तीन दशक तक उन्होंने हर साल क़रीब दो अरब डॉलर जुटाए.

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इसमें कहा गया,''कई लोगों का कहना है कि इन संपत्तियों को वापस यमन लाने से देश का बढ़ता घाटा और आर्थिक समस्याएं कम होंगी.''

हालात

रिपोर्ट यमन पर लगे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों के पैनल ने तैयार की है.

इस साल जनवरी में राष्ट्रपति अब्दराब्बुह मंसूर हादी के इस्तीफ़े के बाद से यमन में हालात तेज़ी से बिगड़े हैं.

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों का कहना है कि हादी के तख़्तापलट में हूती विद्रोहियो के साथ-साथ सालेह और सेना के एक बड़े हिस्से की सांठगांठ थी.

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