आपको 'क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम' तो नहीं?

  • 9 मार्च 2015
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वैज्ञानिकों का कहना है कि थकान के बावजूद लगातार काम करते रहने वाले व्यक्तियों के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव देखने को मिले हैं.

वैज्ञानिक भाषा में इसे क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम (सीएफ़एस) या मियालजिक एंसेफेलोपेथी (एमई) कहा जाता है.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक़ इससे शरीर में साइटोकाइनेस नामक इम्यून मॉलिक्यूल बढ़ जाते हैं.

बड़ी बीमारी संभव

'साइंस एडवांसेज़' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि जो लोग तीन साल से अधिक सीएफ़एस से ग्रस्त रहते हैं उनमें बाद में कोई बड़ी बीमारी हो सकती है.

सीएफ़एस यानी ज़बरदस्त थकान, जो सोने या शरीर को आराम देने के बावजूद भी नहीं जा पाती.

ऐसे लोगों में मासपेशियों में दर्द, वायरल इंफेक्शंस और ध्यान संबंधी समस्याएं होने की भी संभावना अधिक होती है.

एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में करीब ढाई लाख़ लोग एमई से ग्रस्त हैं.

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