दिल्ली गैंगरेप: 'चुपचाप रेप सह लेना चाहिए था'

  • 3 मार्च 2015
16 दिसंबर को हुए बलात्कार के बाद जन क्रांति इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption (फ़ाइल फ़ोटो)

दिल्ली गैंगरेप के एक दोषी मुकेश सिंह का कहना है कि यदि बलात्कार के दौरान 'लड़की ने पूरी ताकत से इसका विरोध न किया होता और चुप रहती तो उसके साथ हिंसा न होती.'

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की मेडिकल स्टूडेंट के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामले में बस ड्राइवर मुकेश सिंह को फांसी की सज़ा सुनाई गई है, हालाँकि इस मामले में उसकी अपील अदालत में है.

मुकेश सिंह ने बीबीसी 4 के लिए लेसली उड्विन से एक्सलूसिव बातचीत करते हुए कहा कि बलात्कार के लिए पुरुषों से ज़्यादा महिलाएं ज़िम्मेदार हैं.

मुकेश से बातचीत और उसके वकीलों की राय बीबीसी 4 पर आठ मार्च को दिखाई जाने वाली एक डॉक्यूमेंट्री - 'इंडियाज़ डॉटर' यानि 'भारत की बेटी' का हिस्सा हैं जो ब्रितानी फ़िल्मकार लेज़्ली उडविन ने तैयार की है.

क्या-क्या कहा मुकेश सिंह ने

दिसंबर 2012 की उस रात 'निर्भया' अपने एक पुरुष दोस्त के साथ घर लौट रही थीं जब वे एक बस पर सवार हुईं.

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Image caption निर्भया का शव ले जाती एंबुलेंस(फ़ाइल फ़ोटो)

बस में निर्भया से छेड़छाड़ का विरोध होने पर उनके दोस्त को बेरहमी के साथ पीटा गया और बस के पिछले हिस्से में निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ.

इस घटना पर मुकेश सिंह का कहना है - ''शालीन महिलाओं को रात में नौ बजे घर से बाहर नहीं घूमना चाहिए. बलात्कार के लिए लड़की लड़के से ज़्यादा जिम्मेदार होती है. लड़का और लड़की बराबर नहीं हैं. लड़की को घर का काम करना चाहिए, न कि रात को डिस्को या बार में जाकर गलत काम करने और ख़राब कपड़े पहनने चाहिए."

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Image caption दिल्ली में महिलाओं के हक़ के लिए छिड़ गई थी बहस(फ़ाइल फ़ोटो)

'निर्भया' के साथ हुई हिंसा पर मुकेश ने कहा - "बलात्कार के वक़्त उसे (निर्भया को) विरोध नहीं करना चाहिए. उसे चुपचाप बलात्कार होने देना चाहिए. अगर ऐसा होता तो हम उसे बिना कोई नुकसान पहुंचाए उसे छोड़ देते, और बस उसके दोस्त की पिटाई की जाती."

फांसी की सज़ा पर मुकेश का कहना था,''मौत की सज़ा से लड़कियों के लिए ख़तरा बढ़ जाएगा. अब अगर कोई रेप करेगा तो वह लड़की को (जीवित) नहीं छोड़ेगा, जैसा हमने किया. वो उसे जान से मार देगा. ''

'मैं पेट्रोल छिड़क दूँ'

डॉक्यूमेंट्री में अभियुक्तों के वकीलों का भी साक्षात्कार किया गया है.

इससे पहले प्रसारित टीवी इंटरव्यू में वकील एपी सिंह ने कहा, "अगर मेरी बेटी या बहन शादी से पहले किसी के साथ संबंध रखती है या ऐसा कोई काम करती है जिससे उसके चरित्र पर आंच आती है तो मैं उसे अपने फ़ार्महाउस ले जाकर पेट्रोल छिड़ककर पूरे परिवार के सामने जला दूंगा."

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Image caption निर्भया बलात्कार के बाद प्रदर्शन में रंगी दिल्ली (फ़ाइल फ़ोटो)

वकील एपी सिंह ने दोहराया कि वे अपनी बात पर कायम हैं.

दूसरे वकील एमएल शर्मा ने कहा - "हमारे समाज में हम लड़कियां को किसी अनजान व्यक्ति के साथ शाम 7:30 या 8:30 के बाद घर से बाहर नहीं निकलती हैं, और आप लड़के और लड़की की दोस्ती की बात करती हैं? सॉरी, हमारे समाज में ऐसा नहीं होता है. हमारी कल्चर बेस्ट है. हमारी कल्चर में महिला की कोई जगह नहीं है.''

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Image caption महिलाओं ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़(फ़ाइल फ़ोटो)

क्यूं सिर्फ़ लड़कियों ही दोषी

अपनी बेटी खोने वाली 'निर्भया' की मां कहती हैं, ''जब भी कोई अपराध होता है तो उसके लिए लड़की को ही ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. उसे बाहर नहीं जाना चाहिए था, घूमना नहीं चाहिए था, ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए थे. लड़कों से पूछना चाहिए कि उन्होंने ऐसा क्यूं किया. उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए.''

ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय की लेखक और इतिहासकार डॉक्टर मारिया मिश्रा कहती हैं, ''उसकी (निर्भया की) मौत से समाज में बहुत फ़र्क आया है. इससे ऐसे मुद्दों को आवाज़ मिली कि भारतीय समाज में एक जवान और आत्म निर्भर लड़की को कैसा देखा जाता है. घटना के बाद से भारत में एक बहस छिड़ गई.''

डॉक्यूमेंट्री की निर्देशक और निर्माता लेज़्ली उडविन ने बताया कि आख़िर क्यों उन्होंने इस घटना को चुना.

उन्होंने कहा, ''दिसंबर 2012 में जब टीवी पर ये ख़बर दिखाई गई तो मैं स्तब्ध रह गई....मुझे नहीं याद पड़ता कि किसी और देश में महिलाओं के अधिकारों के लिए इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी गई हो."

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