रूसी नेता के संदिग्ध हत्यारे गिरफ़्तार

  • 7 मार्च 2015
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रूस के विपक्षी नेता बोरिस नेम्तसोव की हत्या के मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है. रूस की फ़ैडरल सिक्योरिटी सर्विस ने इसकी सूचना दी है.

एफ़एसबी के डायरेक्टर एलेक्ज़ेंडर बोर्तनिकोव के मुताबिक़ शनिवार को पकड़े गए दोनों लोग अनज़ॉर गुबाशेव और ज़ऊर दादायेव कॉकेशस इलाक़े के हैं.

रूसी जांच अधिकारियों ने कहा है कि उन पर इस हत्या की साज़िश रचने और उसे अंजाम देने का संदेह है.

क्रैमलिन के सामने एक पुल पर नेम्तसोव की हत्या ने रूस को चौंका दिया है.

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पूर्व उप प्रधानमंत्री और उदारवादी नेता नेम्तसोव को 27 फ़रवरी की रात चार बार पीछे से गोली मारी गई थी. वह उस वक़्त अपनी महिला मित्र के साथ सड़क पर टहल रहे थे. उन्हें मंगलवार को मॉस्को में दफ़ना दिया गया.

बीबीसी संवाददाता सारा रेंसफ़ोर्ड ने मॉस्को से बताया कि हत्या के संदिग्धों की गिरफ़्तारी का ऐलान सरकारी टेलीविज़न पर एफ़एसबी के डायरेक्टर ने ख़ुद किया. संवाददाता का कहना है कि रूसी प्रशासन शायद ये संकेत देना चाहता है कि क्रैमलिन इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है.

कार मिली

बोर्तनिकोव ने रूस के सरकारी चैनल वन पर अपने छोटे से संदेश में इसका विवरण नहीं दिया कि संदिग्धों को कहां और कैसे पकड़ा गया. पर उनका कहना था कि इस मामले की तहक़ीकात जारी है.

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अभी दोनों में से किसी को औपचारिक तौर पर गिरफ़़तार नहीं किया है.

जांच से जुड़े एक सूत्र ने रूस की इंटरफ़ैक्स समाचार सेवा को बताया कि संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल की गई एक कार को बरामद किया गया है. इसके साथ ही कार में मिली चीज़ों की जांच हो रही है.

सूत्र ने बताया कि सिक्योरिटी कैमरों की फ़ुटेज में संदिग्धों की ‘काफ़ी साफ़’ तस्वीरें मिली हैं.

कारण

राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने जनता के सामने इस हत्या की कड़ी निंदा की थी और कहा था कि रूस में ‘शर्मनाक’ राजनीतिक हत्याएं बंद होनी चाहिए.

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मगर प्रमुख विपक्षी नेता एलेक्सेई नवाल्नी ने कहा था कि इस हत्या के पीछे क्रैमलिन का हाथ है ताकि आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे देश में विपक्ष को ख़ामोश किया जा सके.

रूसी जांचकर्ताओं ने नेम्तसोव की हत्या के पीछे कई कारण गिनाए थे जिनमें उनकी कारोबारी लेनदेन से लेकर पेरिस के शार्ली एब्डो पर हमले की निंदा तक शामिल थे.

जब नेम्तसोव की हत्या हुई उससे कुछ दिन बाद वह यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर मार्च आयोजित करने वाले थे. वह इस युद्ध में रूसी सेना की भागीदारी पर एक रिपोर्ट भी तैयार कर रहे थे.

उनकी हत्या के बाद एक मार्च को क्रैमलिन के पास हुई रैली में क़रीब 50 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया था.

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