लड़कों की टीम में खेलनी वाली लड़की

  • 9 मार्च 2015
होप केरेटा, क्रिकेट, ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में इन दिनों भारतीय-माओरी मूल की एक क्रिकेटर ने सनसनी मचा रखी है.

12 वर्षीय होप केरेटा ने क्रिकेट तो सिर्फ़ दो ही महीने खेला है लेकिन मेलबर्न शहर में ज़्यादातर क्रिकेटरों को उनके बारे में पता है.

होप का क्रिकेटर बनना भी महज़ इत्तेफ़ाक़ है. ये डैंडेनौंग पश्चिम में लड़कों की अंडर-13 टीम से खेल रही हैं.

इनके भाई इस टीम से खेलते थे और एक दिन जब डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता के पहले टीम के खिलाड़ी पूरे नहीं पड़े तब होप केरेटा पास ही खड़ी थीं.

हिचकिचाते हुए होप ने अपना हाथ उठाया और लड़कों की टीम की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. क्योंकि होप ने पहले ही मैच में मध्यक्रम की बल्लेबाज़ी को संभाल लिया और तेज़ गेंदबाजों को भी सफल नहीं होने दिया.

क्रिकेट का मज़ा

उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया, "शुरुआत में तो मुझे भी यकीन नहीं आ रहा था लेकिन अब मैं क्रिकेट का मज़ा लेने लगी हूँ. अब मेरा सपना यही है कि एक दिन ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम के लिए खेल सकूँ."

बहरहाल, इन दिनों होप केरेटा ने अपने इलाके के सभी बड़े गेंदबाजों के छक्के छुड़ा रखे हैं. जो बात काबिलेतारीफ है वो ये कि अपना छह घंटे का स्कूल ख़त्म करने के बाद होप दो घंटे क्रिकेट का अभ्यास करती हैं.

उन्हें भी अहसास हो चला है कि शेन वॉर्न जैसे दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर भी पास ही के रहने वाले हैं.

पिता का सपना

Image caption होप केरेटा अपने पिता युवराज घलीद के साथ

होप के भारतीय मूल के पिता युवराज घलीद भी अब अपनी बेटी को क्रिकेट से जुडी हर सुविधा दिलाने के लिए प्रयासरत हैं.

उन्होंने कहा, "मेरा सपना था कि होप एक सफल धावक बने लेकिन उसने क्रिकेट में अपने जौहर दिखा दिए. मेरी पैदाइश न्यूज़ीलैंड में हुई तो मैं सिर्फ़ रग्बी खेलता रहा. लेकिन लगता है होप में मेरा भारतीय अंश है और उसने क्रिकेट विरासत में ले लिया है".

युवराज घलीद को इस बात का भी बड़ा संतोष है कि होप ने स्थानीय क्लब हैम्पटन के ख़िलाफ़ शतक भी जड़ दिया है. वैसे होप केरेटा खुद कभी भारत तो नहीं गईं लेकिन उनको अहसास है कि उनके कुछ पूर्वज राजस्थान के रहने वाले थे.

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