यहां कब्र किराए पर लेनी पड़ती है.

  • 11 मार्च 2015
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दुनिया के कई हिस्सों में शवों को दफ़नाने या अंतिम संस्कार की समस्या पैदा होती जा रही है.

समय के साथ ये कब्रिस्तान लगभग भर चुके हैं. कई देशों में तो कब्रिस्तानों में जगह ही नहीं बची है और वहाँ कब्र किराए पर मिलती हैं.

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सीमेट्री एंड क्रीमेटोरियम इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम मोरिस कहते हैं कि हालांकि अधिकांश ब्रितानी शवदाह का विकल्प चुनते हैं, लेकिन फिर भी यह समस्या बढ़ती जा रही है.

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मोरिस कहते हैं, “लंदन के दो इलाक़ों- टॉवर हैमलेट्स और हैकनी में दफ़नाने की सेवा ही समाप्त कर दी गई है. अब यहां के निवासियों को पड़ोस के इलाक़े में जाना पड़ता है.”

मोरिस के अनुसार, ब्रिटेन के शहर सबसे पहले इस समस्या की जद में आए, लेकिन देश की हरी-भरी जगहें भी इससे अछूती नहीं हैं.

कब्र के ऊपर कब्र

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वर्ष 2013 में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अगले 20 साल में इंग्लैंड के आधे कब्रिस्तानों में जगह पूरी तरह ख़त्म हो सकती है.

एक समाधान तो यह है कि पुरानी कब्रों से अवशेषों को हटा कर उसी कब्र में और गहरे दफनाया जाए ताकि उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया जा सके.

असल में मृतकों के लिए जगह एक ऐसी समस्या बन गई है, जिससे पूरी दुनिया में प्रशासन जूझ रहा है.

यूरोप में जर्मनी जैसे अन्य देशों में कई वर्षों के बाद कब्र की जगह को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है.

स्पेन और ग्रीस में तो कब्र की जगह ज़मीन के ऊपर शवकक्ष को किराए पर दिया जाता है, जहां शव कई साल तक पड़े रहते हैं.

जब ये गल जाते हैं तो इन्हें सामुदायिक कब्रिस्तान में स्थानांतरित कर दिया जाता है, ताकि इस जगह को फिर से इस्तेमाल किया जाए सके.

बहुमंज़िला कब्रिस्तान सुरंगे

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इसी तरह वेनिस की सेन मिशेल आइलैंड कब्रिस्तान क्षमता से अधिक भर चुका है, यहां भी शवों को गल जाने के बाद स्थानांतरित कर दिया जाता है.

इसराइल ने तो ज़मीन के अंदर बहुमंजिला कब्रिस्तान सुरंगों की इजाज़त दे दी है, हालांकि कुछ रूढ़िवादी यहूदियों ने इसका विरोध भी किया था.

‘रेज़ोमेशन’

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दुनिया में दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में बहुसंख्यक हिंदू आबादी राख को बहा देती है, लेकिन मुस्लिमों और ईसाईयों के लिए दफ़नाने की सही जगह ख़त्म होती जा रही है.

टिम मोरिस कहते हैं, “अन्य देशों में इस समस्या से निजात पाने के लिए अलग किस्म की तकनीक को आज़माया जा रहा है.”

मोरिस के अनुसार, ‘रेज़ोमेशन’ की एक प्रक्रिया है, जिसमें शव को एसिड रसायन में रखा जाता है जो इसे राख और द्रव में तब्दील कर देता है.

वो कहते हैं, “यह ब्रिटेन में तो क़ानूनी है लेकिन स्कॉटलैंड में अभी भी इस पर विचार चल रहा है.”

'रेज़ोमेशन' का इस्तेमाल अमरीका के मिन्नेसोटा प्रांत में किया जाता है.

कब्रों की खुदाई

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मध्य लंदन में 16वीं शताब्दी में ब्लैक डेथ के हज़ारों शिकार लोगों की हड्डियों को खोद कर निकाला जा रहा है और उन्हें राजधानी के बाहर दोबारा दफनाया जा रहा है.

ब्लैक डेथ की शुरुआत के बाद इतने लोगों की जान गई कि सामान्य दफ़नाने की प्रक्रिया को भी नज़रअंदाज़ कर दिया गया था.

और शवों को बिना किसी स्मृति चिह्न के गढ्ढों में जितनी जल्दी हो सका, फेंक दिया गया था.

प्लेग का अब कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन पहले के कब्रिस्तान क्या शवों से निपटने का एक नया तरीक़ा साबित होंगे?

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