पाकिस्तान में 18 साल बाद होगी जनगणना

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पाकिस्तान सरकार ने 18 साल बाद 2016 में जनगणना करवाने का फ़ैसला किया है.

बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में हुई मुश्तर्का मफ़ादात काउंसिल की बैठक में तय किया गया कि देश की आबादी का अनुमान लगाने के लिए जनगणना करवाई जाएगी.

जनगणना और ख़र्च पर बात

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पाकिस्तान की मुश्तर्का मफ़ादात काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है जिसमें प्रधानमंत्री और चारों प्रांतों के मुख्यमंत्री शरीक होते हैं.

बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़, सिंध के मुख्यमंत्री क़ायम अली शाह और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के मुख्यमंत्री परवेज ख़टक और कई अन्य संघीय मंत्री शामिल हुए.

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री डॉ अब्दुल मालिक देश से बाहर होने की वजह से इस बैठक में शिरकत नहीं कर सके.

बैठक के बाद प्रधानमंत्री निवास से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगले साल मार्च में जनगणना और घरों की गिनती सेना की निगरानी में कराई जाएगी और इस पर आने वाला ख़र्च राज्य और संघीय सरकार मिलकर उठाएंगे.

इससे पहले, देश में पांच बार जनगणना करवाई गई है. पाकिस्तान में आख़िरी बार जनगणना और घरों की गिनती वर्ष 1998 में हुई थी.

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