विमान सुरक्षा के लिए बने दरवाज़े पर ही सवाल

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फ्रांस में जर्मनविंग्स एयरलाइंस के विमान ए320 की दुर्घटना के पीछे जो भी साक्ष्य सामने आए है उससे यही लगता है कि यह को-पायलट की सोच समझकर अंज़ाम दी गई दुर्घटना है.

इसमें यह देखना होगा कि को-पायलट की इस तरह की घटना को अंज़ाम देने के पीछे क्या मनोदशा रही है और क्या दूसरे कारण रहे हैं.

हर छह महीने पर पायलट की ट्रेनिंग होती है, उनकी स्क्रीनिंग होती है, मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग होती है और उनकी मानसिक स्थिरता की जांच की जाती है.

यह तो अब स्पष्ट है कि इस दुर्घटना के बाद अब इन सभी कार्रवाइयों को लेकर और ज़्यादा एतिहियात बरता जाएगा.

कॉकपिट में अकेला

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को-पायलट हादसे के वक्त कॉकपीट में अकेला था. उन्होंने पायलट को अंदर नहीं आने दिया.

को-पायलट ने जान बूझकर कर फ़्लाइट मॉनीटरिंग सिस्टम के बटन को दबाकर विमान को नीचे लाना शुरू कर दिया था.

इससे तो साफ पता चलता है कि यह जानबूझकर किया गया था लेकिन आगे जांच में और चीजें स्पष्ट होंगी.

अमरीका में हुए 9/11 के बाद पहली बार इसतरह की घटना को अंजाम दिया गया है.

सुरक्षा पर खर्च

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9/11 के बाद खरबों डॉलर सुरक्षा पर खर्च किए गए हैं. इन्हीं के तहत हवाईजहाज़ में ऐसे दरवाज़े बनाए गए जो बूलेटप्रूफ होते हैं और जिनमें कोडिंग होती है.

इस दुर्घटना के बाद इस तरह की दरवाज़े पर ही सवाल खड़ा होता है जिसमें एक पायलट, दूसरे पायलट को अंदर घुसने ही नहीं देता है.

हालांकि लुफ़्थांज़ा एयरलाइंस को सुरक्षा के लिहाज़ से दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)

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