कैसे होती है पायलटों की मनोवैज्ञानिक जांच?

पायलट

जर्मनविंग्स एयरबस हादसे के जांचकर्ताओं का कहना है कि इस विमान को संभवतः उसके सह पायलट आंद्रियास लुबित्ज़ ने जानबूझकर हादसे के कगार पर पहुंचाया था.

इस हादसे के बाद पायलटों की जांच के तरीके पर भी अब नज़र डाली जा रही है.

जर्मनविंग्स की मूल कंपनी लुफ़्थांसा ने कहा है कि पहले कोई ऐसे संकेत नहीं मिले थे जिससे यह अंदाज़ा मिलता कि लुबित्ज़ को कोई मानसिक परेशानी थी.

पिछले हफ्ते एल्प्स की पहाड़ियों में जर्मनविंग्स का विमान गिर गया था और चालक दल समेत 150 लोगों की मौत हो गई थी.

साल 2009 में इस पायलट के प्रशिक्षण में थोड़ी रुकावट आई थी लेकिन इस पद के लिए उन्हें योग्य उम्मीदवार माने जाने के बाद उनका प्रशिक्षण शुरू हो गया.

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लुफ़्थांसा के मुख्य कार्यकारी कार्सटन श्फोर ने कहा कि उन्हें प्रशिक्षण में रुकावट की वजह को सार्वजनिक करने की इजाज़त नहीं है. जब लुबित्ज़ वापस आए तब उनका प्रदर्शन बेहतर था और उनके व्यवहार में कोई असंतुलन नहीं दिखता था.

लेकिन इस पायलट ने जो अस्वाभाविक व्यवहार दिखाया उसी वजह से अब इस बात पर चर्चा शुरू हो चुकी है कि पायलटों की मनोवैज्ञानिक जांच कैसे की जाती है.

प्रशिक्षण का दायरा

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ज़्यादातर यात्री ऐसा मानते हैं कि जो शख़्स उनका विमान उड़ा रहे हैं वह एक बेहतर मानसिक जांच की प्रक्रिया से ज़रूर गुज़रे होंगे और उनका मिजाज़ भी सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी के लिए ज़िम्मेदाराना होगा. लेकिन क्या यह सच है?

श्फोर यह स्वीकार करते हुए मालूम पड़ते हैं कि पूरे यूरोप में कोई विशेष मनोवैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं है.

ब्रिटेन में विमानन क्षेत्र की नियामक सिविल एविएशन अथॉरिटी (सीसीए) के एक प्रवक्ता कहते हैं कि ब्रिटेन में ज़्यादातर पायलट अपनी शुरुआत एक फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल से करते हैं. लेकिन ये प्रशिक्षण संस्थाएं उम्मीदवारों की कोई मनोवैज्ञानिक जांच नहीं करती हैं.

वे पूरी तरह से किसी उम्मीदवार की विमान उड़ाने की क्षमता को ही आंकते हैं.

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हालांकि जब किसी पायलट को किसी विमानन कंपनी में नौकरी मिलती है तो उन्हें यात्री विमान उड़ाने से पहले मेडिकल जांच करानी होगी.

जांच पर ज़ोर

सीसीए में फ्लाइट ऑपरेशन के पूर्व प्रमुख कैप्टन माइक विवियन का कहना है कि इस जांच के लिए ज़ोर दिया जाता है.

इस प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक जांच भी शामिल है. विवियन कहते हैं कि उम्मीदवारों से उनकी पृष्ठभूमि के बारे में पूछा जाता है जिसमें उनकी दिलचस्पी, उनके परिवार, रिश्ते से जुड़े सवालों के अलावा यह भी पूछा जाता है कि क्या कभी उन्हें कभी किसी अवसाद का सामना करना पड़ा या उनको कभी आत्महत्या का ख़्याल आया.

लेकिन ऐसा लगता है कि जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से उम्मीदवार के जवाब और उस पर जांचकर्ता द्वारा लिए गए फ़ैसले पर निर्भर करता है.

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विवियन कहते हैं, "इसमें भरोसे की बात भी शामिल होती है ऐसे में हमें यक़ीन करना होता है."

यह जांच विमान क्षेत्र के विशेष रूप से प्रशिक्षित मेडिकल प्रशिक्षक करते हैं. यह जांच उम्र के आधार पर हर साल या छह महीने पर कराई जाती है.

सीसीए का कहना है कि जांच की सभी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए.

उनका कहना है, "जर्मनविंग्स हादसे से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद हम यूरोपीय एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएएसए) में अपने सहयोगियों से समन्वय कर रहे हैं और हमने ब्रिटेन में सभी ऑपरेटरों से संपर्क किया है ताकि सभी प्रासंगिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा सके."

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ज़्यादातर मेडिकल जांच पायलट के शारीरिक पहलू से जुड़ी होती है जिसमें उनके कद, वज़न, खून और पेशाब की जांच होती है.

मानसिक स्वास्थ्य पर कम ही ज़ोर दिया जाता है और इसे बेहद सामान्य मान लिया जाता है.

क़रीब साढ़े तीन पन्ने के दिशानिर्देश में महज़ छह पंक्तियों में यह बताया गया है कि मनोवैज्ञानिक समस्या के पहलू में क्या शामिल होना चाहिए.

"मसलन डॉक्टरों को आवेदक से उनके मिजाज़, नींद और शराब के इस्तेमाल के बारे में भी पूछताछ करनी चाहिए. डॉक्टरों को स्वास्थ्य जांच और मानसिक अवस्था के आकलन के दौरान यह गौर करना चाहिए कि वे दिखते कैसे हैं और उनका मूड, सोच, नज़रिया, जानकारी और चीजों को परखने की समझ कैसी है. डॉक्टरों को शराब या ड्रग के गलत इस्तेमाल की जांच पर भी ध्यान देना चाहिए."

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बीए और वर्ज़िन अटलांटिक ने यह टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि वे अपने पायलटों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कैसे करती हैं.

अहम मिसाल

बीए के पूर्व कैप्टन ट्रिस्टेन लॉरेन 20 सालों तक विमान उड़ाने के बाद वर्ष 2006 में रिटायर हुए और उनका कहना था कि पूरे करियर के दौरान उनकी कोई मनोवैज्ञानिक जांच नहीं हुई.

उनके मुताबिक़ मेडिकल जांच में ईसीजी, ख़ून की जांच जैसी चीज़ें ही शामिल थीं और इसमें मानसिक स्वास्थ्य पर बिल्कुल ज़ोर नहीं दिया गया.

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ज़्यादातर जांच तकनीकी क्षमता से ही जुड़ी थी.

हालांकि ब्रिटिश एयरलाइन पायलट एसोसिएशन इस बात को ख़ारिज करते हैं. बाल्पा में फ़्लाइट सेफ़्टी के प्रमुख डॉ रॉब हंटर का कहना है कि किसी भी पायलट के लिए यह घोषणा करना क़ानूनी तौर पर अनिवार्य किया गया है कि उन्हें कोई मनोरोग रहा है या नहीं और जांचकर्ताओं को भी इसकी जांच करनी होती है.

पायलटों के कल्याण से जुड़े मसले का अभियान चलाने वाले लॉरेन का कहना है कि पायलटों और केबिन स्टाफ से यह उम्मीद की जाती है कि वे निजी समस्याओं के बारे में बताएं लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता है.

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वह कहते हैं, "मैंने ऐसे लोगों के साथ विमान उड़ाया है जो इसके लिए तैयार नहीं थे. उन्हें कुछ घरेलू या आर्थिक समस्याएं थीं जिससे मुझपर ज्यादा दबाव बढ़ा. ऐसे में आप उनलोगों से कहते हैं कि आपको कुछ दिनों की छुट्टी ले लेनी चाहिए."

अक्तूबर 1999 में इजिप्टएयर विमान हादसा और नवंबर 2013 में मोजांबिक और अंगोला के बीच हुए एक विमान हादसे को जानबूझकर किए गए विमान हादसे में शामिल किया जाता है.

लास वेगस में एक जेटब्लू फ़्लाइट को मार्च 2012 में टेक्सस में आपात स्थिति में उतारना पड़ा. सह-पायलट ने कैप्टन को कॉकपिट से बाहर लॉक कर दिया था क्योंकि कैप्टन अजीब व्यवहार कर रहे थे.

एविएशन मेंटल हेल्थ के लेखक और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रोफेसर रॉबर्ट बोर का कहना है कि ऐसे हादसे पूरी तरह नहीं रोके जा सकते हैं.

उन्होंने इस हादसे के बाद फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से नियमन की समीक्षा की. वह कहते हैं, "हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कोई भी क़दम इस हादसे को रोकने में क़ामयाब नहीं हो सकता था."

निगरानी

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पायलट ख़ुद ही विमान को हादसे की गर्त में ले जाएं जैसे वाकये पांच से 10 साल में ही होते हैं. पायलटों की निगरानी उनके सहयोगी लगभग हर वक़्त करते हैं.

जब भी वे विमान में घुसते हैं तब उनकी जांच की जाती है क्योंकि उनके बगल में कोई बैठा होता है.

हालांकि प्रोफ़ेसर बोर कहते हैं कि मनोवैज्ञानिक जांच भी आपको किसी व्यक्ति के बारे में पूरी तरह अंदाज़ा नहीं दे सकती है.

लॉरने का कहना है कि मनोवैज्ञानिक जांच से मदद मिल सकती है लेकिन इससे सभी चीजों का हल नहीं निकल सकता है क्योंकि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव आता है.

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Image caption जर्मनविंग्स का विमान फ़्रांस में एल्प्स में गिर गया था और चालक दल समेत 150 लोगों की मौत हो गई थी.

लुफ़्थांसा के मुताबिक़ लुबित्ज़ के मामले में अवसाद के संकेत नहीं मिल रहे थे.

विवियन भी कहते हैं कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विमानन कंपनियां कैसे पायलटों की बेहतर जांच कर पाएंगी.

वह कहते हैं, "मैं ऐसी किसी जांच के बारे में नहीं जानता हूं जहां आप किसी व्यक्ति की मानसिक अवस्था को व्यापक और निष्पक्ष तरीके से आंक सकते हैं."

लॉरेन कहते हैं कि इसका जवाब यही होगा कि पायलटों को कॉकपिट में अकेले रहने से रोका जाए. वह कहते हैं, "सही उपाय यह होगा कि कॉकपिट में केबिन क्रू सदस्यों को रखा जाए."

यूएस फ़ेडरल एविएशन अथॉरिटी ने यह क़दम उठाया है. यूरोप भी अब इस पर विचार करेगा कि ऐसा करने की ज़रूरत है या नहीं.

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