आप 100 साल तक काम करना चाहते हैं?

  • 1 अप्रैल 2015
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अपनी मौत से एक दिन पहले तक फेय मोर्ले हर सप्ताह, लगातार छह दिन, अपनी छोटी सी दुकान में बटन, ज़िप और सिलाई-कढाई में काम आने वाली चीजों को बेचने के लिए पहुँचती थीं.

वो अगस्त 2013 में 100 साल की उम्र तक काम करती रहीं और जब मौत आई तो दो हफ़्ते पहले ही 100 साल की हुईं थी.

मोर्ले की दुकान सिडनी के समुद्री तटों पर स्थित बाहरी शहर मानले में थी. उन्हें काम करना पसंद था और ये उन्हें खुशी देता था.

साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के डेली टेलीग्राफ़ से उन्होंने कहा था, "हर दिन काम पर आना मेरे लिए थेरेपी जैसा है." दरअसल, आने वाले दिनों में संभवत: दुनिया के किसी भी जगह के मुक़ाबले ऑस्ट्रेलिया में लोग ज़्यादा लंबी उम्र तक काम करते नज़र आएँगे.

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70 साल में रिटायरमेंट

ऑस्ट्रेलिया में रिटायर होने के बाद लोगों को ऐज़ पेंशन मिलती है. लेकिन वहां रिटारमेंट की उम्र 65 साल है. मई 2014 में पारित कानून के मुताबिक 2035 से रिटायरमेंट की उम्र 70 साल हो जाएगी.

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यानी 1965 के बाद जन्मे ऑस्ट्रेलियाई जब तक 70 साल के नहीं हो जाएंगे, उन्हें ऐज़ पेंशन नहीं मिलेगी. तब ऑस्ट्रेलियाई लोग सबसे ज्यादा उम्र में पेंशन की सुविधा पाने वाले लोग होंगे, वो भी अगर पेंशन मिलती है, तब.

ऑस्ट्रेलिया के शैक्षणिक और सामुदायिक संस्थाओं के लिए बनी संस्था एनजीएस सुपर के सीईओ एंथनी रॉडवेल-बाल कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया में पेंशन की सुविधा संपत्ति के आधार पर मिलती है. हर किसी को नहीं."

मैकरिंडल रिसर्च के संस्थापक मार्क मैकरिंडल के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया का हेल्थ केयर सिस्टम दुनिया के बेहतरीन स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में से है. इसके कारण और तंबाकू के सेवन में तेज़ी से कमी आने के कारण ऑस्ट्रेलियाई लंबी उम्र तक जीवित रह रहे हैं.

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ऑस्ट्रेलिया की सरकारी संस्थाओं के अनुसार 2010 से 2012 में जन्मे पुरुष 80 साल तक, और इस दौरान जन्मी औरतें औसतन 84 साल तक जीवित रहेंगी.

इतना ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया में लोग लंबी उम्र तक कामकाजी भी बने रहते हैं. इसीलिए वहाँ बुज़ुर्गों के चलाए जाने वाले और शुरू किए जाने वाले नए कारोबार की रफ़्तार तेज हुई है.

बुज़र्गों को काम देने पर इन्सेंटिव

ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्रामों की संख्या भी बढ़ी है जो बताते हैं कि किस तरह से बड़ी उम्र में भी आप कामकाजी बने रह सकते हैं.

सरकार भी बुज़ुर्गों को काम देने या काम पर रखने के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक लाभ देती है.

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वैसे कुछ लोग निश्चित तौर पर अन्य वजहों से लंबे समय तक काम करते हैं.

2010 के गैलप सर्वे के मुताबिक 58 से 64 साल की उम्र के कामकाजी अमरीकियों में से आधे 65 साल की उम्र के बाद भी कामकाजी बने रहना चाहते हैं.

इसकी वजह ज़्यादा पैसे कमाने के साथ-साथ नौकरी की संतुष्टि और सक्रिय बने रहना है.

65 और 70 की उम्र में नया कारोबार

न्यूज़ीलैंड के 65 साल के हॉवर्ड फ़ेडरिक और 67 साल की उनकी पत्नी हाना ने 2010 में अपने चॉकलेट और चाय के कारोबार 'मामोर' को विस्तार देने की सोची.

इस मक़सद से वे मेलबर्न पहुंचे. फ़ेडरिक बताते हैं, "हम न्यूज़ीलैंड से पहले पहल 2003 में जर्मनी गए और वहां हमने मामोर को लॉन्च किया और 2010 में इसके विस्तार की सोची."

फ़ेडरिक की किताब 'आंत्रप्रेन्योरशिप थ्योरी प्रोसेस प्रैक्टिस' इसी साल सितंबर में आने वाली है और इसमें बुजुर्गों के स्टार्टअप एंटरप्राइज़ेज़ की बारीकियों को बताया गया है.

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फ़ेडरिक बताते हैं, "हाना को बढ़ती उम्र में जीवन के प्रति पैशन महसूस हुआ और मैं काफी भाग्यशाली रहा कि मुझे मेलबर्न की डेकिन यूनिवर्सिटी में एप्रिन्योरशिप के बारे में पढ़ाने की नौकरी मिल गई. सिक्सटी (60) अब नया फोर्टी (40) बन चुका है."

लंबी उम्र में काम के फ़ायदे

ह्यूमन रिर्सोसेज एवं रिक्रूयमेंट स्पेशलिस्ट कंपनी रैंडस्टैड के स्टीव शेपहर्ड के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में लोगों का लंबी उम्र तक काम करना सकारात्मक है.

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वे कहते हैं, "किसी ख़ास उम्र में पहुंचने के बाद करियर को विराम देना, हर किसी को अटपटा लगता है. जो लोग रिटायर हो जाते हैं, उन्हें लगता है कि वो कारोबार को काफी कुछ दे सकते हैं. वहीं दूसरी ओर, अनुभवी लोगों को काम पर रखने से कारोबार को भी फ़ायदा पहुंचता है. कामकाजी जगह में भी विविधता आती है."

विशेषज्ञों के मुताबिक कुशलता को बढ़ाना और नए क्षेत्र में निपुणता हासिल करने के चलते बुज़ुर्ग ऑस्ट्रेलियाई करियर में भी अच्छा कर रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन अपस्किल्ड के सीईओ जॉन लैंग कहते हैं, "अनुभवी और बुज़ुर्ग लोगों के लिए महत्वपूर्ण क्षमताओं को सीखना अहम होता है." ट्रेनिंग हासिल करने से नौकरी मिलने की संभावना बढ़ती है और इससे बुज़ुर्ग अपने क्षेत्र में तेज़ी से तरक्की भी करते हैं.

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स्किल ट्रेनिंग के कार्यक्रमों में 45 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इंडस्ट्री सेक्टर की है. सोसायटी और कल्चर के क्षेत्र में 19.3 फ़ीसदी, कृषि, पर्यावरण संबंधी अध्ययन में 15.4 फ़ीसदी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में 15.2 फ़ीसदी लोग दिलचस्पी ले रहे हैं.

हालाँकि कामयाबी हासिल करने के लिए हर बुज़ुर्ग को ट्रेनिंग की ज़रूरत नहीं होती. कई मामलों में नियुक्तियां परसेप्शन के आधार पर होती हैं.

सरकार देती है बढ़ावा

2013 में ऑस्ट्रेलियाई मानवाधिकार आयोग ने पाया था कि दस में से एक कारोबारी नियोक्ता के पास एक ख़ास उम्र की सीमा थी, जिससे अधिक उम्र के लोगों को वो नौकरी नहीं देना चाहते थे.

लैंग कहते हैं, "बुजुर्गों के पास अनुभव और जानकारी होती है. वे युवाओं के लिए मेंटॉर की भूमिका निभा सकते हैं. वे कस्टमर सर्विस की भूमिकाएं भी आसानी से निभा सकते हैं."

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मोटे तौर पर एक अनुमान बताता है कि ऑस्ट्रेलिया में 65 से 84 साल के लोगों की संख्या 2050 तक दोगुनी हो जाएगी. देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कारोबार और व्यक्तिगत पेशेवरों की सहायता के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं.

इसमें दो करोड़ तीन लाख डॉलर वाला सिल्वर सर्विस इंप्लाएमेंट प्रोग्राम भी शामिल है जो बुज़ुर्गों को नौकरी देने की सूरत में वित्तीय मदद भी देता है.

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ब्रिसबेन स्थित कपड़ों की कंपनी मेरिनो कंट्री की प्रमोटर 45 साल की कैरी रिचर्ड्स अपनी कंपनी में बुज़ुर्गों को काम देने में यकीन रखती हैं.

वे कहती हैं, "मैं और मेरे पति 40 साल की उम्र के पार हैं और हमारे यहां काम करने वालों की औसत उम्र 60 साल है, तो उनके लिए हम यंगस्टर्स हैं."

मेरिनो कंट्री अपने यहां बुज़ुर्गों को इसलिए नौकरी देता है क्योंकि उनमें से ज्यादातर अनुभवी होते हैं, निपुण होते हैं और सबसे बड़ी बात ये है कि वे प्रतिबद्ध होते हैं.

रिचर्ड्स कहते हैं, "इसके अलावा सरकार वित्तीय मदद भी देती है, हम किसी भी वक्त अपने यहां अनुभवी लोगों को नौकरी दे सकते हैं."

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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