यमन में फंसे भारतीयों की बेचैनी बढ़ी

यमन में हूती विद्रोही- एपी इमेज कॉपीरइट AP

भारतीयों को यमन से निकालने का काम शुरू तो हो गया है, लेकिन इस बीच वहां फंसे इन भारतीयों और यहां उनके रिश्तेदारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है.

इबी की पत्नी सेलीना इबी अदन के अल जमीरा अस्पताल में बतौर नर्स काम करती हैं.

उनका कहना है, "कल देर रात मेरी पत्नी अदन से जिबूटी के लिए जहाज़ पर चढ़ी थीं और मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि आज उन्हें विमान पर बिठाया जाएगा. लेकिन अब मैं फोन पर उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा हूं."

सेलीना इबी ने वहां आठ साल तक काम किया, लेकिन अब उन्हें वो जगह छोड़नी पड़ रही है.

केरल के कोट्टायम से इबी ने बीबीसी को बताया, "जिस इमारत में वो और दूसरी नर्सें रह रहीं थीं, वो दो दिन पहले हुई बमबारी में ढह गई है. फिर उन्हें अस्पताल में लाया गया."

पता नहीं कल क्या होने वाला है

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लेकिन यमन की राजधानी सना में नर्स दिव्या गणपति अब भी फ़्लाइट की सूचना का इंतज़ार कर रही हैं.

उन्होंने कहा, "मैं सात साल से यहां काम कर रही हूँ, लेकिन इससे पहले मैंने ऐसे हालात कभी नहीं देखे. हम बाहर नहीं निकल सकते क्योंकि सिर्फ़ गोलियां चलने और बमबारी की आवाज़ ही आती रहती है."

उन्होंने बताया, "हम रात को सो नहीं सकते, क्योंकि सारी रात गोलाबारी होती रहती है. हमें नहीं पता कल क्या होने वाला है. प्लीज़, हमारी मदद करें."

बंगलुरू मूल के व्यापारी, रवि कुमार को यमन के समयानुसार सुबह आठ बजे की फ़्लाइट पकड़नी थी.

वो बताते हैं, "मुझे भारतीय दूतावास से फोन आया कि फ़्लाइट को रद्द कर दिया गया है और अागे की जानकारी के लिए वे संपर्क करेंगे. मैंने पूछा कि विमान कब पहुंचेगा, मुझे इस पर कोई जबाब नहीं मिला."

फिर भी उम्मीद है

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Image caption यहां दिन-रात अशांति का माहौल है

लेकिन बाबू जॉन अपेक्षाकृत अधिक आश्वस्त हैं. वे मातिल्ला के तेल क्षेत्र में काम करते हैं और दूतावास के अधिकारियों और फंसे हुए भारतीयों के संपर्क में हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं भारतीय दूतावास के संपर्क में हूँ. यहां फंसे हुए भारतीयों को वापस ले जाने के लिए बहुत जल्दी सना में भारतीय विमान आएगा. सना में तकरीबन 4000 भारतीय फंसे हैं जबकि अदन में 400 और मुकल्ला में करीब 120 भारतीय फंसे हैं.'

थॉमस पीएस भी आशावान हैं. वे सना की एक कंपनी में मैकेनिकल फोरमैन हैं लेकिन फिलहाल अदन में फंसे हुए हैं.

उन्होंने बताया, "हमें दूतावास के अधिकारियों ने कहा है कि हम बंदरगाह के क़रीब अगले जहाज़ का इंतज़ार करें. हर जगह लड़ाई हो रही है. इसीलिए मैं और मेरे सहकर्मी सना नहीं लौट सके."

पहला प्रयास सफल

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भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने अपने ट्वीट में कहा है, "जलपोत आईएनएस सुमित्रा देर रात अदन से जिबूटी के लिए निकला है. इससे 348 भारतीयों को यमन से निकाला गया है. यह पहला प्रयास, जिसमें भारतीय नौसैना शामिल थी, सफल रहा है."

यमन से भारतीयों को निकालने की इस कार्यवाही को 'ऑपरेशन राहत' का नाम दिया गया है. इसके तहत भारत ने द डिस्ट्रॉयर आईएनएस मुंबई और आईएनएस तरकश नाम से दो युद्धपोतों को जिबूटी भेजा है.

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