अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक अकेले रहना...

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Image caption 26 जुलाई 1971 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से अपोलो 15 यान को प्रक्षेपित किया गया.

पूरी क़ायनात में सबसे अधिक एकाकी इंसान होना कैसा लगेगा?

मानव सभ्यता के इतिहास में केवल सात लोग ऐसे हैं जो हम सभी से अलग हैं. और ये हैं अपोलो 15 के कमांड मॉड्यूल के पायलट, जिन्होंने चंद्रमा की कक्षा में बिल्कुल एकाकी समय बिताया.

इस दौरान उनके सहकर्मी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर चहलकदमी कर रहे थे.

जब ये एस्ट्रोनॉट चंद्रमा की कक्षा में दूसरी ओर थे तो इनका बाकी सहकर्मी एस्ट्रोनॉट और धरती से भी सम्पर्क पूरी तरह कट गया था. इससे पहले उनसे ज़्यादा, शायद ही कोई ऐसे एकाकीपन से होकर गुज़रा हो.

इन सात लोगों में अब केवल पांच जीवित हैं. बीबीसी फ्यूचर के लिए मुझे अपोलो 15 कमांड मॉड्यूल के पायलट एल वोर्डन से मिलने का मौका मिला.

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Image caption इस अभियान में शामिल डेविड स्कॉट, एल्फ़्रेड वोर्डन और जेम्स इरविन तस्वीर में नज़र आ रहे हैं.

पहली नज़र में वे किसी वेटरन अंतरिक्ष यात्री की तरह ही नज़र आए. उत्तरी इंग्लैंड के यार्कशायर के एक भीड़-भाड़ वाले रेस्तरां में उनसे मुलाकात हुई. वे अपने प्रशंसकों से घिरे थे.

वोर्डन जुलाई, 1971 में चंद्रमा की यात्रा पर गए थे. उनके साथ कमांडर डेव स्कॉट और लूनर मॉड्यूल पायलट जिम इरविन थे.

अपनी इसी चंद्रमा यात्रा के दौरान उन्होंने अबतक के 'सबसे एकाकी इंसान' होने का रिकॉर्ड बनाया. जब यह रिकॉर्ड बना तो उनके साथी अंतरिक्ष यात्री उनसे 3,600 किलोमीटर दूर चंद्रमा की सतह पर थे.

मैंने अपनी मुलाकात में अपोलो अभियान की क़ामयाबी के बदले वोर्डन के बारे में ज़्यादा बात की. वैसे उनका अपोलो 15 अभियान वैज्ञानिक रूप से काफ़ी मुश्किल और चुनौती भरा था. उनसे बातचीत के अंश.

कमांड मॉड्यूल पायलट को इतिहास याद नहीं रखता, ये कम ग्लैमरस काम है?

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Image caption स्कॉट और इरविन के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद अंतरिक्ष यान में वोर्डन.

हर किसी की नज़र उन अंतरिक्ष यात्रियों पर होती है जो चंद्रमा की सतह पर उतरते हैं, लेकिन उनका काम सतह से पत्थरों को चुनना होगा. वे उसे चुनते हैं और लेकर आते हैं, जिसका बाद में विश्लेषण होता है.

लेकिन वैज्ञानिक तौर पर, आप कक्षा से कहीं ज़्यादा जानकारी जुटा पाते हैं. मसलन मैंने ढेर सारी तस्वीरें लीं. चंद्रमा के बाहरी सतह की क़रीब 25 फ़ीसदी हिस्से की तस्वीरें लीं. उसको मैप भी किया, काफी कुछ चीजें थीं. शायद पहली बार ऐसा किया गया था.

जब यान से चंद्रमा की सतह पर लैंड करने वाला हिस्सा अलग हुआ तो आपके दिमाग में क्या चल रहा था?

पहली चीज़ तो उन्हें गुडलक कहना ही था. मैंने यही सोचा कि वे ठीक से लैंड करें.

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Image caption अपोलो 15 का अभियान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद अहम था. अंतरिक्ष यात्रियों ने कहीं ज़्यादा समय तक चंद्रमा पर बिताया था.

दूसरी चीज़ ये महसूस हुई कि अब अंतरिक्ष यान में मैं अकेला रहूंगा, सारी जगह मेरी है. इस तरह तीन दिन अकेले मैंने अंतरिक्ष यान में बिताए.

एकाकीपन नहीं महसूस हुआ?

अकेले होना और एकाकीपन महसूस करना दो अलग अलग चीज़ें हैं. मैं अकेला था, लेकिन एकाकीपन नहीं था. मैं एयरफ़ार्स का फ़ाइटर पायलट रह चुका था तो मुझे अधिकतर उड़ानों में अकेले ही रहने का अनुभव था. मुझे कोई मुश्किल नहीं हुई.

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Image caption स्कॉट और इरविन ने चंद्रमा की सतह पर तीन दिन व्यतीत किए थे.

मैं डेव और जिम से भी ज़्यादा बात नहीं की, हालांकि एक बार जब उनकी लैंडिंग साइट के उपर आया तो उन्हें हाय बोला था. ह्यूस्टन में भी बात नहीं की.

आप अपने घर से क़रीब ढाई लाख मील की दूरी पर थे?

हाँ मैं घर से दूर था, लेकिन मुझे जो बात सबसे अच्छी लग रही थी वो ये थी कि मैं चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा था. जब मैं चंद्रमा के बैकसाइड में पहुंचता तो विंडो में मुझे उदय हो रही पृथ्वी नज़र आती, इसे देखना अचरज भरा था.

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Image caption इस दौरान वोर्डन यान में रोजाना 20 घंटे काम करते रहे. ख़ासकर चंद्रमा की सतह की तस्वीरों को लेते रहे.

इसके अलावा मुझे अंतरिक्ष को नए नज़रिए से देखने का मौका मिला. मैंने इतने तारे देखे कि मुझे वे लाइट की शीट जैसे नज़र आते. वे अरबों तारे थे. हमारी गैलेक्सी में अरबों तारे हैं और ऐसी गैलेक्सियां भी अरबों हैं तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ब्रह्मांड कितना बड़ा है.

इस बात ने एकाकीपन के अहसास को बढ़ाया नहीं?

कभी चंद्रमा के बैक साइड जाइए, आपको पता चलेगा कि हम तो कुछ भी नहीं हैं.

आपने कहा कि ह्यूस्टन से संपर्क नहीं करना चाहते थे आप, इसकी कोई ख़ास वजह?

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Image caption वोर्डन ने इस दौरान कई बार पृथ्वी का उदय होते हुए भी देखा.

मैं नहीं चाहता था कि मेरे कानों में कोई निर्देश पड़े. मुझे काफी काम करने थे, तो मैं उन्हें पूरा कर रहा था. सबकुछ ठीक चल रहा था, इसलिए ज़रूरत भी नहीं हुई.

आप कितने व्यस्त थे वहां? आपके दिमाग में पृथ्वी और ब्रह्मांड को लेकर क्या चल रहा था?

ये मजेदार था. जब आप वहां होते हैं तब इतना कुछ होता है करने को कि आपके पास सोचने का वक़्त नहीं होता.

मैं 20 घंटे काम करता था, केवल तीन से चार घंटे सोने को मिलता था. आपके पास इतना समय ही नहीं होता कि आप कुछ और सोच सकें.

बिना बातचीत के कैसा लगता था?

हो सकता है मेरे अनुभव से उन्हें सीख मिले. हालांकि सबके अपने अलग अनुभव होते हैं.

मुझे जो सीख मिली वो ये है कि आपको अपने सह यात्रियों के साथ बहुत दोस्ताना नहीं होना चाहिए.

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Image caption इस अंतरिक्ष यान के दल ने एक दिन ज़्यादा चंद्रमा की कक्षा में बिताया था.

इससे आपका ध्यान काम पर लगा रहता है. पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए अच्छे तरीक़े से, लेकिन हम शानदार दोस्त नहीं थे, इसका मुझे फ़ायदा मिला था.

हमें लगता था कि आप दोस्त होंगे?

अपोलो 12 के अंतरिक्ष यात्री आपस में दोस्त थे. पेटे कोनराड अपने सहयात्रियों को भाईयों जैसा मानते थे.

आपको उनको देखिए, हमेशा तीनों साथ नज़र आते थे. हम इसके ठीक विपरीत थे, हमारी ट्रेनिंग एक साथ जरूर हुई थी, लेकिन सोशल लाइफ़ में भी हमारी ज़्यादा मेल जोल नहीं थी.

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Image caption वापसी के दौरान वोर्डन ने स्पेस वॉक किया था, ये तस्वीर उनके साथी जेम्स इरविन ने ली थी.

इसने हमें एक टीम के तौर पर प्रभावी बनाया.

आपके सहयात्री डेव स्कॉट और जिम इरविन ने चंद्रमा पर अपने पांवों के निशान छोड़े, जो वहां लाखों साल तक मौजूद रहेंगे. आपने ने भी अपना कोई निशान वहां छोड़ा, शायद यूरिन?

असल में जब हम चंद्रमा की कक्षा में थे तो यूरिन डंप किए थे. हमें यूरिन को बाहर निकालने के लिए वॉल्व को खोल देना होता था और फ़िर अपनी ट्रेजेक्टरी को बदल लेना होता था ताकि हम इसके रास्ते से हट जाएं. हो सकता है ये अभी भी वहां हों.

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Image caption वापसी के दौरान तीन में दो पैराशूट ने ही काम किया लेकिन तीनों अंतरिक्ष यात्री 13 दिन बाद 7 अगस्त, 1971 को प्रशांत महासागर में उतरने में कामयाब हुए.

हालांकि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण इतना नहीं होता कि कोई कण कक्षा में रुक पाए, इसीलिए वहां कोई वायुमंडल नहीं है.

इसलिए मेरा अनुमान है कि वहां अब कुछ नहीं बचा होगा.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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