सऊदी अरब की मांग पूरी करें या नहीं?

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पाकिस्तान की संसद में इस बात पर बहस हो रही है कि क्या देश की सेना को सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन में लड़ने के लिए भेजा जाना चाहिए.

सऊदी अरब और अरब लीग के दूसरे सदस्य यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.

अमरीका भी इस लड़ाई में शामिल है.

फ़ायदे का सौदा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने संसद में कहा है कि सऊदी अरब ने युद्धपोत, विमानों और सैनिकों की मांग की है.

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पाकिस्तान के ख़राब अर्थव्यवस्था को पूर्व में सऊदी अरब से आर्थिक मदद हासिल हुई है.

प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान सऊदी अरब की संप्रभुता पर उठने वाले किसी भी ख़तरे का जवाब देगा.

जनता का मूड अलग

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान की जनता यमन के युद्ध में मुल्क के शामिल होने के ख़िलाफ़ है.

आसिफ़ का कहना था कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने 26 मार्च को नवाज़ शरीफ़ को यमन की लड़ाई के बारे में बताया और उनसे मदद की दरख़्वास्त की.

दो दिनों बाद मुल्क के बादशाह सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने भी शरीफ़ से इसी सिलसिले में बातचीत की.

रक्षामंत्री का कहना था कि शरीफ़ ने इस सिलसिले में रक्षा मामलों की समीति के साथ बैठकें भी की हैं.

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