दफ़्तर में जब शर्मिंदगी की हद पार हो जाए..

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

क्या आपको अपने दफ़्तर में कभी इतना अपमान झेलना पड़ा है कि आपने इस्तीफ़ा देने का सोचा हो?

कभी ऐसा होता है कि मेल पर 'रिपलाई ऑल' का बटन दब जाता है जबकि आपकी ऐसा करने की कोई मंशा नहीं होती ; या फिर आपने कॉल लेते समय सोचा कि फ़ोन म्यूट पर है और बातें करते चले गए जिसके कारण बाद में शर्मिदगी उठानी पड़ी ; या फिर ऐसे कपड़े पहन कर दफ़्तर या पार्टी में चले गए जहाँ वो ड्रेस पहनना बहुत अनुचित था?

उस समय दिमाग में आ सकता है कि मुझे अब कभी इस संस्था में काम नहीं करना चाहिए....पर ऐसी स्थिति में आप क्या सोच रहे होते हैं?

ऐसे में, क्या वाकई बोरिया बिस्तर बांधकर देश छोड़ने की ज़रूरत है या फिर आप अपमानजनक पलों को पीछे छोड़ आत्म-सम्मान वापस हासिल कर सकते हैं?

हमने सवाल-जवाब की साइट क्योरा पर लोगों से पूछा कि उनके दफ़्तर में उनके लिए अब तक सबसे अपमानजनक पल कौन सा था?

'दिनभर डिक्की खोलते, बंद करते रहता'

डिजिटल मार्केटिंग का काम करने वाले कैलम हॉल एक समय में ब्रिटेन की बड़ी कार डीलरशिप में काम करते थे.

महज़ तीन दिन की नौकरी के बाद उन्हें एक ग्राहक से विंटेज बेंटली कार लेकर फ़र्म के गैरेज तक आने को कहा गया था. लेकिन कार का इंजन था कि स्टार्ट होने का नाम न ले.

(पढ़ें- कम समय में ज़्यादा काम करने की तरकीब)

कार मालिक ने उन्हें चाभी घुमाने के बाद बगल के बटन को दबाने के लिए कहा था. हॉल ने लिखा है, "ऐसा करने पर कुछ हो नहीं रहा था. चाभी घुमाने से क्लिक की आवाज़ आती थी, लेकिन कार स्टार्ट नहीं हो रही थी. मैंने कई बार ट्राई किया और फिर शर्म से पानी-पानी होने लगा."

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

इसके बाद हॉल ने देखा कि कार मालिक सड़क के दूसरी ओर खड़े होकर हंस रहे हैं.

हॉल ने लिखते हैं, "मैं जो बटन दबा रहा था कि वो कार की डिक्की को खोलने वाला था. कार के मालिक मुझे कार की डिक्की खोलते-बंद करते देख रहे थे. पास आकर उन्होंने कहा- माय डियर ब्वॉय, तुम पिछले पांच मिनट से डिक्की खोल और बंद कर रहे हो. मैं दिन भर खड़े हो कर ये देखता रहता लेकिन मुझे ऑफ़िस जाना है."

(पढ़ें- कामकाजी तनाव दूर करने के 7 नुस्ख़े)

इसके बाद उन्होंने नजदीक आकर हॉल को सही बटन दिखाया.

काम आता है अनुभव

कंप्यूटर गेम के प्रोग्रामर जैफ़ केसेलमेन कहते हैं, "स्ट्रीट मैजिशियन के तौर पर मेरे पहले कुछ सप्ताह बेहद ख़राब रहे. लेकिन इस शर्मिदंगी का फ़ायदा हुआ और थोड़े अनुभव के बाद मुझे जल्दी ही ठीक ठाक पैसे मिलने लगे."

हम सब लोगों को सार्वजनिक तौर पर कपड़ों की गड़बड़ी होने से शर्मिंदगी उठानी पड़ती है. फ्रेंक फ़ेरिस बताते हैं कि उनके नए दफ्तर में काम करने के दौरान एक दिन पतलून फट गई. वे कहते हैं, "इसके बाद मुझे भीड़ भाड़ वाले सुपरमार्केट में काम करते वक्त झुकना भी पड़ा पर मैंने इसका ज़्यादा बुरा नहीं मनाया."

इमेज कॉपीरइट Thinksstock

तकनीकी गड़बड़ी के चलते भी कुछ मुश्किल स्थितियों का सामना करना होता है. एक क्योरा यूज़र जो अपनी पहचान नहीं बताना चाहते, बताते हैं कि उन्होंने अपने एक सहकर्मी से फोन पर बातचीत शुरू की. ये ऐसा दफ्तर था जिसमें सभी बैठकें लैपटाप और हेडसेट के ज़रिए ऑनलाइन होती थीं.

क्योरा यूज़र ने बताया, "मैं उसे विस्तार से अपनी एक अन्य सहकर्मी की नाटकीय प्रतिक्रिया के बारे में बताने लगा, जो कामकाज में अंडर-परफ़ॉर्म कर रहीं थीं. उससे कुछ जिम्मेदारियां वापस लिए जाने पर उसके रिएक्शन के बारे में बात हो रही थी. हम आपस में हंस रहे थे क्योंकि हम दोनों उसे पसंद नहीं करते थे. इसलिए मैंने ये कहानी शेयर करने में दिलचस्पी ले रहा था."

(पढ़ें- सैर-सपाटे में पैसे बचाने के 4 तरीके)

यूज़र ने आगे बताया, "मैं ये सोच रहा था कि हमारी बातचीत म्यूट पर है. लेकिन मुझे वेब मीटिंग से किसी का इंस्टेंट संदेश मिला- हम लोग सब कुछ सुन रहे हैं जो तुम लोग बोल रहे हो. मैं तो सकते में आ गया. मुझे उस दिन को लेकर आज भी ख़राब महसूस होता है."

(क्योरा की नीति के अनुसार जवाब देने वालों के असल नाम दिए जाते हैं. गुणवत्ता और वैधता की जांच के लिए क्योरा उन विशेषज्ञों से उनके क्षेत्र के कुछ सवाल पूछता है.)

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार