अमरीका की ईरान को चेतावनी

  • 9 अप्रैल 2015
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अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने यमन में शिया हूती विद्रोहियों के कथित समर्थन के लिए ईरान को चेतावनी दी है.

केरी ने कहा कि अमरीका हर उस मध्य पूर्वी देश को मदद देगा जो ईरान से ख़तरा महसूस करते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि ईरान इस हिस्से में किसी प्रकार के अस्थिरता के प्रयास करता है तो अमरीका उसका "समर्थन नहीं करेगा."

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Image caption बिल्डिंग से उठते धुंए को देखता एक हूती विद्रोही

अमरीका यमन में हूती विद्रोहियों से लड़ रही सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना को मदद मुहैया कराने में तेज़ी ला रहा है.

हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव की वजह से यमन के राष्ट्रपति अब्द रब्बुह मंसूर हादी को देश छोड़ कर जाना पड़ा.

तेहरान ने विद्रोहियों का समर्थन करने के आरोप का खंडन किया है.

ईरान कर रहा है मदद?

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Image caption ईरान का जहाज़ अल्बरोज़ देश की समुद्री सीमा के पार जाने को तैयार

लेकिन कथित तौर पर ईरान ने यमन के अदन की खाड़ी के लिए यहां से नौसेना के युद्धपोत भेजे हैं.

जलसेना के कमांडर एडमिरल हबीबुल्ला सय्यारी ने राज्य के मीडिया को बताया कि "पानी के रास्तों से इलाके की सुरक्षा" के मद्देनज़र ऐसा किया गया है.

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Image caption यमन के राष्ट्रपति अब्द राब्बुह मंसूर हादी की समर्थित सेना के टैंक ऊपर चढ़े लोग

पीबीएस न्यूज़आवर से बात करते हुए केरी ने बताया कि यह स्पष्ट है कि ईरान हूती विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है. उन्होंने कहा "जा़हिर है कि ईरान की ओर से आपूर्ति आ रही है. कई उड़ानें हर हफ्ते आ रही हैं."

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Image caption सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हवाई हमलों से कई घर भी तबाह हु ए हैं.

केरी ने आगे कहा, "ईरान को यह समझने की ज़रूरत है कि इलाके में अस्थिरता और लोगों के देश और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार की लड़ाई का अमरीका समर्थन नहीं करता."

यमन के दक्षिण में अदन शहर में शिया हूती विद्रोहियों और राष्ट्रपति अब्द राब्बुह मंसूर हादी के समर्थन वाली सेना के बीच लड़ाई चल रही है.

इस बीच मंसूर हादी का समर्थन करने वाली सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना राज्य के उत्तर में हवाई हमले कर रही है.

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Image caption यमन की राजधानी सना में हवाई हमले के बाद इलाके से भागते निवासी

विश्व स्वास्थ्य संस्था के अुसार 19 मार्च से चार अप्रैल के बीच यमन में अब तक लगभग 560 लोग मारे गए हैं, जिसमें 76 बच्चे हैं. इस लड़ाई से क़रीब 17,00 लोग प्रभावित हुए हैं और 100,000 घर छोड़ कर पलायन कर चुके हैं.

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