यमन संकट: पाकिस्तान से नाराज़ यूएई

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने यमन की लड़ाई से दूर रहने के लिए पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है.

यूएई के विदेश राज्य मंत्री अनवर मोहम्मद गरगाश ने कहा है कि जब खाड़ी देशों को पाकिस्तान की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, तब वो खाड़ी देशों की बजाय ईरान को तरजीह दे रहा है.

यमन में शिया हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी नेतृत्व में खाड़ी देश कार्रवाई कर रहे हैं और सऊदी अरब ने इसमें पाकिस्तान से मदद मांगी थी.

लेकिन पाकिस्तानी संसद में पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तान इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लेगा और राजनयिकों तरीकों से संकट के हल के प्रयास करेगा.

प्रस्ताव के मुताबिक अगर सऊदी अरब की संप्रभुता पर ख़तरा आया तो वो मदद करने में पीछे नहीं हटेगा.

'अहम इम्तिहान'

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Image caption यमन में खाड़ी गठबंधन हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ यमन की सेना की मदद कर रहा है

डॉक्टर अनवर मोहम्मद गरगाश ने ट्वीट किया, “अरब खाड़ी देशों को ख़तरनाक टकराव का सामना करना है, उसकी सामरिक रणनीति दांव पर है और सच के क्षण में ही असल सहयोगी और बयानों और मीडिया वाले सहयोगी में अंतर साफ़ होता है.”

खाड़ी देश पाकिस्तान को आर्थिक मदद और निवेश के मामले में बहुत सहायता करते हैं.

गरगाश ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान और तुर्की का अस्पष्ट और विरोधाभासी रुख़ दिखाता है कि लीबिया और यमन से खाड़ी देशों को जो ख़तरा है, उससे निपटना किसी और नहीं, बल्कि खाड़ी देशों की ही ज़िम्मेदारी है, लेकिन ये संकट पड़ोसी देशों के लिए एक अहम इम्तिहान है.”

तुर्की के विदेश मंत्री भी कह चुके हैं कि इस संकट का हल निकालना तुर्की, ईरान और सऊदी अरब की ज़िम्मेदारी है.

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