समझें हिलेरी की दावेदारी 3 सवालों में

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अमरीका की प्रथम महिला रहीं हिलेरी क्लिंटन ने साल 2016 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए दावेदारी पेश कर दी है.

डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार के रूप में चुनाव में दूसरी बार उतरने के लिए तैयार हिलेरी में खुद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कमाल की राष्ट्रपति होने की संभावना जताई है.

अमरीका की पहली महिला राष्ट्रपति बनने की हिलेरी की कितनी संभावनाएं हैं?

आइए जानें हिलेरी क्लिंटन की ताक़त और कमज़ोरियां जिसके बारे में बता रहे हैं डेनवर यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर वेद नंदा.

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हिलेरी क्लिंटन की ताक़त क्या है?

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1. राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का सामना करने के लिए कोई तैयार नहीं है.

2. पूर्व प्रथम महिला और सांसद के रूप में हिलेरी क्लिंटन के पास लंबा अनुभव है.

3. हिलेरी ने 2008 में भी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पेश की थी लेकिन बराक ओबामा से हार गई थीं. इस हार से सीखते हुए इस बार वे बड़े स्तर पर तैयारी कर रही हैं.

4. उन्होंने शहरों और गांवों में एकदम ज़मीनी स्तर से शुरुआत की है. दो तीन महीनों में अपनी सहायता के लिए कुशल सलाहकार तैयार किए हैं.

5. साल 2008 के मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी में भी हिलेरी आज मज़बूत स्थिति में हैं.

हिलेरी क्लिंटन की कमज़ोरियां क्या हैं?

हिलेरी क्लिंटन के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी उम्मीदवारी जीतना तो आसान होगा मगर राष्ट्रपति चुनाव जीतना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

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1. क्लिंटन के स्कैंडल और उनका पारदर्शी न होना सबसे बड़ी कमी साबित हो सकती है.

2. बेनगाजी हमले के बारे में उनके रुख पर अाज भी विवाद है. इस बारे में अपना पक्ष रखते हुए हिलेरी ने ''हार्ड च्वाइसेस'' नाम से एक किताब लिखी है. साल 2012 में बेनगाजी स्थित अमरीकी दूतावास पर हुए चरमपंथी हमले में लीबिया में अमरीकी राजदूत समेत चार अमरीकी नागरिक मारे गए थे.

3. मशहूर शख़्सियत होने के बावजूद लोगों का उन पर भरोसा कम है क्योंकि उन्हें बेहद गोपनीयता बरतने वाला शख़्स माना जाता है.

हिलेरी कैसे ओबामा से अलग होंगी?

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कई ऐसे सवाल हैं जहां हिलेरी क्लिंटन मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा से दो कदम आगे साबित हो सकती हैं.

1. वो देश की विदेश मंत्री रह चुकी हैं. विदेश नीति के मामले में उम्मीद है कि वे मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों से थोड़ी दूर रहेंगी और उनकी तरह ढुलमुल रवैया नहीं अपनाएंगी.

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अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, इराक और सीरिया जैसे देशों के साथ ओबामा की विदेश नीति में लोगों को कई कमज़ोरियां दिखाई देती हैं. ऐसे में हिलेरी की कोशिश होगी कि वे अपनी नीतियों से खुद को मज़बूत महिला साबित करें.

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3. हिलेरी ओबामा के मुकाबले कठोर कदम उठा सकती हैं. लोगों को लगता है कि दुनिया में जहां मुश्किलें आ रही हैं वहां अमरीका को ताकत दिखानी चाहिए.

4. अमरीका के लिए रक्षा क्षेत्र का काफ़ी महत्व है और वो इसमें पैसे भी काफ़ी लगाता है.

5. भविष्य में चीन के साथ आने वाली मुश्किलों को देखते हुए माना जा रहा है कि ओबामा की तुलना में क्लिंटन उतनी नरम न हों और अमरीका की ताकत का इस्तेमाल करें.

(प्रोफेसर वेद नंदा से बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह की बातचीत पर आधारित)

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