फ्रांस में क्यों मरे 4 हज़ार भारतीय सैनिक

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में मारे गए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि के साथ ही देश के बाहर भारतीय सैनिकों के ‘बलिदान’ की एक बार फिर चर्चा हो रही है.

मोदी ने शनिवार को उत्तरी फ़्रांस में ब्रितानी साम्राज्य की ओर से लड़ने वाले भारतीयों को श्रद्धांजलि दी.

मोदी फ़्रांस में नूवे शेपल के युद्ध स्मारक भी गए जिसे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए भारतीय सैनिकों की याद में 1927 में बनाया गया था.

आधिकारिक आँकड़ों की मानें तो इस युद्ध में क़रीब साढ़े चार हज़ार भारतीय सैनिक मारे गए थे और नूवे शेपल का युद्ध भारतीय सैनिकों के योगदान के लिए ख़ास तौर पर जाना जाता है.

जुलाई 1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, उस वक्त ब्रिटेन और फ़्रांस आक्रामक जर्मनी के सामने थे. जर्मनी ने तब बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग पर आक्रमण कर दिया था.

जैसे ही जर्मन सैनिकों ने फ़्रांस की ओर बढ़ना शुरू किया, ब्रिटेन ने जर्मनी के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी. पश्चिमी मोर्चे पर फ़्रांस और ब्रिटेन संयुक्त रूपसे जर्मनी का मुक़ाबला कर रहे थे.

इस मोर्चे पर 1915 और 1917 के बीच बड़ी लड़ाइयां लड़ी गईं जिनमें से एक महत्वपूर्ण लड़ाई नूवे शेपल नामक गांव में लड़ी गई थी.

गढ़वाल ब्रिगेड

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Image caption प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस में चार हज़ार से ज़्यादा भारतीय सैनिक मारे गए थे.

इस लड़ाई का नेतृत्व भारतीय सैनिकों ने किया जिन्हें कुछ दिन पहले ही बंबई से यूरोप लाया गया था. मेरठ डिवीजन की गढ़वाल ब्रिगेड ने शुरुआती हमले का नेतृत्व किया था.

लेफ्टिनेंट जनरल सर जेम्स विलकॉक्स उस समय फ़्रांस में भारतीय सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे. उन्होंने गढ़वाल ब्रिगेड की प्रशंसा करते हुए लिखा है, “गढ़वाल ब्रिगेड के सिपाहियों ने तेज़ी से मोर्चे को सँभाल लिया और उस समय इससे बेहतर कुछ और नहीं हो सकता था.”

लेकिन शुरुआती सफलता के बाद जर्मन सैनिकों ने संयुक्त सेना को रोक दिया.

जर्मन सैनिकों से लड़ते हुए क़रीब चार हज़ार भारतीय सैनिक मारे गए. विलकॉक्स के मुताबिक जर्मन आर्मी उस वक़्त दुनिया की सबसे आधुनिक सैन्य टुकड़ी थी.

लड़ाई आगे भी जारी रही और अपने घरों से हज़ारों मील दूर भारतीय सैनिक न सिर्फ़ दुश्मन सेना से मोर्चा ले रहे थे बल्कि यूरोप के ठंडे मौसम से भी लड़ रहे थे.

भारतीय सैनिकों ने ब्रिटेन के लिए कई और लड़ाइयां लड़ीं. इसके अलावा भारतीय सैनिकों को पूर्वी अफ्रीका, मेसोपोटामिया और मिस्र जैसे दुनिया के कई देशों में भी ब्रितानी हितों की रक्षा के लिए भेजा गया.

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