जिनपिंग का पाक दौरा: भारत के लिए चिंता?

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Image caption पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ज़ोर-शोर से चल रही है स्वागत की तैयारियां

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 20 और 21 अप्रैल को पाकिस्तान में होंगे. इस दौरे पर भारत सरकार के रणनीतिकारों की भी खूब नज़र होगी.

चीन पाकिस्तान में 50 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर सकता है.

पाकिस्तान और चीन के मीडिया की ख़बरों को मानें तो 50 अरब डॉलर में से एक बड़ा हिस्सा एक 'चाइना-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर' बनाने में खर्च किया जाएगा.

इस कॉरीडोर के ज़रिए चीन, पाकिस्तान के दक्षिण में मौजूद ग्वादर बंदरगाह तक सड़क मार्ग से भी जुड़ जाएगा.

ग्वादर से भारत क्यों परेशान?

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भारत के लिए चिंता की बात ये भी हो सकती है कि इस नए बंदरगाह को चीन आगे चल कर एक नौसेनिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर सकता है.

पाकिस्तान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी एपीपी ने 17 अप्रैल को कहा था कि चीन ग्वादर बंदरगाह में काम शुरु कर चुका है.

इस बंदरगाह से चीन को अरब की ख़ाड़ी और होर्मूज़ की ख़ाड़ी में सीधा प्रवेश मिल गया है जो पश्चिम एशिया के तेल बाहर भेजने के रास्तों के बेहद नज़दीक है.

भारत अपनी तेल की ज़रूरत का सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है.

ग्वादर में चीन का बंदरगाह भारत के लिए भी बड़ा सिरदर्द बन सकता है.

भारत ने हाल ही में बड़ी मुश्किल से श्रीलंका को अपने यहाँ चीन को बंदरगाह बनाने से रोकने के लिए राज़ी किया है जिस वजह से चीन भारत और श्रीलंका दोनों से नाराज़ है.

अन्य सामरिक समझौते

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ख़बरों के अनुसार पाकिस्तान चीन से आठ पनडुब्बियां भी ख़रीदेगा. इस बाबत समझौता भी इसी यात्रा के दौरान हो सकता है.

ये सौदा लगभग 5 अरब डॉलर का हो सकता है.

हांग-कांग से प्रकाशित होने वाले अख़बार साऊथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा के मसले पर दोनों देशों के बीच बेहतर समझ और अधिक समन्वय पर बात हो सकती है. पाकिस्तान को लगता है कि इससे वो अफ़ग़ानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव को कम कर सकता है.

इसके अलावा चीन ग्वादर से लेकर शिनजियांग के वीगर इलाकों तक 3000 किलोमीटर लंबी एक सड़क भी बनाने की तैयारी में है. भारत में इस सड़क को एक और सामरिक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है.

इससे चीन को क्या हासिल होगा?

ग्वादर से लेकर शिनजियांग तक इससे चीन के लिए पश्चिम एशिया से अपने यहाँ तेल पहुँचाना आसान और काफ़ी ज़्यादा सस्ता होगा.

इसके अलावा चीन को यह भी उम्मीद है कि इसके ज़रिए वो अपने शिनजियांग राज्य में वीगर पृथकतावादी आंदोलन पर भी लगाम लगा सकते हैं. इस सबके अलावा यह भारत पर सामरिक दबाव वनाए रखने का अच्छा तरीका है.

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