सैकड़ों शरणार्थियों के डूबने पर यूरोप में चिंता

शरणार्थी इमेज कॉपीरइट AP

भूमध्यसागर के ज़रिये यूरोप पहुंचने के प्रयास में सैकड़ों शरणार्थियों के डूबने से यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री सोमवार को लक्ज़मबर्ग में मिल रहे हैं ताकि इस समस्या से निबटने के लिए जल्दी ही कदम उठाए जा सकें.

लीबिया और दूसरे देशों में चल रही हिंसा से ये समस्या बढ़ी है. भूमध्यसागर से लगते इटली जैसे यूरोपीय देश इन मामलों से ख़ासे परेशान हैं.

इमेज कॉपीरइट AP

यूरोपीय मुल्कों ने पिछले साल फ़ैसला किया था कि वो इस तरह के शरणार्थियों को बचाने के कार्यों में कमी लाएंगे ताकि ऐसे लोगों के विश्व के दूसरे हिस्सों से यूरोप पहुंचने की कोशिश पर लगाम लग सके.

इंसान के सम्मान से जुड़ा मसला

इटली के प्रधानमंत्री मातेयो रेंज़ी ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ के नेताओँ की एक आपात बैठक बुलाने की मांग रखेंगे. उन्होंने मानव तस्करों को इन मौतों के लिए अंतिम रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है और इसके खिलाफ सबको साथ आकर अभियान चलाने की अपील की है.

इटली के प्रधानमंत्री मातेयो रेंज़ी ने कहा, ''यह सागर में सिर्फ आपात स्थिति का मसला नहीं है यह एक राजनीतिक संकट है. इंसानों के व्यापार को रोकना इंसान के सम्मान का मसला है ना कि राष्ट्रीय सुरक्षा का.''

इमेज कॉपीरइट epa

सबसे बड़ा हादसा

एक दिन पहले हुए हादसे में कम से कम 650 लोगों के डूब कर मारे जाने की आशंका है. अब तक हुए हादसों में इसे सबसे बड़ा बताया जा रहा है.

इमेज कॉपीरइट EPA

ये हादसा लीबिया के समुद्री क्षेत्र में हुआ.

उत्तरी अफ्रीका के देशों से आ रहे शरणार्थियों के सामने भूमध्यसागर पार करने के बाद सबसे पहले इटली ही नज़र आता है और यही वजह है कि उसे इस समस्या की आंच सबसे ज्यादा झेलनी पड़ी है.

आर्थिक मुश्किलों और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे यूरोप के लिये यह तय करना कठिन है कि शरणार्थियों के खर्च का बोझ कौन उठाए. यूरोप की माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट की निदेशक एलिज़ाबेथ कॉलेट इसे यूरोपीय संघ के लिए बड़ी चुनौती बताती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार