अरबों की भारत से उलफ़त, पाक पर नज़ला?

  • 20 अप्रैल 2015
दुबई बंदरगाह इमेज कॉपीरइट AFP

सऊदी अरब और यूएई समेत खाड़ी के देशों में 60 लाख से अधिक भारतीय और 30 लाख पाकिस्तानी कामगार मौजूद हैं.

भारतीय वर्कर हर साल 30 अरब डॉलर कमाकर अपने घरों को भेजते हैं और पाकिस्तानी साढ़े आठ अरब डॉलर.

खाड़ी के देशों से भारत का व्यापार 30 अरब डॉलर का है और पाकिस्तान का लगभग 16 अरब डॉलर का.

(पढ़ें- दोनों देशों का एक जैसा हाल)

खाड़ी के देशों से भारत अपनी ज़रूरत का 65 फीसदी और पाकिस्तान 80 फ़ीसदी तेल मंगवाता है. मगर भारत भी इसके पैसे देता है और पाकिस्तान भी.

पढ़ें विस्तार से

इमेज कॉपीरइट BEHROUZ MEHRI AFP
Image caption ईरान और पाकिस्तान की सीमा.

बहरीन, ओमान, क़तर और यूएई के साथ तो भारत के बक़ायदा रणनीतिक समझौते हैं.

(पढ़ें- अपराध वही जो दूसरों के संग हो...)

जबकि पाकिस्तान के साथ अगर किसी का कोई रणनीतिक समझौता होगा भी तो वह कागज़ पर नहीं बल्कि ज़बानी ही होगा.

सऊदी अरब के स्वर्गवासी शाह अब्दुल्लाह साल 2006 में भारत के रिपब्लिक डे परेड के मेहमान रह चुके हैं.

मगर कोई अरब बादशाह पाकिस्तान की किसी परेड का अब तक मेहमान नहीं हुआ है.

अरबों की मोहब्बत

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption जनवरी 2015 में किंग अबदुल्ला का निधन हो गया था. उनके भारत दौरे के वक्त की एक फाइल फोटो.

भारत के इसराइल से भी अच्छे संबंध हैं और ईरान से भी. मगर सऊदी अरब समेत खाड़ी का कोई देश भारत से ये गिला नहीं करता कि यार तुम दो किश्तियों में क्यों सवार हो.

(पढ़ें- ....ताकि न हो देश की बदनामी)

दूसरी तरफ अरबों की मोहब्बत में पाकिस्तान का इसराइल से कोई लेना देना नहीं फिर भी अगर पाकिस्तान ईरान से सीमा मिलने की मजबूरी में कभी कभार उसकी तरफ प्यार भरी नजरों से देख भी लेता है तो सऊदी अरब और यूएई पाकिस्तान को खखारते हुए कहते हैं कि अबे! ये क्या ग़जब कर रहा है. हमसे भी आंख मटक्का और उनसे भी!

पाकिस्तान में खाड़ी के अरब शहज़ादे सर्दियों के मौसम में बस तिलोर के शिकार पर आते हैं लेकिन भारत वे पढ़ने भी जाते हैं, शादियां भी करते हैं, बॉलीवुड के कलाकारों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाते हैं और आइटम सॉन्ग्स पर हबीबी हईया हईया भी करते हैं.

पाकिस्तान से नाराज़!

इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान में जितने मुसलमान रहते हैं उतने ही भारत में भी रहते हैं. जितने हाजी पाकिस्तान से सऊदी अरब जाते हैं, उतने ही हाजी भारत से भी जाते हैं.

(पढ़ें- मेरे पास नाथूराम गोडसे है...)

लेकिन भारत से इतने अच्छे संबंध होते हुए भी आखिर सऊदी अरब और यूएई पाकिस्तान पर ही क्यों नाराज़ होते हैं कि आड़े वक्त में वो अपने फौजी भी नहीं भिजवा रहा है और साफ इनकार भी नहीं कर रहा है और अपनी पार्लियामेंट की ओट में छिपता फिर रहा है.

ये देश भारत से क्यों नहीं कहते कि भईया तुम्हारे पास तो विश्व की तीसरी बड़ी सेना है, जरा इसमें से चंद हज़ार हमारे पास भिजवा दो कि हम यमन के हूतियों की तबियत से पिटाई करवा सकें.

डिफेंस बजट

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption पाकिस्तान का रक्षा बजट छह अरब डॉलर का है.

तुम्हारा क्या जाएगा श्रीमान, अगर हमारा भी थोड़ा सा भला हो जाए. मगर नहीं साहब. इस संदंर्भ में भी खाड़ी देशों का सारा नज़ला पाकिस्तान पर ही गिरता है.

हालांकि इस ग़रीब का डिफेंस बजट भारत, यूएई और सऊदी अरब के कम्बाइंड डिफेंस बजट यानी 150 अरब डॉलर के मुक़ाबले में सिर्फ छह अरब डॉलर है.

जब मैं अरबियों की इस मेहरबानी का कारण पाकिस्तान के बुद्धिजीवियों से पूछता हूं तो वे खीसें निकाल लेते हैं.

तो क्या आप भी मुझे पागल समझकर जवाब दिए बिना हंसते हुए आगे बढ़ जाएंगे!

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार