5 आदतें जो रैप्यूटेशन को राख कर देंगी

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हर दफ्तर में ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें अधिकतर लोग नापंसद करते हैं.

हम लोग काम के दौरान इस बात की चिंता करते रहते हैं कि कहीं कोई बड़ी ग़लती न हो जाए.

लेकिन जिन लोगों को नापसंद किया जाता है, उन्हें उनके काम या ग़लतियों के कारण नापसंद नहीं किया जाता है.

आपकी रेप्यूटेशन को सबसे ज़्यादा नुकसान उन आदतों या व्यवहार के छोट-छोटे पहलुओं से होता है जिन्हें अकसर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

कई लोग झटके खाने के बाद इसे सीख जाते हैं. कई लोग कभी नहीं सीख पाते. बहरहाल लिंक्डइन इंफ्लूएंशर्स पर बीते हफ़्ते इसी टॉपिक पर चर्चा हुई.

हम दो विशेषज्ञों की राय से आपके सामने रखते हैं.

डॉ. ट्रेविस ब्रैडबेरी, टैलेंटस्मार्ट के प्रेसीडेंट

आप कितने भी प्रतिभाशाली क्यों ना हों या फिर आप कितने भी निपुण क्यों ना हों, कुछ ऐसे व्यवहार होते हैं जिनको लेकर लोगों का नज़रिया आपके प्रति बदल सकता है और आपके व्यक्तित्व के नाकारात्मक पहलू को ज़ाहिर कर सकता है.

(पढ़ें- दोस्त को नौकरी नहीं देने की वजहें)

तो क्या हैं वो ग़लतियां? जानिए इन ग़लतियों में इतना बुरा क्या है?

1. बैकस्टैबिंग यानी पीछे से वार करना

किसी भी उद्देश्य से, अनजाने में या फिर जानबूझकर अपने सहकर्मी को धोखा देना बैकस्टैबिंग कहलाता है. दफ़्तरों में ये खूब होता है और इससे दफ़्तर में झगड़े भी खूब होते हैं. अकसर लोग किसी समस्या का समाधान खोजने के लिए उक्त व्यक्ति को बताए बिना, उससे ऊपर काम कर रहे व्यक्ति से संपर्क साधकर काम कराने की कोशिश करते हैं. लोग सोचते हैं कि ऐसा करने से संघर्ष किए बिना समस्या का हल निकाल आएगा, लेकिन इससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो जाती है.

2. गॉसिपिंग यानी पीठ पीछे बुराई करना

दूसरे लोगों के खिलाफ गॉसिप करते हुए लोग कई बार अति कर देते हैं. किसी दूसरे की खराबी के बारे में बात करते हुए हम बहुत ही नीचे गिर जाते हैं. जब उस व्यक्ति को इसका पता चलता है, जो कहीं न कहीं से पता चल ही जाता है, तो वह बहुत आहत हो जाता है. हम भूल जाते हैं कि गासिंपिंग हमें हर बार ख़ासी निगेटिव व्यक्ति के तौर पर दर्शाती है. और, ये गारंटी से कहा जा सकता है.

3. अपने काम से नफ़रत

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कामकाजी दफ्तर में कोई भी शख्स एक बात कभी सुनना पसंद नहीं करता है. वो बात है ये शिकायत या घोषणा करने कि आप जो काम कर रहे हैं, उससे कितनी नफ़रत करते हैं. ऐसा करने से आपकी नाकारात्मक छवि तो बनती ही है, साथ में आप पूरी टीम का मनोबल गिराते हैं. बॉस ऐसे लोगों की पहचान तुरंत कर लेते हैं और उनकी जगह टीम का उत्साह बढ़ाने वाले कर्मचारी को रख लेते हैं.

4. तेज़ गंध वाला खाना

अगर आप समुद्री जहाज़ में काम नहीं करते तो फिर तेज़ गंध के खाने से आपके सहकर्मी परेशान हो सकते हैं. अगर दफ़्तर में खाना ले जाना हो तो इसका ध्यान रखें कि सहकर्मी इस पर एतराज़ न करें.

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5. झूठ बोलना

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कई बार झूठ बोलने की शुरुआत अच्छे उद्देश्य से होती है. लोग या तो खुद या फिर दूसरे को बचाने के लिए झूठ बोलते हैं. लेकिन झूठ की प्रकृति होती है कि वो तेजी से बढ़ता और फैलता है. जब सबको मालूम होता है कि आपने झूठ बोला था, तो फिर आप उसे वापस नहीं ले सकते.

क्लिंटन बूएल्टेर, संस्थापक हार्ड टू फिल डॉटकॉम

अगर आप मेरी गलतियों से कुछ सीख पाते हैं तो आप लकी हैं. क्योंकि अनुभव से सीख लेना कई बार पीड़ादायक होता है. मैंने उन 12 चीज़ों के बारे में एक पोस्ट लिखी जो मैंने बहुत मुश्किल से सीखीं.

मैंने बताया है कि नियोक्ता के तौर पर मुझसे क्या ग़लतियां हुईं और उन ग़लतियों को सुधारने में कैसे सालों लग गए.

मेरे अनुभव से आप ये अहम बातें सीख सकते हैं.

(पढ़ें- कम समय में ज़्यादा काम करने की 6 तरकीब)

1. दूसरों से खुलिए

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आप अपने समय के 80 फ़ीसदी हिस्से में यही सोचते हैं कि कोई दूसरा आपको किस तरह मूर्ख बनाएगा. इसे बंद कीजिए. संदेह करने और निराशावादी नज़रिया अपनाने से बचें और दूसरे लोगों के साथ खुलिए. आप जिन लोगों की मदद करना चाहते हो और जिन से मदद लेना चाहते हो, अपने इर्द गिर्द उन लोगों का नेटवर्क बनाएँ, उनके लिए उपलब्ध रहिए.

2. कैयुएल अप्रोच रखिए

कॉलेज पास होने के बाद आप समझने लगते हैं कि आपसे उम्मीद की जाएगी कि स्टाइलिश तरीके से लिखें, बात करें. शायद हम ये भी सोचते हैं कि कारपोरेट तौर-तरीके में भी ऐसा करना होता है.

लेकिन आप अपनी बातचीत, ईमेल और रोजमर्रा के जीवन में कैयुएल रहें, बेतकल्लुफ़ रहें. आप अपने दोस्त या घर वालों से कॉरपोरेट शैली में बात करते हैं? नहीं ना...आम तरीके से बात करते हैं और आपकों उनसे जवाब भी मिलता है. तो फिर, आप अपने ईमेल, संदेश, जवाब में कैयुएल टोन रखें. इससे लोगों से जुड़ना आसान होता है.

(पढ़ें- 40 साल के बाद नई शुरुआत के फ़ायदे)

3. वर्क स्टेशन से कुछ देर के लिए उठें

काम करते समय तनाव में आना या फिर निराश होना आम बात है. जब आपके साथ ऐसा होने लगे तो वर्क स्टेशन को छोड़ दीजिए. वहां बैठे रहने से आप हर मिनट आपका चिढ़चिढ़ापन बढ़ेगा. आपको बिग पिक्चर यानी पूरा प्लान या पूरी तस्वीर तब ही समझ में आएगी जब आप उस समय कर रहे काम से अलग होंगे या ब्रेक लेंगे.

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इसलिए काम छोड़ने का समय तय कीजिए और डेस्क छोड़ दीजिए. आप कहीं जाकर सुस्ताइए मत. इस समय का इस्तेमाल फ़ोकस्ड होकर, तनाव और निराशा के कारणों को नज़र डालने के लिए इस्तेमाल करें.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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