कुत्ते से बच्चों जैसा लगाव क्यों?

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मां और बच्चे का रिश्ता अटूट होता है. दोनों के बीच अपनेपन में दोनों की आंखों की भूमिका अहम होती है.

दरअसल, बच्चे की आंखों में देखने से मां के मस्तिष्क में मौजूद लव हार्मोन (ऑक्सीटोसिन) सक्रिय हो जाता है.

इससे मां-बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता मज़बूत होने लगता है, जो बच्चे की देखभाल और इंटरएक्टिव हाव भाव से और भी मज़बूत होता है.

ताज़ा अध्ययन से ज़ाहिर हुआ है कि इंसानों के अपने कुत्ते की आंखों में देखने से भी इंसानी मस्तिष्क में मौजूद ऑक्सीटोसिन सक्रिय होता है.

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जापानी शोधकर्ताओं की एक टीम ने अपने अध्ययन में पाया है कि कुत्ते और उनके मालिकों के बीच ऐसी बाॉन्डिंग होती है जैसी बॉन्डिंग मां और बच्चे के बीच होती है. यही वजह है कि इंसान महसूस करता है कि उसका पालतू कुत्ता उसके अपने घर का सदस्य है.

साइंस में छपी रिपोर्ट

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इस शोध के नतीजे साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक भेड़िए के साथ इंसानों की प्रतिक्रिया वैसी नहीं होती.

शोधकर्ताओं का ये भी मानना है कि इन दोनों प्रजाति के जानवरों का इंसानों के साथ रिश्ते में अंतर इसलिए नज़र आता है क्योंकि कुत्तों को पालतू बनाना संभव है.

अजाबू यूनिवर्सिटी, जापान के स्कूल ऑफ़ वेटर्नरी मेडिसीन के डॉ. माहियो नागासावा कहते हैं, "ये भी कहा जा सकता है कि कुत्ते इंसानो के साथ इसलिए सहजता से घुलमिल जाते हैं क्योंकि वे इंसानी व्यवहार और हावभाव को आसानी से सीख लेते हैं."

माहियो नागासावा के मुताबिक कुत्ते में मूल रूप से ये स्वभाव अपनी प्रजाति के लिए होता है लेकिन इंसान दूसरी प्रजाति (कुत्ते) के साथ भी ऐसा जुड़ाव महसूस करते हैं.

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इस अध्ययन के दौरान कुत्तों को उनके मालिकों के साथ 30 मिनट के लिए एक कमरे में रखा गया है.

इसमें आंखों में सीधे आंख डालने वाले संपर्क की समय सीमा के आधार पर कुत्ते को दो समूहों में बांटा गया- लंबे समय तक आंखों में आंखें डालने वाले और कम समय तक टिकटकी लगाकर देखने वाले.

कुत्तो पर भी हार्मोन का असर

जब कुत्ते अपने मालिक की आंखों में ताकते हैं तो इंसानों के मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है. आंखों में ताकने की समय सीमा ज्यादा होने पर ऑक्सीटोसिन का स्तर भी बढ़ा हुआ देखा जाता है.

दूसरे प्रयोग में कुछ कुत्तों की नाक पर ऑक्सीटोसिन का स्प्रे किया गया. इसके बाद उन्हें मालिक और दो अपरिचित लोगों के साथ एक कमरे में 30 मिनट तक के लिए रखा गया. इस दौरान तीनों इंसानों में कोई बात नहीं हुई.

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इस प्रयोग में देखा गया है कि मादा कुत्ते अपने मालिकों की आंखों में ज्यादा देर तक ताकते हैं और इनके मालिकों के मस्तिष्क में लव हार्मोन ज्यादा निकलता है. नर कुत्तों पर कम प्रभाव के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑक्सीटोसिन का असर लिंग पर निर्भर करता है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक कुत्ते और इंसानों के बीच ख़ास रिश्ता ऑक्सीटोसिन से प्रभावित होता है.

हालांकि जब इसी प्रयोग को भेड़ियों पर अपनाया गया तो भेड़ियों पर इसका कोई असर नहीं देखा गया.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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