नेपाल में रह-रह कर भूकंप के झटके, 2400 मरे

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नेपाल में भूकंप में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. शनिवार के भूकंप और रविवार दोपहर के आफ़टर शॉक के बाद भी रह-रह कर भूकंप के झटके आ रहे हैं और सबसे ताज़ा झटका देर रात भारतीय समयानुसार सवा दस बजे आया.

नेपाल के अधिकांश हिस्साें में बारिश के चलते राहत और बचाव कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

नेपाल के गृह मंत्रालय ने 2400 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि हज़ारों की संख्या में लोग घायल हैं.

बीबीसी हिंदी संवाददाता दिव्या आर्या के मुताबिक बारिश के चलते इंटरनेट और फ़ोन सेवाएं प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में दिक़्क़तें आ रही हैं. उन्होंने बताया है कि वहाँ रविवार देर रात तक भी रह-रह कर भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मृतकों में पांच भारतीय हैं, जबकि घायलों की संख्या 6000 के पार पहुंच चुकी है.

नेपाल में कई जगहों पर मृतकों का सामूहिक अंतिम संस्कार भी किया जा रहा है. बारिश से इसके प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

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इस भूकंप से भारत में 66 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है. वहीं तिब्बत में भी 18 लोगों के मरने की ख़बर है.

बारिश का पूर्वानुमान

भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटे में नेपाल में भारी बरसात की आशंका बनी हुई है. बारिश से बचाव कार्य में देरी होने पर हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.

भारत के मिनिस्ट्री ऑफ़ अर्थ साइंस के मुताबिक पूर्वी नेपाल में अगले दो दिनों तक यानी 27 और 28 अप्रैल के बीच काफी बारिश हो सकती है.

वहीं माउंट एवरेस्ट में भी हिमस्खलन से 17 लोगों के मरने की ख़बर है.

रविवार को नेपाल, भारत और बांग्लादेश में आए भूकंप के झटकों के बाद, माउंट एवरेस्ट पर दोबारा हिमस्खलन हुआ है. वहाँ अनेक पर्वतारोही फंसे हुए हैं.

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इसे बीते 80 साल में सबसे भयंकर भूकंप बताया जा रहा है.

80 साल का सबसे भयंकर भूकंप

रविवार को आए भूकंप का केंद्र नेपाल की राजधानी काठमांडू से 60 किलोमीटर पूर्व था. रिएक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.7 मापी गई.

रायटर न्यूज़ एजेंसी ने एक भारतीय पर्वतारोही से फ़ोन पर बात की जिसके मुताबिक आज भी माउंट एवरेस्ट में हिमस्खलन हुआ है.

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करते हुए फंसे विदेशी पर्वतारोहियों और उनके नेपाली गाइड्स ने सोशल मीडिया के ज़रिए आपात संदेश भेजे हैं.

नेपाल के पर्वतारोहण विभाग के अधिकारी ज्ञानेंद्र श्रेष्ठ का कहना है कि 10 मरे हुए लोगों के शव निकाले जा चुके हैं और कई पर्वतारोही घायल हैं या लापता.

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गूगल के मुताबिक उसके एक कर्मचारी डेन फ्रेडिनबर्ग की भी माउंट एवरेस्ट पर मौत हो गई है.

उधर शनिवार को आए विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल में लाखों लोगों ने रात खुले आसमान के नीचे बिताई.

इस भूकंप से राजधानी काठमांडू समेत नेपाल के कई इलाक़ों में भीषण तबाही हुई है.

भीषण तबाही का मंजर

काठमांडू के नागरिकों का कहना है कि और झटके आने के डर से वे अपने घरों में नहीं लौट पा रहे हैं.

नेपाल में भूकंप से हताहतों की संख्या बढ़ सकती है, भूकंप के केंद्रबिंदू के पास से अभी भी बेहद कम जानकारी ही सामने आ पाई है. वहां व्यापक नुक़सान हुआ है.

भूकंप में धराशायी हुई इमारतों से अभी भी शव निकाले जा रहे हैं.

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उधर नेपाल के तमाम अस्पताल घायलों से भर गए हैं. अकेले काठमांडू में 700 लोगों के मरने की सूचना है.

मदद को बढ़े हाथ

भारत, अमरीका, चीन, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ इस आपदा के वक़्त नेपाल की मदद कर रहे हैं.

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भारत से 40 सदस्यों का एक राहत और बचाव दल नेपाल पहुँच चुका है. भारत के कई विमान राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं. साथ ही एक मोबाइल अस्पताल भी शुरू किया गया है.

चीन ने भी 62 सदस्यों का राहत और बचाव दल नेपाल भेजा है.

रेडक्रॉस, ओक्सफ़ैम, डॉक्टर्स बिदाउट बॉर्डर्स और क्रिश्चियन एड समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अपनी टीमें भेज रही हैं.

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