नेपाल: 'जहां ना पहुंची सरकार, वहां पहुंचा बीबीसी'

नेपाल का गांव

नेपाल के भूकंप में वो गांव सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं जहां सड़क नहीं जाती है.

राजधानी काठमांडू से दूर इन छोटे गांवों में कच्चे घर हैं जिन पर भूकंप और उसके बाद के झटकों ने बहुत बुरा असर हुआ है.

पुलिस और प्रशासन, ख़तरे के चलते अभी इन इलाक़ों तक नहीं पहुंचे हैं. विशंभरा गांव भी इनमें से एक हैं. बीबीसी की टीम वहां पैदल पहाड़ पर चढ़कर पहुंची.

25 घरों के इस गांव में सभी इमारतें टूट गई हैं या उन्हें ज़बरदस्त हानि हुई है. दीवारों में इतनी दरारें हैं कि घर के अंदर जाना ख़तरे से खाली नहीं है.

Image caption विशंभरा के स्थानीय निवासी रवि

डरे हुए हैं गांव वाले

भूकंप का एक और तीव्र झटका आने से ये घर तबाह हो सकते हैं. इसलिए गांव वाले इन घरों के अंदर नहीं जा रहे.

गांव में रहने वाले रवि का घर भी एकदम टूटा हुआ है. वो कहते हैं कि बस उतना ही बचा पाए जो कपड़े उनके शरीर पर हैं.

रवि जैसा ही हाल बाक़ी गांववालों का है. घरों की हालत इतनी ख़राब है कि कुछ भी निकाल पाना संभव नहीं.

रवि कहते हैं, "मैं बीबीसी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. सरकार तो यहां तक पहुंची नहीं, बीबीसी ने ही भूकंप के बाद हमारी सुध ली है."

68 साल के राम प्रसाद भूकंप के मंज़र को याद कर सिहर जाते हैं.

कहते हैं कि वो इतना घबरा गए थे कि समझ में नहीं आ रहा था क्या करें. और अब भी अपना घर देखकर वैसी ही उलझन होती है.

गांव के पास के खेतों में टेंट लगाकर बैठे परिवारों में बस ये बच्चे ही हैं जो मुस्कुराते हैं.

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बताते हैं कि भूकंप के बाद से घर के अंदर नहीं गए. फिर उतना ही मुस्कुराते हुए कहते हैं कि अब झटके आते हैं तो डर लगता है.

जोखिम

भूकंप के दिन खेतों में काम करने के लिए निकलने की वजह से इस गांव के लोगों को कोई चोटें नहीं आईं.

पर भूकंप के झटके और ख़तरे के चलते अब वो ख़ुद अपने घरों में जाने का जोखिम नहीं मोल रहे.

इन लोगों के मुताबिक़ सरकार ये पुलिस का कोई नुमाइंदा उनके पास आज तक नहीं पहुंचा है.

बिजली-पानी और भोजन के लिए परेशान इन लोगों को उम्मीद है कि मीडिया की नज़र पड़ने के बाद सरकार भी उनकी सुध लेगी.

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