इंटरव्यू के दौरान घबराने की क्या ज़रूरत?

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कई अच्छे पेशेवर नापसंद नौकरी में ही इसलिए बने रहते हैं क्योंकि उन्हें इंटरव्यू से डर लगता है...इंटरव्यू के एक या दो बुरे अनुभवों को वो भुला नहीं पाते.

संभव है कि किसी इंटरव्यू में पसीना छूट जाए, आप हकलाने लगें, ख़ुद को फोकस न कर पाए और बेहतरीन नौकरी का इंटरव्यू हाथ से निकल जाए.

लेकिन इसका आसान हल है, बशर्ते कि आप सोच-समझकर और दृढ़ निश्चय से, हौसला करके इंटरव्यू की तैयारी करें और फिर उसे अंजाम दें.

न्यूयार्क की पैमिला स्किलिंग्स इंटरव्यू को बेहतर तरीके से देने की कोचिंग देती हैं. इंटरव्यू कैसे दें, खुद को कैसे प्रिजेंट करें...वो जानती हैं कि कई पेशेवर सालों तक इंटरव्यू से डरते रहते हैं.

हाल ही में, पैमिला ने ऐसे एक पेशेवर को सलाह दी जो इंटरव्यू से डरने की वजह से एक साल तक घुट-घुटकर वही पुरानी नौकरी करता रहा जो उसे बेहद नापसंद थी.

तो डर किस बात का है?

पैमिला ने जिस पेशेवर की बात की, वो बचपन से हकलाते थे. लेकिन समय के साथ उन्होंने अपने हकलाने पर काबू पा लिया था.

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ईमेल के ज़रिए पैमिला ने अपने क्लाइंट के बारे में लिखा- "कुछ इंटरव्यू के दौरान उनका हकलाना फिर शुरू हो गया. इसके बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे कि जब वे नर्वस होते हैं तो उनका हकलाना शुरू हो जात है. इस डर के चलते वे तनाव में रहने लगे."

किसी को कई वजहों से तनाव हो सकता है. चाहे वो उच्चारण की मुश्किल हो या फिर इंटरव्यू का ख़राब तरीके से बढ़ना या फिर इंट्रोवर्ट पर्सनैलिटी (अंतरमुखी व्यक्तित्व). इन सबका परिणाम एक ही होता है, किसी महत्वपूर्ण मुलाकात में तनावग्रस्त होने का डर मन में बस जाता है.

काबिलियत साबित करने की चुनौती

तो फिर करना क्या चाहिए? अपनी घबराहट पर कैसे काबू पाया जा सकता है. किसी इंटरव्यू में खुद को कैसे काबिल और भरोसेमंद साबित करें?

पैमिला ने अपने इस क्लाइंट को सुझाव दिया कि वो सवालों के जवाब पर काम करें. इंटरव्यू से पहले पूरी तैयारी करें ताकि आत्मविश्वास आए.

पैमिला ने बताया, "मैंने उसे उसके बोलने के स्टाइल के बारे में बताया और उसे खुद ये महसूस हुआ कि कुछ समय के बाद हकलाने की कोई समस्या आड़े नहीं आती. आप फोकस्ड होकर ट्रैक पर वापस लौट सकते हैं और अच्छे जवाब दे सकते हैं."

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इस सलाह का नतीजा ये हुआ कि उस शख़्स को बेहद जल्दी ही अपनी पसंद की और बहेतर नौकरी मिल गई.

जहाँ ख़ुद को प्रमोट करना आसान नहीं

पेरिस की अमेरीकन यूनिवर्सिटी में करियर डेवलपमेंट की डायरेक्टर डेनियल सैवेज दुनिया भर के छात्रों और पूर्व छात्रों के बीच काम करती हैं.

डेनियल कहती हैं कि कुछ छात्रों और कल्चर्स में 'खुद को बेचने' या खुद के बारे में अच्छा बताने को अच्छा नहीं माना जाता. ऐसी सूरत में जब नौकरी के लिए इंटरव्यू की बात आती है तो इन्हें नुकसान होता है.

सैवेज नई उम्र के लड़कों को पुराने पेशेवरों के साथ एक मंच पर लाकर खुद के प्रमोशन से जुड़ी बारीकियों के बारे में बताती हैं.

सैवेज बताती हैं, "उम्मीदवार के तौर पर आपको ये मालूम होना चाहिए कि नियोक्ता की जरूरत क्या है, वो चाहता क्या है? इसे जानने के बाद ही आप अपने अनुभव पर नज़र डालें और बताएँ कि कैसे नियोक्ता की ज़रूरत वाली परिस्थितयों में अपनी क्षमता के इस्तेमाल किया है."

सैवेज ने ईमेल के ज़रिए बताया, "इससे आपके इंटरव्यू का फोकस बदल सकता है और आपको अपने सीवी के बारे में दोहराने की जरूरत नहीं होगी. आप वही उम्मीदवार बन जाएँगे जिसकी उन्हें जरूरत हो."

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सैवेज के मुताबिक समस्या के हल के बारे में बताते वक्त ही आप उत्साहित महसूस करेंगे. सैवेज ने कहा, "आपका अंदाज़ प्रभावी होगा. आपको लगेगा कि आप खुद को प्रमोट नहीं कर रहे हैं बल्कि अपने किसी साथी से मित्रवत बात कर रहे हैं."

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पूर्व तैयारी बेहद जरूरी

ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न स्थित डीकन यूनिवर्सिटी की एचआर मैनेजर जोनाह ग्रिफ़िन 'इंटरव्यू फोबिया' से ग्रसित छात्रों-पेशेवरों के लिए कई टिप्स बताती हैं.

ग्रिफिन के मुताबिक इंटरव्यू की पूर्व तैयारी घर के किसी सदस्या या फिर दोस्त के साथ करनी चाहिए. इंटरव्यू के दौरान पहनावे की भूमिका भी अहम होती है.

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ग्रिफिन बताती हैं, "आप अपने बारे में क्या सोचते हैं, इससे आपके अपीयरेंस में बदलाव देखने को मिलता है. आप खुद के बारे में अच्छा महसूस करेंगे तो आप आश्वस्त भी नज़र आएंगे."

ग्रिफिन को अपने छात्रों को धीमी और गहरी सांस लेने की सलाह भी देती है.

उन्होंने कहा, "आँखें बंदकर कल्पना कीजिए कि आपका इंटरव्यू अच्छा जा रहा है. अपनी भूमिका, कंपनी और अपनी क्षमताओं के बारे में जानकारी रखें. जितना आप जानते हैं, उतनी ही सहजता से आप पूछे गए सवालों का जवाब दे सकते हैं."

पूछी गई बात पर ध्यान केंद्रित करें

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इंटरव्यू देने वाले कई लोगों को लगता है कि इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति उन्हें नीचा दिखाने या फिर जानबूझकर फ़ेल करने के लिए बैठा हुआ है.

अमरीका में वाशिंगटन डीसी स्थित करियर कंसल्टिंग फर्म ओनली कनेक्ट कंसल्टिंग की सीईओ और जल्द प्रकाशित होने वाली किताब 'सिंगल टास्किंग' की लेखिका डेवोरा जैक इसे सही नहीं मानतीं.

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डेवोरा जैक कहती हैं, "कोई इंटरव्यू लेने वाला ये नहीं सोचकर बैठता कि 'ये उम्मीदवार मेरे समय को बर्बाद करने आ रहा है या फिर बिलकुल लायक नहीं है.'

इंटरव्यू लेने वाले के दिमाग में तो ये होता है कि ये आदमी समस्या का हल दे सकता है, ये 'फैंटास्टिक' होगा.

यानी, नौकरी के लिए इंटरव्यू देने वाले शख़्स और इंटरव्यू लेने वाले लोग एक ही बात सोच रहे होते हैं. इसका फ़ायदा उठाना चाहिए.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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