वो मर गए बच्चों को गोद लेती है

बरनार्डो गैलार्डो इमेज कॉपीरइट

चिली में एक महिला कूड़े में फेंक दिए गए मृत नवजातों को अपना रही हैं और उनका अंतिम संस्कार कर रही हैं.

बारह साल से भी लंबे समय से इस काम में लगी बरनार्डो गैलार्डो को इसके लिए लंबा और अनूठा संघर्ष करना पड़ा है.

उनकी कहानी पर बनी फ़िल्म पुरस्कार हासिल कर चुकी है लेकिन गैलार्डो की दुखदायी यात्रा जारी है.

पढ़िए पूरी कहानी

बारह साल पहले चिली की बरनार्डो गैलार्डो ने एक स्थानीय अखबार में एक हेडलाइन पढ़ी जिसने उनकी ज़िंदगी बदल दी. एक बच्चे को फेंक दिए जाने की ख़बर पढ़ने के बाद उन्होंने उसकी मदद करने का फ़ैसला किया.

हेडलाइन में था, "उन्होंने नवजात हत्या की और उसे कूड़े के ढेर पर फेंक दिया."

वह नन्हीं बच्ची चार अप्रैल, 2003 को पाई गई थी. उसके शरीर को कूड़े के काले थैले में डालकर कूड़ेदान में फेंक दिया गया था. बाद में वो थैला वहां से डंपयार्ड चला गया (शहर की उस जगह जहां कूड़े के अंबार होते हैं.)

चिली के दक्षिणवर्ती कस्बे पुएर्टो मॉन्ट में कूड़ा बीनने वाले लोगों में से एक को वह शव मिला.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

गैलार्डो यह ख़बर पढ़कर दहल गईं. उन्होंने तुरंत उस बच्चे का सम्मान से अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला किया. वह उस वक्त एक बच्चे को गोद ले रही थीं और उन्हें महसूस हुआ कि वह उनका बच्चा भी हो सकता है.

वह कहती हैं, "अगर आपको एक जिंदा बच्चा मिलता है तो आप उसे खाना खिलाते हैं और कंबल ओढ़ाकर लिटाते हैं. लेकिन अगर आपका बच्चा मृत पैदा होता है तो आप उसके लिए ताबूत का इंतज़ाम करते हैं और सलीके से अंतिम संस्कार करते हैं."

'सौभाग्यशाली थी'

लेकिन वह यह भी जानती थीं कि कुछ महिलाएं अपने बच्चों को अपने पास रखना नहीं चाहतीं हैं. कई तो उनसे लगाव भी महसूस नहीं करतीं.

वह कहती हैं, "बहुत सी युवतियां है जो बलात्कार या परिवार में ही व्याभिचार की शिकार होती हैं. उनके पिता या सौतेले पिता ही उनके साथ बलात्कार करते हैं और वह इतनी डरी हुई होती हैं कि कुछ बोल भी नहीं पातीं. अक्सर बलात्कारी वही व्यक्ति होता है जो परिवार को पाल रहा होता है."

गैलार्डो जब 16 साल की थीं तब उनके पड़ोस में रहने वाले एक आदमी ने उनका बलात्कार किया था. वह गर्भवती हो गईं और एक बच्ची को जन्म दिया, जिसे उन्होंने प्यार से पाला और बड़ा किया.

वह बताती हैं, "जब मेरा बलात्कार किया गया तो मैं सौभाग्यशाली थी कि अपने दोस्तों से मिले प्यार और समर्थन से मैं उस दुख से निकल पाई. अगर मुझे मेरी हालत पर अकेला छोड़ दिया जाता तो शायद मैं भी ख़ुद को उन लोगों की तरह ही असहाय महसूस करती."

बच्चों को छोड़ने की दूसरी वजह ग़रीबी भी है. गैलार्डो कहती हैं, "सीधी सी बात है कि महिलाएं एक और बच्चे को खिलाने की स्थिति में नहीं होतीं."

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

यह अनुमान लगाना आसान नहीं कि चिली में कितने बच्चों को हर साल यूं छोड़ दिया जाता है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हर साल कम से कम 10 ऐसे शव हासिल होते हैं. लेकिन असली संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है. ज़्यादातर कूड़ाघरों में आम लोगों का दाख़िला नहीं होता है इसलिए हो सकता है कि उनमें और भी शव मौजूद होते हों.

पुएर्टो मोंट में उस बच्ची के लिए कुछ करने की गैलार्डो की इच्छा से एक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हो गई.

जज का संदेह

उन्होंने बच्ची का नाम, सुबह की रोमन देवी, ऑरोरा रखने का फ़ैसला किया.

लेकिन ऑरोरा के शरीर को दफ़न करने के लिए हासिल करना, आसान नहीं था. चिली में जिस लाश की मांग परिजन नहीं करते उसे इंसानी अवशेष माना जाता है और शल्य चिकित्सा के अन्य अवशेषों के साथ नष्ट कर दिया जाता है.

गैलार्डो ने तेजी के साथ काम किया ताकि इसे रोका जा सके.

डॉक्टरों को यह साबित करना था कि बच्ची जिंदा पैदा हुई थी ताकि उसे एक इंसान के रूप में दर्ज किया जा सके जिससे उसका समुचित अंतिम संस्कार हो सके - इसके लिए उन्हें ऑरोरा के शरीर का परीक्षण करना था.

अक्सर डॉक्टर कह देते हैं कि बच्चा जन्म के समय ही मर गया क्योंकि उन्हें कमज़ोर मां को बचाना था.

चिली में गर्भपात गैरकानूनी है और अगर कोई महिला अपने बच्चे को छोड़ते हुए पकड़ी जाती है तो उसे पांच साल तक जेल हो सकती है.

ऑरोरा को दफ़न करन के लिए गैलार्डो को उसे गोद लेना था, चाहे बच्ची मर ही क्यों न गई हो.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

शुरुआत में इस मामले को देख रहे जज को गैलार्डो को लेकर कुछ संदेह थे. उन्होंने सोचा कि वही ऑरोरा को जन्म देने वाली मां हैं और वह उसका शव इसलिए लेना चाहती हैं क्योंकि उसे फेंक देने पर उन्हें अपराधबोध हो रहा है.

एक बार वह उन्हें अपनी सदिच्छा पर विश्वास करवाने में कामयाब हो पाईं तो जज ने कहा कि उनके सामने पहली बार ऐसा मामला अनोखा मामला आया है.

हालांकि उन्होंने माना कि वह सही काम कर रही थीं.

अंतिम संस्कार

मेडिकल जांच और काग़ज़ी कार्रवाई होने में कई महीने लग गए लेकिन अंततः गैलार्डो को ऑरोरा का शरीर सलीके से अंतिम संस्कार करने के लिए मिल ही गया.

अंतिम संस्कार में 500 लोग शामिल हुए. वे लोग ऑरोरा के मामले की प्रगति को स्थानीय अख़बार में पढ़ रहे थे, उसी में जिसमें यह पहली बार प्रकाशित हुई थी.

गैलार्डो कहती हैं कि माहौल एक बड़े जन्मदिन समारोह जैसा था - ऑरोरा की ज़िंदगी का जश्न. वहां बच्चे थे, डॉक्टर थे, नर्सें थीं, स्थानीय पत्रकार थे, देहात से आए लोग थे और वह जज थे. उन्होंने ऑरोरा को लेकर गाने गाए, कविताएं पढ़ीं और संगीत बजाया.

गैलार्डो के लिए यह महत्वपूर्ण था कि इतने सारे लोग इस सार्वजनिक कार्यक्रम आए.

उन्होंने कहा, "मैं चाहती हूं कि हमारे समाज के लोग सोचें कि क्या हो रहा है. क्यों बच्चों को मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है, जबकि कम से कम चार परिवार तैयार हैं और इंतज़ार कर रहे हैं कि वह ऐसे बच्चों को गोद ले लें."

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

"बच्चों को मारने के बजाय उन्हें गोद दे दीजिए!"

अंतिम संस्कार के बाद उसी दिन एक और लाश, एक बच्चे की, फेंकी हुई पाई गई. गैलार्डो परेशान थीं और उन्हें यकीन नहीं आ रहा था कि उनकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई है.

लेकिन तब तक वह वहां जानी-मानी शख्सियत बन चुकी थीं. लोगों ने उन्हें कहा कि उन्होंने ऑरोरा के लिए सही किया है और फिर पूछा कि अब वह इस बच्चे के लिए क्या करेंगी?

अंततः उन्होंने फ़ैसला किया कि सारे पुएर्टो मोंटे के कूड़ाघरों में पोस्टर लगाएंगी, "अपने बच्चों को कूड़े में मत फैंको". इसके साथ ही उन्हें याद दिलाया जाएगा कि हाल ही में दो बच्चों ऑरोसा और फिर मैनुएल को फेंक दिया गया है.

तीन और बच्चे...

उन्हें लगता है कि घरेलू शोषण के बारे में बेहतर शिक्षा और परिवार नियोजन के बारे में ज़्यादा सलाह मिलने से माहौल बदल रहा है.

लेकिन गैलार्डो को लगता है कि चिली में अब भी कानून की शिकार गरीब और शोषित महिलाएं ही बनती हैं.

इत्तेफ़ाकन उनके परिवार का, छोड़ दिए बच्चों से एक और संबंध पता चला. उनकी परदादी इटली के एक आश्रम की सीढ़ियों पर छोड़ी गई मिली थीं.

गैलार्डो चाहती हैं कि चिली में जो महिलाएं अपने बच्चों की देखभाल नहीं कर रही हैं वह उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ सकें. वह अस्पतालों में इसके लिए एक ख़ास जगह का सुझाव देती हैं.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

ऑरोरा के अंतिम संस्कार के बाद के 12 सालों में गैलार्डो ने तीन और बच्चों को गोद लिया और दफ़नाया है - मैनुएल, विक्टर और क्रिस्टोबाल.

इस समय वह एक और बच्ची, मार्गरिटा, के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने में लगी हुई हैं. वह चाहती हैं कि वह उन्हें, "सम्मान दें और एक ऐसा स्थान दें जहां वह चिरनिद्रा में सो सकें."

गैलार्डो की कहानी से चिली के निर्देशक रोड्रिगो सेपुलवेदा को फ़िल्म बनाने की प्रेरणा मिली. ऑरोरा नाम की यह पुरस्कृत फ़िल्म इस समय पूरे चिली और दुनिया भर में फ़िल्म फ़ेस्टिवलों में दिखाई जा रही है.

गैलार्डो अक्सर उन बच्चों की कब्रों पर जाती हैं जिन्हें उन्होंने दफ़नाया है और कई बार उन्होंने देखा है कि अन्य लोग भी उनपर फूल चढ़ा गए हैं.

वह सोचती हैं कि इनमें से कुछ उनकी जन्म देने वाली मांओं ने चढ़ाए होंगे और यह सोचकर उन्हें राहत मिलती है कि वह अपने बच्चों को चिरनिद्रा में लीन देख सकती हैं और उनके लिए शोक कर पा रही हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार