नेपालः भूकम्प के बाद ख़राब मौसम की मार

  • 30 अप्रैल 2015
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Image caption गोरखा जिले के उईया गांव में मदद की इंतज़ार में.

नेपाल के प्रभावित पंद्रह ज़िलों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम तेज़ कर दिया गया है.

लेकिन दूर दराज़ के इलाक़े में राहत पहुंचाने में ख़राब मौसम बाधा बन रहा है.

नेपाल में अब भी जूझ रही है ज़िंदगी

नेपाल के नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री सुनील थापा ने बीबीसी को बाताया कि बिजली और दूरसंचार व्यवस्था धीर-धीरे पटरी पर लौट रही है.

नेपाल में राहत सामग्री के वितरण के निगरानी की ज़िम्मेदारी इसी विभाग की है.

बारिश से बाधा

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अभी तक सारा ध्यान राजधानी काठमांडू पर था, क्योंकि यहाँ भूकंप का असर बहुत ज़्यादा था.

प्रभावित ज़िलों में खाद्य और अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही है, लेकिन इसमें सबसे ज़्यादा मौसम चुनौती बन रहा है.

नेपाल के उत्तरी हिस्से में हिमालय के पास के इलाक़ों में बारिश से मुश्किल आ रही है.

लेकिन इन सभी ज़िलों में चावल, नमक, नूडल्स और तिरपाल मुहैया कराने की कोशिश हो रही है.

दूर दराज़ के इलाक़े में स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल कर राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.

काठमांडू एयरपोर्ट के ठीक से न काम करने की वजह से बाहरी देशों से आने वाली बहुत सारी राहत सामग्री पहुंचने में दिक्कत आ रही है.

गाँव गाँव पहुंचने की कोशिश

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Image caption डाडिंग में बारिश में राहत सामग्री का इंतज़ार करते लोग.

लेकिन जो सामग्री पहुंच रही है उसे सड़क के रास्ते प्रभावित ज़िलों के मुख्यालयों तक और वहाँ से हेलीकॉप्टर के मार्फ़त गाँव गाँव तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है.

हालांकि कुछ इलाक़ों को छोड़ दें तो बिजली की आपूर्ति को लगभग दुरुस्त कर लिया गया है.

दूरसंचार सेवाएं 80 फ़ीसदी तक पुरानी स्थिति में लौट आई हैं.

राष्ट्रपति भवन जैसी पुरानी इमारतों में दरार आ जाने से उन्हें खाली करा लिया गया है और जाँच पड़ताल के बाद ही उन्हें इस्तेमाल किया जाएगा.

(नेपाल के मंत्री सुनील थापा से बीबीसी संवाददाता समीरात्मज मिश्र की हुई बातचीत के आधार पर)

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