नेपालः बरसों लग जाएंगे लोगों को बसाने में

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नेपाल में भूकंप से अब तक 5,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं.

भारत समेत दुनिया के कई देश नेपाल को राहत सामग्री भेज रहे हैं और बचाव कार्य में सहायता कर रहे हैं.

लेकिन ऐसी शिकायतें भी मिल रही हैं कि प्रभावितों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है.

बीबीसी हिंदी संवाददाता विनीत खरे ने नेपाल के वित्त मंत्री राम शरण महत से बात कर स्थिति को समझने की कोशिश की.

कितना नुक़सान?

भूकंप से हुए नुक़सान का अनुमान लगा पाना अभी मुश्किल है. हमारी जीडीपी गिरी है और अभी कई फ़ीसदी ज़्यादा गिरेगी. राष्ट्रीय आय को बहुत बड़ा धक्का लगा है.

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अभी तो राहत और बचाव कार्य चल रहा है लेकिन जब हम पुनर्निर्माण और पुनर्वास के चरण में पहुंचेंगे तब बहुत सारे संसाधनों की ज़रूरत पड़ेगी और उसमें समय लगेगा.

इसके लिए सही आंकड़े देना अभी संभव नहीं होगा इसमें दसियों अरब अमरीकी डॉलर लग सकते हैं. लाखों लोगों के घरों को बनाना उन्हें फिर से बसाना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है इसमें बरसों लगेंगे.

क्या सहायता पहुंच नहीं रही?

यह जो कहा जा रहा है, वह ग़लत है. अगर सहायता सामग्री पहुंच नहीं पा रही तो वह कहां है. हर रोज़ कई जहाज़ राहत सामग्री लेकर उड़ान भर रहे हैं. लोगों तक सामान पहुंचाया जा रहा है.

भूकंप को आए तीन दिन हो चुके हैं. सहायता सामग्री तो सोमवार से आनी शुरू हुई है, इससे पहले आंतरिक साधनों से ही सहायता सामग्री दी जा रही थी, जो अब भी जारी है.

लेकिन आपदा बहुत बड़े पैमाने पर आई है, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, सुदूर इलाकों में बेघर-बार हो गए हैं- वहां तक, सब तक राहत पहुंचाना आसान नहीं है.

सुदूर इलाकों में राहत?

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सूदूरवर्ती इलाकों में अभी बचाव कार्य किया जा रहा है. जो लोग बेघर हैं, घायल हैं उन्हें निकाला जा रहा है, अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. बचाव कार्य में लगे वाहन राहत सामग्री- जैसे चावल, ड्राई फ्रूट्स, भी लेकर जा रहे हैं.

समस्या यह है कि लाखों लोग घर-बार विहीन हो गए हैं. ऐसे में बारिश हो रही है और लोगों के पास छत नहीं है. वहां टेंटों की आवश्यकता है, तिरपाल की आश्यकता है और वह भी अरबों की संख्या में.

अब यह सामान तुरंत तो जुटाया नहीं जा सकता. विदेश से आने वाली राहत सामग्री सीमित संख्या में होती है लेकिन ज़रूरत असीमित है.

इसलिए आपात स्थिति की तरह हम इसे जुटा भी रहे हैं और भारत जैसे मित्र राष्ट्रों को आग्रह भी कर रहे हैं कि आपात स्थिति की तरह जितना जल्दी हो सके लाया जाए.

इसलिए सबको राहत पहुंचने में कुछ दिन लगेंगे. कुछ राहत पहुंची है, कुछ पहुंच रही है.

तुरंत क्या-क्या चाहिए?

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अभी हमें तुरंत लाखों की संख्या में टेंट की ज़रूरत है, तिरपाल की ज़रूरत है, अस्थायी निवास की ज़रूरत है क्योंकि लोग घर-बार विहीन हो गए हैं.

दवाओं की ज़रूरत है, लोगों के शरीर के अंग कट गए हैं- उन्हें इंप्लांट की ज़रूरत है, खाद्यान्न की ज़रूरत है, ड्राई फ्रूट्स की ज़रूरत है और सबसे ज़्यादा टेंट की ज़रूरत है.

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