पाँच दिन बाद मलबे से निकाले गए दो लोग

  • 30 अप्रैल 2015
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नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के पाँच दिन बाद बड़े आश्चर्यजनक ढंग से राजधानी काठमांडू में एक महिला और एक किशोर को ज़िंदा बचा लिया गया है.

बताया जा रहा है कि मलबे के भीतर सांस लेने की गुंजाइश बन जाने के कारण इन दोनों की जान बच गई.

तीन लाशों के बीच फंसी थीं कृष्णा

कृष्णा कुमारी खड़का काठमांडू में एक होस्टल में काम करती थी और भूकंप के वक्त होस्टल के निचले हिस्से में थी.

बिल्डिंग के गिरने से कृष्णा और अन्य तीन लोग मलबे में दब गए. इनमें से एक कृष्णा के रिश्तदार थे.

कृष्णा के ऊपर से एक शव को निकलने का बाद नॉर्वे, इसराइल और फ्रांस के बचाव दल ने इन्हें मलबे से बाहर निकाला.

आंख झपकाते बाहर आए पेम्बा लामा

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भूकंप के पांच दिन बाद 15 साल के पेम्बा लामा को मलबे से निकाला गया. उन्होंने कपड़ों से टपकता पानी और मलबे में ही मिले दो मक्खन के पैकेट खा कर जान बचाई.

उन्हें बाद में इसराइल बचाव दल संचालिक फील्ड अस्पताल ले जाया गया.

उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए बताया "वहां मलबे में औऱ भी कई लोग दबे हुए थे. वे चिल्ला रहे थे."

जारी हैं बचाव कार्य

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Image caption नेपाल में बिल्डिंग के मलबे से एक 4 महीने के सोनित अवाल ज़िंदा निकाला गया था.

इधर राहत और बचाव कार्य की धीमी गति के कारण नेपाल के ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ रहा है.

भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए कई गांवों में तो अभी तक कोई सहायता और राहत सामग्री नहीं पहुंची है. भूकंप के केंद्र के आस पास बसे कई गांव के लोग अभी भी पानी, भोजन और आवास की कमी से जूझ रहे हैं.

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अधिकारियों के अनुसार भूकंप के कारण नेपाल में अब तक 5500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 11000 लोग घायल हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इनमें से कई गांवों तक पहुंचने में अभी पांच दिन और लगेगें.

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