'...तो पूरा स्कूल कब्रिस्तान में बदल जाता'

  • 4 मई 2015
सुलोचना, नेपाल
Image caption सुलोचना भूकंप के दिन को याद कर भावुक हो जाती हैं.

एक टूटी-फूटी सफ़ेद रंग की इमारत के सामने कुछ बच्चे काग़ज़ बटोर रहे हैं.

काठमांडू से चार घंटे की दूरी पर स्थित इस इमारत के सामने एक हफ़्ते पहले बच्चों के कहकहे गूंजते थे और स्कूल की घंटियां बजती थीं.

बिखरे पड़े कागज़ों में कई बच्चों के पहचान पत्र भी हैं जिसमें से एक रमेश गुरुंग का कार्ड हमें पड़ा मिला.

पूछने पर पता चला कि उनका परिवार अब शहर छोड़ कर जा चुका है.

काठमांडू से चार घंटे की दूरी पर है सिन्धुपाल चौक ज़िला, जिसके प्रमुख शहर चौतारा और इसकी स्कूली इमारत का दृश्य में पेश कर रहा हूँ.

मातम सा माहौल

भूकंप के बाद से शहर में मातम सा माहौल है क्योंकि मलबों में से कम से कम 200 शव निकाले जा चुके हैं.

निवासी अपने घरों से बाहर रह रहे हैं क्योंकि अधिकाँश इमारतें गिर चुकी हैं और जो बच गईं हैं वे टेढ़ी हो चुकी हैं.

सुनसान गलियों से होकर गुज़रने में डर लगता है क्योंकि बिजली के तार और खम्भे सड़क की ओर झुक गए हैं.

सुलोचना नेपाल शहर के सेकंडरी स्कूल में टीचर हैं और भूकंप के दिन को याद कर भावुक हो जाती हैं.

वो बताती हैं, "मेरे स्कूल में 1,000 बच्चे पढ़ते हैं और भगवान का शुक्र है उस दिन शनिवार था. नहीं तो पूरा स्कूल कब्रिस्तान में तब्दील हो जाता. लेकिन यकीन मानिए इतने दिनों में सिर्फ एक बार पीने का साफ़ पानी मिला है और राशन की कमी हो गई है. तमाम जगहों पर अजीब सी दुर्गन्ध आ रही है और गुमशुदा लोगों के बारे में डर लग रहा है."

राहत की कोशिशें

नेपाल में पिछले हफ़्ते आए भूकंप में मृतकों की संख्या 7000 से ज़्यादा हो गई है और हज़ारों अभी लापता है.

चारों तरफ़ तबाही का मंज़र है, जबकि नेपाल सरकार ने भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत पहुँचाने की कोशिश भी की है और दावे भी किए हैं.

बहुत से इलाकों में अभी न तो बिजली बहाल हुई है और न ही पीने का साफ़ पानी पहुँच सका है.

'सब कुछ नए सिरे से'

किट मियामोटो एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था से जुड़े इंजीनियर हैं जिनका काम उन इमारतों का निरीक्षण करना है जिन्हे भूकंप से नुकसान पहुँचता है.

हमारे साथ-साथ किट ने भी तीन ऐसे शहरों और कस्बों का दौरा किया जहाँ स्कूलों को भयानक नुकसान पहुंचा है.

किट मियामोटो ने बताया, "मैं हैरान हूँ कि नुकसान उस तरह का नहीं हुआ जैसा मैंने चीन के शिन्जियांग में देखा था. नेपाल में ज़्यादातर नई इमारतें नियमों का उल्लंघन करतीं दिखी हैं और ये बहुत दुखद है. इस सब को दुरुस्त करने से काम नहीं चलेगा, सब कुछ नए सिरे से बनाना होगा."

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