नेपाल: भूकंप में बचा रहा 'देवी' का निवास

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नेपाल में सदियों से एक बच्ची को देवी की तरह पूजने की परम्परा चली आ रही है.

कुमारी के नाम से मशहूर इस बाल-देवी को काठमांडू और नेपाल की रक्षक के तौर पर पूजा जाता है और इनका संबंध शाक्य समुदाय से होता है.

गौतम शाक्य का परिवार उन दर्जन भर परिवारों में से है जिनके ज़िम्मे 'देवी' की सुरक्षा का काम है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब भूकंप आया तब हम लोग पहली मंज़िल पर थे और तुरंत उतर कर ग्राउंड फ़्लोर पर आ गए. लेकिन देवी घर में ही रहीं और उन्हीं की कृपा से इस घर में सब सकुशल रहा".

'दुर्गा का अवतार'

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हालांकि यह भी हक़ीक़त है कि कुमारी के घर के सामने काठमांडू का प्रसिद्ध दरबार स्क्वेयर था जो अब मलबे में तब्दील हो चुका है.

इसमें करीब चार सौ वर्ष पुराने मंदिर थे जिसमे काष्टमंडप नामक एक 40 मीटर ऊंची इमारत भी थी जो भूकंप में धराशाई हो गई.

लेकिन हैरानी की बात है कि लगभग उसी तर्ज पर लकड़ी और ईंट से बना कुमारी निवास अब भी अपनी जगह खड़ा हुआ है.

गौतम शाक्य ने बताया कि घर में थोड़ी बहुत दरार तो पड़ी है लेकिन सब सकुशल है.

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उन्होंने कहा, "देवी की कृपा है बस कि यह ठिकाना बच गया और किसी को क्षति नहीं पहुंची. वरना सामने के मंदिरों का तो नामोनिशान मिट चुका है".

इन दिनों मतीना शाक्य यानी 'काठमांडू की कुमारी' नेपाल में हिन्दू धर्म की दुर्गा का अवतार समझी जाती हैं.

इनकी पूजा पूरे नेपाल में होती है और जब वे जवान हो जाती हैं तब उनकी जगह एक दूसरी कुमारी का चयन किया जाता है.

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गौतम शाक्य का मानना है कि कुमारी की शक्तियों के चलते ही उनका घर भूकंप से प्रभावित नहीं हुआ और ऐसा ही 1934 के भूकंप के दौरान भी हुआ था.

नेपाल में कई कुमारियों की पूजा होती है लेकिन काठमांडू की कुमारी या देवी को सबसे पवित्र या ताक़तवर समझा जाता है.

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