क्यों बढ़ रहा है वॉकिंग मीटिंग का चलन?

  • 11 मई 2015
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अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पिछले गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत में थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में, दुनिया ने दो अहम मुल्कों के शासनाध्यक्ष टहलते हुए और बातें करते हुए दिखे.

अब तक तो राष्ट्राध्यक्षों की बैठकें अमूमन बंद एयरकंडीशंड कमरों में चमकती हुई मेज़ और आरामदायक कुर्सियों पर ही होती रही हैं. लेकिन ओबामा और मोदी टहल भी रहे थे और बात भी कर रहे थे.

इस तरह टहलते हुए बैठक का ये कोई पहला मामला नहीं था. ट्विटर के जैक डोरसे और फेसबुक के मार्क ज़करबर्ग के बीच हुई वॉकिंग मीटिंग का वीडियो 2013 में वायरल हो चुका है.

वॉकिंग मीटिंग ज़्यादा फ़ायदेमंद?

कई विशेषज्ञों के मुताबिक वॉकिंग मीटिंग कहीं ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है. पहला फ़ायदा तो स्वास्थ्य से जुड़ा है.

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इसके अलावा टहलने के दौरान आपकी क्रिएटिविटी बढ़ती है और मौजूदा समस्या का हल तलाशने की संभावना ज़्यादा रहती है. ख़ास बात ये है कि इस दौरान किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के नहीं होने से आपका ध्यान भी नहीं बंटता.

वैसे वॉकिंग मीटिंग से भी पहले कई कंपनियों ने स्टैंडिंग मीटिंग के चलन को भी अपनाया और पाया कि इस दौरान समस्याओं के हल कुछ ज़्यादा ही निकलते हैं.

ज़ाहिर है वॉकिंग मीटिंग इसी मीटिंग का विस्तार है, जहां लोग सहजता से विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं.

इस तरह की मीटिंग वास्तविकता में कितनी फ़ायदेमंद होती है? इसे लेकर 2014 में स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी ने 176 छात्रों के बीच एक अध्ययन कराने पर पाया था कि क्रिएटिव थिंकिंग को मापने वाले एक टेस्ट में वॉकिंग करने वाले छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा था.

क्या होता है असर?

ऑफिस टेक्नालॉजी वेंडर ब्रदर यूके लिमिटेड के प्रबंध निदेशक फ़िल जोंस ने एक साल पहले वॉकिंग मीटिंग की शुरुआत की थी.

उन्होंने बताया, "लोग टहलते हुए ज़्यादा सहज होते हैं और अच्छी तरह बात कर पाते हैं. आप कहीं ज़्यादा मानवीय होकर बात करते हैं."

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ऐसे में एक सवाल ये भी है कि आप किस तरह से वॉकिंग मीटिंग का आयोजन करते हैं?

जोंस ने अपने सहकर्मियों के साथ चहलकदमी वाली मीटिंग से पहले एक 30 मिनट का रास्ता तलाशा.

यूके के पूर्वी मैनचेस्टर स्थित शहरी इलाके में दफ्तर से 30 मिनट की दूरी को उन्होंने रास्ते के तौर पर चुना.

अब वे सप्ताह में एक या दो बैठक इसी मार्ग पर करते हैं. अगर आधे घंटे की बैठक हो तो दूसरी जगह पहुँचने तक पूरी हो जाती है और एक घंटे की बैठक हो तो आना जाना हो जाता है.

लंदन की जनसंपर्क एजेंसी केचम के चीफ़ एन्गेजमेंट ऑफ़िसर स्टीफ़न वेडिंगटन के मुताबिक मीटिंग से पहले एजेंडे को संक्षिप्त करना बेहद ज़रूरी है.

स्टीफ़न कहते हैं, "दस पहलूओं वाले एजेंडे के साथ वॉकिंग मीटिंग कामयाब नहीं हो सकती."

संक्षिप्त रखें बैठक

स्विटजरलैंड के सेंट क्रेग्यू की मैनेजमेंट कोच नातालि वाइकिंस के मुताबिक पहले इसे दो-तीन लोगों के साथ करना चाहिए क्योंकि रास्ते में बहुत लोगों के साथ चलना मुश्किल है.

ऐसे में किसी पार्क या शांत जगह में ऐसी बैठक करना ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा.

जोंस की सलाह के मुताबिक नोटपैड और फोने की जगह लंबी और अच्छी बातचीत जरूरी है.

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अगर कोई सहकर्मी जोंस के साथ पहली बार मीटिंग में शामिल होने पहुंचता है तो वे उन्हें इलेक्ट्रानिक उपकरण छोड़कर आने को कहते हैं. हालांकि वॉक के बाद वे डेस्क पर दस मिनट का टाइम ज़रूर देकर बैठक की बातों का फॉलोअप प्लान तैयार करते हैं.

जो लोग नियमित तौर पर वॉकिंग मीटिंग का आयोजन करते हैं उनके मुताबिक इस तरह की बैठक ज़्यादा प्रभावी होती है.

वेडिंगटन के मुताबिक इस तरह की मीटिंग में फेस टू फेस कांटैक्ट नहीं होता है, इसलिए संवेदनशील मुद्दों को समझना आसान हो जाता है.

आसान है या मुश्किल

वैसे वाइकिंस के नए कंसेप्ट और जटिल मुद्दों के लिए वॉकिंग मीटिंग से बचना चाहिए, क्योंकि दो-तीन से ज़्यादा लोगों के मीटिंग में शामिल होने पर सब तक बातों तक पहुंचना संभव नहीं होगा.

वॉकिंग मीटिंग में वीडियो प्रजेंटेशन के जरिए भी आप चीजों को समझा नहीं सकते.

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कनाडा के वेंकुवर में सेंटर फॉर टोटल हेल्थ के फिजिशयन डायरेक्टर टेड यटान 10 सालों से वॉकिंग मीटिंग करते रहे हैं. उन्होंने मुताबिक ऐसी मीटिंग के लिए कपड़ों का चुनाव ध्यान से करना चाहिए.

यटान इस बात का ख़्याल रखते हैं कि उनकी मीटिंग में आने वाला शख़्स बाहर पहने जा सकने वाले आरामदेह कपड़ों में आया हो. सिएटल में बारिश के दौरान वे छाते के साथ वॉकिंग मीटिंग कर चुके हैं.

यटान कहते हैं, "बोर्ड रूम की मीटिंग की सबसे बोरिंग बात ये है कि आधे घंटे तक आपको किसी को देखते रहना होता है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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