ख़ां साहब को चुनाव आयोग ने पाजामा थमाया..

  • 11 मई 2015
पाकिस्तान में वोट देने के लिए क़तार में खड़े लोग. इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पाकिस्तान में आम चुनाव में वोट देने के लिए क़तार में खड़े लोग.(फ़ाइल फ़ोटो)

पाकिस्तान में हर नेता डेमोक्रेसी का चैंपियन है. हर पार्टी चाहती है कि आम चुनाव में कभी कोई बाधा न आए मगर ये भी चाहता है कि ख़ुद अपने दल के अंदर कभी चुनाव न होने पाएँ. और जब पंचायती राज की बात आती है तो सत्ता के मज़े लूटने वाली हर पार्टी पाँव सिकोड़ लेती है.

पाकिस्तान में जब भी स्थानीय निकाय और पंचायती चुनाव करवाए, किसी फ़ौजी डिक्टेटर ही ने करवाए. सिविलियन सरकारों ने हमेशा यही कोशिश की कि अधिकार केंद्र से प्रांत तक तो चला जाए पर उससे नीचे न जाए.

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Image caption पाकिस्तान में आम चुनाव के दौरान वोट देती महिला(फ़ाइल फ़ोटो).

यदि तंग आकर पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने तमाम राज्यों को मजबूर किया है कि वो आने वाले सितंबर तक स्थानीय निकाय चुनाव मुकम्मल कर लें, वरना अदालत गुद्दी पकड़कर ये काम करवाएगी. इसके बाद ख़ुदा-ख़ुदा करके सूबा ख़ैबर पख़्तुनख़्वा में 30 मई को स्थायनीय निकाय चुनाव हो रहे हैं.

जो उम्मीदवार पार्टी टिकट पर ये चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें तो अच्छे अच्छे चुनावी निशान मिल गए हैं. लेकिन जो आज़ाद उम्मीदवार हैं वो सिर पकड़े रो रहे हैं.

क्योंकि किसी को गाजर का निशान मिला है तो किसी को मूली थमा दी गई है और कोई भिंडी लिए घूम रहा है तो किसी को हरी मिर्च मिल गई है.

बकरी और चूहे का क्या करें?

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Image caption पाकिस्तान में आम चुनाव के दौरान वोट देते लोग. (फ़ाइल फ़ोटो)

चलें यहाँ तक तो ठीक है, कम से कम उम्मीदवार अपने वोटर को ये तो कह सकता है कि अगर सरपंच बन गया तो सब्जी सस्ती करवा देगा.

मगर वो उम्मीदवार क्या करें जिन्हें चुनाव आयोग ने मुर्गे की तस्वीर पकड़ा दी या फिर बकरी दे दी. ऐसे ही एक उम्मीदवार ने चुनाव आयोग से अपील की कि भागवान, बकरी की जगह बकरा ही दे दो, कुछ तो इज़्ज़त रह जाए पठान वोटरों के बीच.

इसपर चुनाव आयोग के एक मेंबर ने उम्मीदवार के कान में कहा, शुक्र करो बकरी मिल गई जिन्हें चूहा, साँप, मगरमच्छ, ऐश ट्रे और बच्चों का फीडर टिका दिया गया है उनसे जाकर पूछो. ये सुनते ही उम्मीदवार बकरी की तरह सिर झुकाकर कमरे से सटक लिया.

खाँ साहब का पाजामा

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मगर वो ख़ाँ साहब क्या करें जिन्होंने सारा जीवन सलवार-कमीज़ में बिता दिया लेकिन चुनाव आयोग ने पाजामे का निशान थमा दिया.

ये ग़रीब तो अपना चुनाव निशान बांस पर लटकाने से भी गया.

अलबत्ता उसके विरोधी उम्मीदवार के कार्यकर्ता ज़रूर प्लास्टिक का मगरमच्छ उठाए गली गली घूम रहे हैं और इस मगरमच्छ की थूथनी से आधा पाजामा लटक रहा है....और भाग लो स्थानीय निकाय चुनाव में!

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