वो सड़क हादसा, एक डॉक्टर और हेलमेट का चलन

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80 साल पहले टीई लॉरेंस की मौत एक सड़क हादसे के दौरान हुई थी. इस हादसे से पहले न तो उन्होंने सोचा था और न ही इनका इलाज करने वाले चिकित्सकों ने कि आने वाले दिनों में उनकी मौत हजारों लोगों के लिए जीवन लेकर आएगी.

19 मई, 1935 की रविवार की सुबह लॉरेंस का निधन हुआ था. लॉरेंस प्रथम विश्वयुद्ध के नायकों में एक थे, उन्हें लॉरेंस ऑफ़ अरेबिया का निक नेम दिया गया था. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुई अरब क्रांति का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है.

ब्रिटेन के विद्वानों और लेखकों में भी उनकी गिनती होती थी.

दरअसल वे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हुए थे और छह दिनों के इलाज के बाद भी चिकित्सक उन्हें बचा नहीं पाए.

उनकी मौत पर उनके दोस्त विंस्टन चर्चिल ने कहा, "लॉरेंस के रूप में हमने अपने समय के महान आदमी को खो दिया." उनके निधन पर न्यूयार्क टाइम्स ने भी माना था कि एक प्रतिभा खत्म हो गई और इस मौत को टाला जा सकता था.

हादसे की वजह पता नहीं

लॉरेंस अपने घर से ब्राउ सुपीरियर एसएस 100 मोटरसाइकिल से निकले थे और दो साइकिल सवार को बचाने की कोशिश में दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे.

लॉरेंस जिस बाइक पर सवार थे उसकी स्पीड आसानी से 100 मील प्रति घंटे तक पहुंच सकती थी लेकिन वे तेज रफ्तार से चल रहे थे इसका कोई संकेत नहीं मिला था.

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हादसा कैसे हुआ इसको लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी. टीई लॉरेंस सोसायटी के चेयरमैन फिलिप नियाले कहते हैं, "1935 में सड़क कैसी रही होगी ये भी नहीं मालूम है लेकिन वे हादसे के शिकार हो गए थे."

फिलिप आगे कहते हैं, "उन्होंने हैंडल पर से नियंत्रण खो दिया था. बाइक के ब्रेक बहुत अच्छे नहीं थे. सड़क पर रोशनी थी तो वे स्पीड हासिल कर सकते थे."

बहरहाल लॉरेंस के किसी निधन से जुड़े आलेख में ये नहीं लिखा है कि हादसे के वक्त उन्होंने हेलमेट नहीं पहना हुआ था. लेकिन उनकी मौत के बाद ही हेलमेट का इस्तेमाल चलन में आया.

लॉरेंस को सिर में थी चोट

लॉरेंस का इलाज करने वाले डॉक्टरों में हग केयर्न्स भी शामिल थे, जो ब्रिटेन के शुरुआती न्यूरोसर्जनों में एक थे.

उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा था, "लॉरेंस के मस्तिष्क को काफी चोट पहुंची थी. हेलमेट के बिना सिर के जमीन से टकराने पर उनका दिमाग क्षतिग्रस्त हो गया था. अगर वे जीवित भी रहते तो शायद वे नेत्रहीन होते और कभी बोल नहीं पाते."

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लॉरेंस की मौत को केयर्न्स भुला नहीं पाए. केयर्न्स द्वारा स्थापित नफील्ड डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जरी में कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन एलेक्स ग्रीन ने कहा, "हमें केयर्न्स की डायरी से पता चलता है कि वे मोटरसाइकिल सवारों को सिर में लगने वाली चोट का अध्ययन करने लगे थे. लॉरेंस की मृत्यु के समय में ही उनकी डायरी में इसका जिक्र मिलता है."

केयर्न्स ने बाइक सवारों के सिर में लगने वाली चोटों पर जानकारियां एकत्रित करनी शुरू कीं. उनका ये काम बेहद अहम साबित हुआ. लॉरेंस की मौत के छह साल के बाद केयर्न्स ने अपना पहला शोध अध्ययन अक्टूबर, 1941 में पेश किया.

तब वे सेना में न्यूरो सर्जन थे. उनके शुरुआती अध्ययन ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हए. इसका शीर्षक था- मोटर साइकिल सवारों के सिर में चोट और हेलमेट की अहमियत.

हेलमेट का असर

इसमें उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध से 21 महीने पहले 1,844 बाइक सवारों की मौत ब्रिटिश सड़कों पर हुई और इनमें दो तिहाई सिर में चोट के चलते मौत के शिकार हुए थे.

द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत के बाद सितंबर, 1939 के बाद 21 महीनों में 2, 279 बाइक सवारों की सड़क पर मौत हुई.

इसकी तुलना में 2013 के दौरान 28 महीनों से कीजिए, इस दौरान ब्रिटेन में 331 बाइक सवारों की मौत हुई.

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बहरहाल, केयर्न्स ने सावधानी दिखाते हुए ये दावा नहीं किया कि हेलमेट से सबकुछ बदल जाएगा. उनकी सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि उन्हें हेलमेट पहन कर बाइक चलाने वालों के उदाहरण नहीं मिल रहे थे जो ये दिखा सकें कि हेलमेट पहनना सुरक्षित है.

उन्होंने किसी तरह ऐसे सात बाइक सवारों के उदाहरण जुटाए जो हेलमेट पहने हुए दुर्घटनाग्रस्त हुए थे और सबके सब बच गए थे.

उन्होंने लिखा था, "हेलमेट पहने हुए लोगों के सिर में ज़्यादा चोट नहीं थी. हां, उनमें चार लोगों का हेलमेट डैमेज हो गया था."

इसी सप्ताह सेना के दो मोटरसाइकिल सवारों की मौत दुर्घटना में हो गई तो सेना ने केयर्न्स की बात मानते हुए अपने राइडरों के लिए हेलमेट पहनने का आदेश जारी कर दिया.

एलेक्स ग्रीन कहते हैं, "उन्होंने हेलमेट के फ़ायदे को लेकर साइंटिफिक आंकड़े दिए."

1973 में बना कानून

1943 में केयर्न्स ने अपने दूसरे शोध पत्र में बताया कि अच्छे हेलमेट से दुर्घटना होने की स्थिति में 75 फीसदी फ्रैक्चर को कम किया जा सकता है.

1946 में केयर्न्स ने अपने अध्ययन में दिखाया कि सेना के लोगों द्लारा हेलमेट पहनने से मोटरसाइकिल दुर्घटना में होने वाली मौतों में काफी कमी आई है.

उन्होंने लिखा," अब इस बात में संदेह नहीं रहा कि हेलमेट पहनने से मोटरसाइकिलों की जान बचाई जा सकती है."

केयर्न्स के तमाम शोधों और विश्लेषण के बाद भी 1973 में ब्रिटिश संसद मे मोटर बाइक और मोपेड चालकों के लिए हेलमेट पहनने को अनिवार्य करने का कानून बनाया.

लेकिन इस बदलाव को देखने के लिए हग केयर्न्स जीवित नहीं बचे. कैंसर के चलते 1952 में उनकी मौत हो गई थी.

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