नेपाल: भूकंप में पचास से ज़्यादा की मौत

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नेपाल में मंगलवार को आए भूकंप में मरने वालों की संख्या पचास से ऊपर पहुंच गई है जबकि भारत में भी भूकंप के कारण अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है.

नेपाल में भूकंप से प्रभावित इलाकों में रात की वजह से मलबे में फँसे लोगों को ढ़ूंढ़ने और बचाव कार्यों में दिक़्क़तें आ रही हैं.

मंगलवार को आए भूकंप की तीव्रता दो हफ्ते पहले आए भूकंप से कुछ कम थी. सहायताकर्मियों का कहना है कि भूकंप से कितना नुकसान हुआ है, ये अभी बताना संभव नहीं है.

भूकंप का केंद्र राजधानी काठमांडू के पूर्व में था, जहां भूकंप के बाद लोगों में अफरातफरी मच गई.

पहले झटके के बाद, रह-रह कर कई झटके महसूस किए गए. इस भूकंप से कई जगह इमारतें ढहने, भूस्खलन की भी ख़बरे आईं.

बीबीसी ने इस भूकंप के प्रत्यक्षदर्शी कुछ लोगों से बात कर समझा कि उन्हें कैसा महसूस हुआ जब भूकंप आया.

स्टीव कॉलिन्स, काठमांडू

सहायता संस्था टीयरफंड के लिए काम करने वाले स्टीव कॉलिन्स पिछले तीन साल से काठमांडू में रह रहे हैं. जब भूकंप आया तो वह अपने कार्यालय में थे.

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"अचानक सब कुछ हिलने लगा. शुरुआत में यह बहुत तगड़ा नहीं था और हम सब इमारत से बाहर निकल आए. लेकिन जब हम बाहर अहाते में थे तो सब कुछ बहुत तेजी से हिलने लगा और हम सब झुक गए ताकि गिरने से बच जाएं. इसके साथ ही हम दीवारों से ज़्यादा से ज़्यादा दूर जाने लगे."

"मैं साइकिल में अपनी बीवी और बच्चों को ढूंढने के लिए निकला तो देखा कि रास्ते में पेड़ और कुछ दीवारें गिरी हुई थीं. सड़क में मौजूद लोगों में काफ़ी डर और घबराहट थी."

"ऐसा लगा कि भूकंप काफ़ी देर तक आता रहा और जब यह ख़त्म हो गया तब भी हमारे पैरों के नीचे की ज़मीन एक नाव की तरह कांप रही थी."

युवराज अग्रवाल, धुलिखेल

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युवराज अग्रवाल शेफील्ड के एक ऑर्थोपीडिक सर्जन हैं जो काठमांडू के नज़दीक धुलिखेल के एक अस्पताल में सेवा कर रहे हैं.

"जब भूकंप आया तब मैं 25 तारीख के भूकंप में घायल एक महिला के पैर का ऑपरेशन कर रहा था. सर्जरी के उपकरण टेबल के गिरने लगे. मेरी 23 वर्षीया मरीज़ को स्पाइनल अनेस्थेटिक दिया गया था और वह अपने पैर नहीं हिला सकती थीं. वह शांत बनी रहीं."

"मैं अपनी मरीज़ को छोड़ नहीं सकता था इसलिए मैं उसके साथ बना रहा. "

सायरा हंट, काठमांडू

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"हम अपने हॉस्टल में बात कर रहे थे कि जब हमारे आस-पास के बैड हिलने लगे और इसकी तीव्रता बढ़ती गई. ऐसा लगा कि हमारे नीचे की ज़मीन स्वीमिंग पूल की तरह फ़िसल रही है."

"हम कमरे से बाहर भागे, सीढ़ियों की ओर, जो लगातार हिल रही थीं. हम नीचे पहुंचे जहां हमारे चारों ओर बहुमंज़िला इमारतें थीं. हम लगातार ऊपर देखते रहे कि कहीं कोई मलबा तो नहीं गिर रहा है. हमें दूर से एंबुलेंस और लोगों के चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थीं."

बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये, बालुवा

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योगिता लिमये बीबीसी न्यूज़ के लिए काम करती हैं और भूकंप के पुराने केंद्र से 20 किलोमीटर दूर थीं.

"मैंने दूर पहाड़ी से धूल उड़ती और चट्टान-पत्थर नीचे गिरते हुए देखे."

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